गाजीपुर। ज़ाकिर हुसैन विक्की प्रदेश अध्यक्ष, पूर्वी उत्तर प्रदेश ने बताया कि भारतीय आवाम पार्टी (राष्ट्रीय) अब अब्दुल (पसमांदा) अपने हिस्से की दरी खुद बिछाएगा भी और साफ भी करेगा, लेकिन अपने अधिकारों से समझौता नहीं करेगा। असदुद्दीन ओवैसी के कथित बयान “अब्दुल दरी नहीं बिछाएगा” के संदर्भ में भारतीय आवाम पार्टी (राष्ट्रीय) का स्पष्ट मत है कि अब्दुल यानी पसमांदा समाज का नौजवान अब केवल दूसरों के राजनीतिक मंचों की व्यवस्था करने तक सीमित नहीं रहना चाहता। वह अपने हिस्से की दरी खुद बिछाएगा, जरूरत पड़े तो उसे खुद साफ भी करेगा, लेकिन अब अपने राजनीतिक, सामाजिक और संवैधानिक अधिकारों से समझौता नहीं करेगा। कई दशकों से पसमांदा समाज के बड़े हिस्से ने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के सवालों पर उपेक्षा महसूस की है। मुस्लिम समाज के भीतर भी नेतृत्व और संसाधनों में समान भागीदारी का सवाल आज गंभीर चर्चा की मांग करता है। ऐसे में केवल भावनात्मक नारों और नेतृत्व के सपनों से काम नहीं चलेगा। समाज को यह भी देखना होगा कि शिक्षा में कितने अवसर मिले, रोजगार के कितने रास्ते खुले, स्वास्थ्य सुविधाएँ कितनी सुलभ हुईं और राजनीतिक संस्थाओं में वास्तविक भागीदारी कितनी सुनिश्चित हुई। भारतीय आवाम पार्टी (राष्ट्रीय) का मानना है कि पसमांदा समाज को किसी की कृपा नहीं, बल्कि संविधान के दायरे में अपने अधिकार, सम्मान और अवसर चाहिए। अब्दुल को केवल भीड़ का हिस्सा या किसी नेता के मंच का कार्यकर्ता बनकर नहीं रहना है; उसे अपनी योग्यता, मेहनत और जनसेवा के बल पर शिक्षक, चिकित्सक, उद्यमी, अधिकारी, विधायक, सांसद और नीति-निर्माता बनने के अवसर भी मिलने चाहिए। हमारा संदेश स्पष्ट है—दरी बिछाना या साफ करना कोई अपमान नहीं; अपमान तब है, जब मेहनत करने वाले इंसान को बराबरी का अवसर और सम्मान न मिले। श्रम का सम्मान होना चाहिए और सत्ता तथा संसाधनों में न्यायपूर्ण भागीदारी भी सुनिश्चित होनी चाहिए। यह लड़ाई किसी धर्म, जाति या व्यक्ति के विरुद्ध नहीं, बल्कि असमानता, अवसरों की कमी और राजनीतिक उपेक्षा के विरुद्ध है। पसमांदा समाज के साथ-साथ समाज के हर वंचित वर्ग, युवा पीढ़ी—जेन जी और जेन अल्फा—को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और राजनीतिक हिस्सेदारी में समान अवसर मिलना चाहिए। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के राष्ट्रवादी विचारों से प्रेरणा लेते हुए भारतीय आवाम पार्टी (राष्ट्रीय) का संकल्प है कि राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि अंतिम पंक्ति में खड़े नागरिक को सम्मान, अधिकार और अवसर दिलाना होना चाहिए। अब अब्दुल अपने हिस्से की दरी खुद बिछाएगा भी, साफ भी करेगा और अपने हक की आवाज भी बुलंद करेगा। वह किसी का मोहरा नहीं, अपने भविष्य का निर्माता बनेगा।
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