मुहम्मद खालिद
गाजीपुर। भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में करवा चौथ का विशेष धार्मिक एवं सामाजिक महत्व है। पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ सुहागिन महिलाएं श्रद्धा और विश्वास के साथ यह व्रत रखती हैं। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाने वाला यह पर्व पति-पत्नी के प्रेम, समर्पण और अटूट विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखकर शाम को विधि-विधान से भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करती हैं तथा चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं। करवा चौथ को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिलता है। पर्व की तैयारियां कई दिन पहले से ही शुरू हो जाती हैं। महिलाएं अपने लिए साड़ी, लहंगा, चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी और शृंगार की अन्य सामग्री खरीदती हैं। बाजारों में भी इस पर्व को लेकर रौनक बढ़ जाती है। मेहंदी लगवाने से लेकर पूजन सामग्री और वस्त्रों की खरीदारी तक, हर तरफ त्योहार का उत्साह दिखाई देता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं प्रातःकाल स्नान के बाद पूजा-अर्चना कर व्रत का संकल्प लेती हैं। परंपरा के अनुसार कई महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को सज-धजकर एक स्थान पर एकत्रित होकर करवा चौथ की कथा सुनती हैं और पूजा करती हैं। पूजन के दौरान करवा, दीपक, रोली, अक्षत, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री का प्रयोग किया जाता है। महिलाएं एक-दूसरे को सुहाग की सामग्री देकर अखंड सौभाग्य की कामना भी करती हैं। इस पर्व की सबसे खास परंपरा चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने की है। महिलाएं चांद निकलने की प्रतीक्षा करती हैं। चंद्रमा के दर्शन के बाद उन्हें अर्घ्य देकर पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोलने की परंपरा निभाई जाती है। कई परिवारों में पति अपनी पत्नी को उपहार देकर इस अवसर को और भी यादगार बनाते हैं। करवा चौथ केवल धार्मिक आस्था का पर्व ही नहीं, बल्कि पारिवारिक रिश्तों में प्रेम, विश्वास और आपसी सम्मान को मजबूत करने का अवसर भी है। बदलते समय के साथ इस पर्व में पति-पत्नी की सहभागिता भी बढ़ी है। कई स्थानों पर पति भी पत्नी के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करते हुए उनके साथ व्रत रखते हैं या दिनभर उनका सहयोग करते हैं। कुल मिलाकर करवा चौथ भारतीय संस्कृति में नारी की आस्था, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। यह पर्व परिवार में खुशियां बांटने, रिश्तों को नई ऊर्जा देने और दांपत्य जीवन में परस्पर विश्वास को मजबूत करने का संदेश देता है।
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