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एमएमएमयूटी के शोधकर्ताओं ने विकसित की डिजिटल सुरक्षा बढ़ाने वाली तकनीक, मिला पेटेंट

लखनऊ। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी नई हार्डवेयर आधारित तकनीक विकसित की है, जो उच्च गुणवत्ता वाले प्स्यूडो-रैंडम नंबर तेज गति से तैयार कर सकती है। इस तकनीक का उपयोग साइबर सिक्योरिटी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और डिजिटल कम्युनिकेशन सहित विभिन्न क्षेत्रों में किया जा सकता है। विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. आर.के. चौहान एवं डॉ. मंगलदीप गुप्ता को “हार्डवेयर एफिशिएंट प्स्यूडो-रैंडम नंबर जनरेटर यूजिंग लॉरेंज, चेन, ल्यू एंड पेहलिवान कैओटिक सिस्टम्स ऑन एफपीजीए” शीर्षक से इस तकनीक का पेटेंट प्रदान किया गया है। यह तकनीक लॉरेंज, चेन, ल्यू और पेहलिवान द्वारा विकसित गणितीय कैओटिक सिस्टम्स का उपयोग करती है। इनके माध्यम से फील्ड-प्रोग्रामेबल गेट एरे (एफपीजीए) हार्डवेयर पर प्स्यूडो-रैंडम सीक्वेंस तैयार किए जाते हैं। इस तकनीक की खासियत यह है कि रैंडम नंबर जनरेशन का कार्य सीधे हार्डवेयर के माध्यम से किया जाता है, जिससे संसाधनों की आवश्यकता कम करने के साथ-साथ तेज गति से संचालन संभव होता है। आधुनिक डिजिटल तकनीक में प्स्यूडो-रैंडम नंबर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेष रूप से ऐसे डिजिटल सिस्टम में, जहां डेटा का तेज और सुरक्षित प्रसंस्करण आवश्यक होता है, इनका व्यापक उपयोग किया जाता है। एमएमएमयूटी की यह तकनीक कैओस थ्योरी, डिजिटल हार्डवेयर डिजाइन और साइबर सिक्योरिटी को एक साथ जोड़ते हुए एफपीजीए फ्रेंडली समाधान उपलब्ध कराती है। पेटेंट के अनुसार, इस तकनीक का संभावित उपयोग साइबर सिक्योरिटी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), कम्युनिकेशन सिस्टम, एम्बेडेड इलेक्ट्रॉनिक्स और साइंटिफिक कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। यह तकनीक सीधे आम लोगों को दिखाई नहीं देगी, लेकिन इसके लाभ उन डिजिटल सेवाओं के माध्यम से आम लोगों तक पहुंच सकते हैं, जिनका वे रोजाना इस्तेमाल करते हैं। तेज और अधिक कुशल प्स्यूडो-रैंडम नंबर जनरेशन से ऑनलाइन कम्युनिकेशन, स्मार्ट एवं कनेक्टेड डिवाइस और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को अधिक सुरक्षित और तेज बनाने में मदद मिल सकती है। इससे भविष्य में ऑनलाइन लेनदेन, स्मार्ट डिवाइस, कनेक्टेड होम, डिजिटल कम्युनिकेशन और अन्य इंटरनेट आधारित सेवाओं की सुरक्षा और कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में सहयोग मिल सकता है। आईओटी और कनेक्टेड तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ने के साथ इस तरह की तकनीक आम नागरिकों के लिए अधिक सुरक्षित डिजिटल वातावरण तैयार करने में उपयोगी हो सकती है। एमएमएमयूटी की यह उपलब्धि इस बात का उदाहरण है कि किस प्रकार उन्नत गणितीय मॉडल और आधुनिक हार्डवेयर तकनीक को मिलाकर डिजिटल सुरक्षा और कंप्यूटिंग से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों का समाधान विकसित किया जा सकता है। उच्च गुणवत्ता वाले प्स्यूडो-रैंडम सीक्वेंस को कम संसाधनों में तेज गति से तैयार करने की क्षमता भविष्य में अधिक तेज, सुरक्षित और संसाधन-कुशल इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

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