गोरखपुर । मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियंत्रण विभाग द्वारा रविवार को विवेकानंद सेमिनार हॉल में वायुमंडलीय परीक्षण में माइक्रोवेव तकनीक की भूमिका पर विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. सुधांशु वर्मा ने किया।टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड, नोएडा के प्रोडक्शन हेड डॉ. सुरेन्द्र कुमार ने ‘Invisible Waves, Visible Skies: Probing the Atmosphere with Microwaves’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि वायुमंडल की स्थिति और उसमें होने वाले बदलावों की निगरानी के लिए विभिन्न प्रकार के सेंसर और रडार तकनीकों का उपयोग किया जाता है।उन्होंने बताया कि 403 मेगाहर्ट्ज रेडियोसोंड और पायलटसोंड के माध्यम से ऊपरी वायुमंडल में दबाव, तापमान, आर्द्रता तथा हवा की गति और दिशा का प्रत्यक्ष मापन किया जाता है। वहीं, लिडार (सीलोमीटर) तकनीक से बादलों की ऊंचाई और उनकी विभिन्न परतों का पता लगाया जाता है। सी-बैंड और एक्स-बैंड वेदर रडार की मदद से वर्षा, तूफान की संरचना, हवा के पैटर्न तथा धूल और अन्य कणों की निगरानी की जाती है।डॉ. कुमार ने माइक्रोवेव रेडियोमीटर, विंड प्रोफाइलर और उपग्रह आधारित माइक्रोवेव सेंसरिंग जैसी तकनीकों की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को रेडियोसोंड और मौसम रडार के लिए नए एवं नवोन्मेषी एंटीना डिजाइन विकसित करने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न ट्रांससीवर किट्स का प्रदर्शन भी किया और आगे के अध्ययन एवं प्रयोग के लिए इन्हें विभाग को उपलब्ध कराया।कार्यक्रम में डॉ. सुधांशु वर्मा, डॉ. प्रवीण राव सहित विभाग के अन्य प्रतिभागियों और विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की।
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