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लखनऊ विश्‍वविद्यालय NMMTA पुरस्‍कार में रुचिका यादव प्रथम, अक्कनागाममा द्वितीय व तीसरे स्‍थान पर रहीं अंशी सिंह

लखनऊ। बुनियादी चिकित्सा विज्ञान में अनुसंधान पर क्लिनिकल वैज्ञानिकों के 7वें राष्ट्रीय सम्मेलन “बायोमेडिका 2026” (BIOMEDICA 2026) का दूसरा और समापन दिवस लखनऊ विश्वविद्यालय (नया परिसर), जानकीपुरम विस्तार के फार्मास्युटिकल साइंसेज संस्थान में आयोजित किया गया। इस दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन नेशनल एम.एससी. मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (NMMTA) द्वारा फार्मास्युटिकल साइंसेज संस्थान, लखनऊ विश्वविद्यालय के सहयोग से किया गया था। इस सम्मेलन का मुख्य विषय “बुनियादी चिकित्सा विज्ञान में एकीकृत अनुसंधान के माध्यम से क्लिनिकल उत्कृष्टता को बढ़ावा देना” था। दूसरे दिन की वैज्ञानिक कार्यवाही लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर जय प्रकाश सैनी के संरक्षण में जारी रही। फार्मास्युटिकल साइंसेज संस्थान के निदेशक और आयोजन अध्यक्ष प्रोफेसर पुष्पेंद्र कुमार त्रिपाठी ने सम्मेलन के शैक्षणिक और संगठनात्मक ढांचे को नेतृत्व प्रदान करने पर जोर दिया। NMMTA के आयोजन सचिव डॉ. सुखेस मुखर्जी ने सम्मेलन की कार्यवाही का संचालन किया। दूसरे दिन दिग्गजों द्वारा प्लेनरी लेक्चर (मुख्य व्याख्यान), कीनोट एड्रेस (मुख्य भाषण) और विशेष वैज्ञानिक सत्रों के साथ-साथ प्रतिनिधियों द्वारा वैज्ञानिक मौखिक प्रस्तुतियां (ओरल प्रेजेंटेशन) शामिल थीं। इस दौरान मुख्य रूप से मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स, लक्षित दवा वितरण (टार्गेटेड ड्रग डिलीवरी), मेटाबॉलोमिक्स, फिजियोलॉजी और क्लिनिकल अभ्यास में उनके अनुप्रयोगों में उभरते विकास पर चर्चा की गई। दूसरे दिन का एक मुख्य आकर्षण प्रोफेसर डी. एम. वासुदेवन का “मॉलिक्यूलर डायग्नोसिस में प्रगति — बेंच से बेडसाइड तक” विषय पर दिया गया प्लेनरी लेक्चर था। उन्होंने प्रयोगशाला अनुसंधान से लेकर क्लिनिकल अनुप्रयोगों तक मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक तकनीकों के विकास को रेखांकित किया और आधुनिक स्वास्थ्य सेवा में उनके बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। फार्मास्युटिकल साइंसेज संस्थान के निदेशक प्रोफेसर पुष्पेंद्र कुमार त्रिपाठी ने “टार्गेटेड ड्रग डिलीवरी के लिए डेंड्रिमर-आधारित इंजीनियर्ड नैनोकण” पर अपना कीनोट एड्रेस दिया। उनकी प्रस्तुति ने टार्गेटेड और प्रभावी दवा वितरण में डेंड्रिमर-आधारित इंजीनियर्ड नैनोकणों की क्षमता को उजागर किया। बायोटेक पार्क, लखनऊ के सलाहकार प्रोफेसर शिव पूजन ने “क्रिटिकल केयर सेटिंग्स में एनएमआर-आधारित मेटाबॉलोमिक्स” पर एक वैज्ञानिक बात रखी। उन्होंने चयापचय (मेटाबॉलिक) परिवर्तनों को समझने और क्रिटिकल-केयर अनुसंधान में उनके संभावित अनुप्रयोगों में मेटाबॉलोमिक दृष्टिकोण और एनएमआर-आधारित तकनीकों के महत्व पर चर्चा की। सम्मेलन में NMMTA के अध्यक्ष प्रोफेसर अर्जुन मैत्र द्वारा “सुलभ फिजियोलॉजी” (Accessible Physiology) और प्रोफेसर कन्नन वैद्यनाथन द्वारा “मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स” पर विशेष सत्र भी आयोजित किए गए। इन सत्रों ने प्रतिनिधियों को फिजियोलॉजी और मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक विज्ञान में समकालीन विकास के बारे में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान की। मौखिक प्रस्तुति सत्रों ने प्रतिनिधियों, स्नातकोत्तर विद्वानों, संकाय सदस्यों और शोधकर्ताओं को अपने मूल वैज्ञानिक कार्यों को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान किया। इन प्रस्तुतियों के साथ-साथ पहले दिन आयोजित पोस्टर प्रस्तुतियों का मूल्यांकन ‘सर्वश्रेष्ठ मौखिक प्रस्तुति’ और ‘सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुति’ के लिए NMMTA पुरस्कारों के तहत किया गया।

सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुति पुरस्कार इन्हें प्रदान किए गए:

  • प्रथम पुरस्कार: रुचिका यादव
  • द्वितीय पुरस्कार: अक्कनागाममा
  • तृतीय पुरस्कार: अंशी सिंह,  इंस्टिट्यूट  ऑफ़  फार्मास्यूटिकल  साइंसेज , यूनिवर्सिटी  ऑफ़  लखनऊ

सर्वश्रेष्ठ मौखिक प्रस्तुति पुरस्कार इन्हें प्रदान किए गए:

  • प्रथम पुरस्कार: मयूरी बिसेन
  • द्वितीय पुरस्कार: संजना जैन

तृतीय पुरस्कार: डॉ०  भूमिका  उपाध्याय

  • समापन समारोह इस सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था, जो बुनियादी चिकित्सा विज्ञान में उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान को बढ़ावा देने और युवा वैज्ञानिक प्रतिभाओं को निखारने के प्रति सम्मेलन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह सम्मेलन प्रेरक सत्रों के साथ संपन्न हुआ, जिसमें विशिष्ट अतिथि, सम्मेलन आयोजक, संकाय सदस्य, शोधकर्ता और प्रतिनिधि शामिल हुए। पुरस्कार विजेताओं को उनके वैज्ञानिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया और उन्हें नवीन व प्रभावशाली अनुसंधान जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया गया। समापन सत्र के दौरान वक्ताओं ने अंतर-विषयक (इंटरडिसिप्लिनरी) सहयोग और बुनियादी चिकित्सा विज्ञान में खोजों को बेहतर डायग्नोस्टिक और चिकित्सीय दृष्टिकोणों में बदलने के महत्व पर जोर दिया। 23 अगस्त 2026 को सम्मेलन की कार्यवाही NMMTA की वार्षिक आम बैठक (AGM) के साथ समाप्त हुई। इस दो दिवसीय सम्मेलन ने अनुसंधान के प्रसार, वैज्ञानिक बातचीत, अंतर-विषयक सहयोग और शैक्षणिक उत्कृष्टता की पहचान के लिए एक जीवंत मंच प्रदान किया। इसने डायग्नोस्टिक्स, थेरेप्यूटिक्स और क्लिनिकल देखभाल को आगे बढ़ाने में एकीकृत बायोमेडिकल अनुसंधान के महत्व को फिर से स्थापित किया। बायोमेडिका 2026 शैक्षणिक उत्साह और एकीकृत बायोमेडिकल अनुसंधान को आगे बढ़ाने, युवा वैज्ञानिक प्रतिभाओं को पोषित करने और बुनियादी वैज्ञानिक खोजों व क्लिनिकल उत्कृष्टता के बीच की दूरी को पाटने की नई प्रतिबद्धता के साथ संपन्न हुआ।
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