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हैकइंडिया हैकाथॉन में लखनऊ विश्वविद्यालय की टीम ‘इंटेलिवर्स’ ने हासिल किया तृतीय स्थान

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के अभियांत्रिकी एवं तकनीकी संकाय के बी.टेक. (सीएसई–एआई) के विद्यार्थियों की टीम ‘इंटेलिवर्स’ ने दिल्ली टेक्निकल कैंपस में आयोजित 24 घंटे के हैकइंडिया हैकाथॉन में तृतीय स्थान प्राप्त किया| इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए टीम को ₹6,000 की पुरस्कार राशि भी प्रदान की गई। इस उपलब्धि पर लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जे. पी. सैनी एवं अभियांत्रिकी एवं तकनीकी संकाय के डीन प्रो. एस. पी. सिंह ने विजेता टीम के विद्यार्थियों—अतुल यादव, श्वेता पांडेय एवं विपिन विश्वकर्मा—को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के कोऑर्डिनेटर डॉ. हिमांशु पाण्डेय ने बताया कि टीम ‘इंटेलिवर्स’ ने हैकाथॉन में ‘ट्रिनेत्र एआई’ नामक तकनीकी समाधान प्रस्तुत किया। यह परियोजना बहु-स्रोत आंकड़ों एवं इंटरनेट ऑफ थिंग्स की सहायता से पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ एवं भूस्खलन के जोखिम का पूर्वानुमान लगाने पर केंद्रित है। टीम का नेतृत्व अतुल यादव ने किया, जबकि श्वेता पांडेय एवं विपिन विश्वकर्मा टीम के सदस्य रहे। ‘ट्रिनेत्र एआई’ का प्रमुख उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ एवं भूस्खलन के संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान एवं पूर्वानुमान करना तथा संबंधित लोगों को आवश्यक सुरक्षा संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना है। परियोजना में मौसम पूर्वानुमान, वर्षा संबंधी आंकड़े, ऐतिहासिक आपदा आंकड़े, एक्स्जीबूस्ट आधारित मशीन लर्निंग, एजेंटिक एआई तथा इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी आधुनिक तकनीकों को एकीकृत किया गया है। सिस्टम उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई स्थान, तिथि एवं समय संबंधी जानकारी के आधार पर संबंधित क्षेत्र के मौसम एवं वर्षा संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण करता है। इसके बाद मशीन लर्निंग मॉडल संभावित बाढ़ जोखिम का आकलन करता है। एजेंटिक एआई जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने तथा संभावित चेतावनी, सुरक्षित स्थान एवं अपेक्षाकृत सुरक्षित मार्ग जैसी उपयोगी सूचनाएँ उपलब्ध कराने में सहायता करता है। परियोजना में ईएसपी 32 एवं पर्यावरणीय सेंसरों का भी उपयोग किया गया है, जिसके माध्यम से वर्षा, मिट्टी की नमी, जल स्तर, तापमान एवं आर्द्रता जैसे महत्वपूर्ण पर्यावरणीय मानकों की वास्तविक समय में निगरानी एवं प्रदर्शन किया जा सकता है। यह सुविधा विशेष रूप से संवेदनशील एवं दूरस्थ क्षेत्रों में जमीनी परिस्थितियों की निगरानी में उपयोगी हो सकती है। ‘ट्रिनेत्र एआई’ का उद्देश्य केवल आपदा की संभावना का पूर्वानुमान लगाना नहीं, बल्कि समय रहते बेहतर एवं सुरक्षित निर्णय लेने में लोगों की सहायता करना है। संभावित जोखिम की जानकारी मिलने पर स्थानीय निवासियों को सुरक्षित स्थान की ओर जाने में सहायता मिल सकती है। वहीं पर्यटकों एवं यात्रियों को जोखिम वाले मार्गों से बचने तथा अपनी यात्रा की बेहतर योजना बनाने में उपयोगी जानकारी प्राप्त हो सकती है। इसके अतिरिक्त, यह प्रणाली प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए संभावित प्रभावित क्षेत्रों की पहचान, संसाधनों की बेहतर योजना तथा राहत एवं बचाव कार्यों की पूर्व तैयारी में सहायक हो सकती है।

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