लखनऊ। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MOSPI), राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO-FOD), क्षेत्रीय कार्यालय, लखनऊ तथा लखनऊ विश्वविद्यालय के सांख्यिकी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 20वें राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के अवसर पर लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष के कार्यक्रम की थीम “प्रशासनिक आँकड़ों की क्षमता का दोहन (Unlocking the Potential of Administrative Data)” रही। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। कार्यक्रम के प्रारम्भ में जनसंख्या अनुसंधान केंद्र एवं आईक्यूएसी के निदेशक प्रो. विनोद सिंह का स्वागत एवं सम्मान राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के निदेशक पुरुषोत्तम वर्मा द्वारा स्मृति-चिह्न प्रदान कर किया गया। मुख्य अतिथि अखिलेश कुमार मिश्रा, पूर्व महानिदेशक, MOSPI का स्वागत डिम्पल सिंह (उपनिदेशक, क्षेत्रीय कार्यालय, लखनऊ) द्वारा किया गया। वहीं लखनऊ विश्वविद्यालय के सांख्यिकी विभागाध्यक्ष प्रो. शशि भूषण का स्वागत अंशिका, उपनिदेशक द्वारा किया गया। कार्यक्रम के मंच पर मनोज कुमार, उप महानिदेशक, क्षेत्रीय कार्यालय, लखनऊ तथा डॉ. सुचिता, उप महानिदेशक सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।अपने उद्बोधन में डॉ. सुचिता ने सांख्यिकीय साक्षरता को बढ़ावा देने पर बल देते हुए उपलब्ध आँकड़ों, रियल-टाइम डेटा तथा प्रशासनिक आँकड़ों के प्रभावी उपयोग के माध्यम से नीति-निर्माण एवं निर्णय प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने सांख्यिकी के जनक प्रो. पी.सी. महालनोबिस के अमूल्य योगदान का स्मरण करते हुए उनके कार्यों को प्रेरणास्रोत बताया। मनोज कुमार, उप महानिदेशक, क्षेत्रीय कार्यालय, लखनऊ ने अपने संबोधन में क्षेत्रीय सर्वेक्षणों के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा करते हुए संकलित आँकड़ों की गुणवत्ता एवं विश्वसनीयता बनाए रखने पर विशेष बल दिया। उन्होंने डेटा अनलॉकिंग (Data Unlocking) की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए बताया कि इससे सरकार को साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने तथा शोध एवं विकास कार्यों को गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।मुख्य अतिथि अखिलेश कुमार मिश्रा, पूर्व महानिदेशक, MOSPI ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा, “जहाँ शब्द पर्याप्त नहीं होते, वहाँ आँकड़े बोलते हैं।” उन्होंने प्रशासनिक आँकड़ों के प्रभावी उपयोग, विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आँकड़ों के समेकन तथा बिग डेटा से उपयोगी सूचनाओं के निष्कर्षण की प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रो. शशि भूषण, विभागाध्यक्ष, सांख्यिकी विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रशासनिक आँकड़ों की अवधारणा, सरकारी आँकड़ों के प्रमुख स्रोतों, स्वास्थ्य एवं सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में उनके अनुप्रयोग, उपयोग में आने वाली चुनौतियों, भविष्य की संभावनाओं तथा विभिन्न सांख्यिकीय उपकरणों की उपयोगिता पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने सांख्यिकी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, “डेटा नया तेल है और सांख्यिकी उसकी रिफाइनरी है”| इसी क्रम में प्रो. विनोद सिंह ने आँकड़ों की विश्वसनीयता पर विशेष बल देते हुए भारत की द्वितीय पंचवर्षीय योजना के निर्माण में प्रो. पी.सी. महालनोबिस के ऐतिहासिक एवं अमूल्य योगदान पर प्रकाश डाला। प्रो. पी.सी. महालनोबिस ने प्रथम लैब अर्थशास्त्र विभाग लखनऊ विश्वविद्यालय में स्थापित की| कार्यक्रम में सांख्यिकी एवं शिक्षा जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियाँ उपस्थित रहीं, जिनमें प्रो. अकील अहमद एवं प्रो. जी. जी. अग्रवाल प्रमुख थे। सभी वक्ताओं ने शोध, सुशासन एवं राष्ट्र निर्माण में सांख्यिकी की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। युवा पीढ़ी में सांख्यिकी के प्रति जागरूकता एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के उद्देश्य से लखनऊ विश्वविद्यालय एवं उससे संबद्ध महाविद्यालयों, जिनमें नेशनल पीजी कॉलेज तथा जय नारायण मिश्र पीजी कॉलेज के बी.एससी., एम.एससी. के विद्यार्थियों एवं पीएच.डी. शोधार्थियों के लिए प्रश्नोत्तरी (क्विज़) एवं पोस्टर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। पोस्टर प्रतियोगिता में लखनऊ विश्वविद्यालय की रिशिका रस्तोगी को प्रथम पुरुस्कार मिला तथा क्विज में भी लखनऊ विश्वविद्यालय की टीम ने प्रथम पुरुस्कार प्राप्त किया |कार्यक्रम का समापन औपचारिक धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ, जिसे कार्यक्रम के कोऑर्डिनेटर्स – डिम्पल सिंह, उपनिदेशक, क्षेत्रीय कार्यालय, लखनऊ, डॉ. अशोक कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर एवं डॉ. चाँदनी कुमारी, सहायक प्रोफेसर, सांख्यिकी विभाग लखनऊ ने प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी मेहमानों, वक्ताओं, प्रतिभागियों और उपस्थित लोगों का कार्यक्रम को सफल बनाने में उनके बहुमूल्य योगदान और उपस्थिति के लिए दिल से आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय के शिक्षको और NSSO के विभिन्न रीजनल ऑफिस के अधिकारियों ने भाग लिया, जिनमें प्रो मोनिशा बनर्जी, डॉ. राजीव सक्सेना, प्रो. मुकेश कुमार, डॉ. राहुल वार्ष्णेय और डॉ. आकाश अस्थाना शामिल थे।
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