वाराणसी। इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आईएमएस), काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के ट्रॉमा सेंटर के सभागार में शनिवार को सूचरिंग एवं नॉटिंग के बुनियादी कौशल पर एक व्यावहारिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य रेजिडेंट चिकित्सकों को आवश्यक बुनियादी शल्य चिकित्सा कौशल का व्यवस्थित एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना था। कार्यशाला का उद्घाटन प्रो. एस. एन. संखवार , निदेशक, आईएमएस-बीएचयू ने किया। इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ पुनीत तथा डॉ. अजीत सिंह, प्रभारी, ट्रॉमा सेंटर उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संस्थान के विभिन्न संकाय सदस्यों, जिनमें डॉ. शिवम सिन्हा, डॉ. संजय यादव, डॉ. शुभम श्रीवास्तव, डॉ. मंजरी मिश्रा, डॉ. सुमित शर्मा एवं डॉ. विवेक कटियार शामिल रहे, की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यशाला के मुख्य विशेषज्ञ एवं रिसोर्स पर्सन डॉ. विकास सिंह, प्रोफेसर, सर्जरी विभाग, डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, लखनऊ रहे। उन्होंने प्रतिभागी रेजिडेंट्स को विभिन्न प्रकार की बुनियादी स्यूचरिंग तकनीकों एवं सर्जिकल नॉट्स का प्रदर्शन करते हुए उनके व्यावहारिक प्रशिक्षण में मार्गदर्शन प्रदान किया। रेजिडेंट्स को संबोधित करते हुए प्रो. एस. एन. संखवार ने रेजिडेंसी प्रशिक्षण के दौरान बुनियादी शल्य चिकित्सा कौशल में दक्षता हासिल करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने प्रशिक्षुओं से कार्यशाला में सक्रिय रूप से भाग लेने तथा सूचरिंग एवं नॉटिंग की तकनीकों में महारत हासिल करने के लिए इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उचित तकनीक के साथ निरंतर अभ्यास ही आत्मविश्वास एवं दक्षता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। डॉ. पुनीत, चिकित्सा अधीक्षक, ने स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित कौशल-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण केवल चिकित्सकों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ के लिए भी इसी तरह के व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए, क्योंकि वे स्वास्थ्य सेवा टीम का अभिन्न हिस्सा हैं। डॉ. अजीत सिंह, प्रभारी, ट्रॉमा सेंटर, ने कहा कि व्यावहारिक क्लिनिकल कौशल पर आधारित कार्यशालाएं रेजिडेंट प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने बताया कि ट्रॉमा सेंटर में भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि रेजिडेंट्स को अपने क्लिनिकल कौशल को विकसित एवं निरंतर परिष्कृत करने के पर्याप्त अवसर मिल सकें। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. शशि प्रकाश मिश्रा, सर्जरी विभाग, आईएमएस-बीएचयू द्वारा किया गया। कार्यशाला में मेडिसिन, डेंटल साइंसेज एवं आयुर्वेद संकायों के लगभग 110 रेजिडेंट्स ने भाग लिया तथा बुनियादी सूचरिंग एवं नॉटिंग तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस कार्यशाला ने विभिन्न संकायों के रेजिडेंट्स को विशेषज्ञ मार्गदर्शन में बुनियादी शल्य चिकित्सा तकनीकों को सीखने और उनका अभ्यास करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। यह पहल आईएमएस-बीएचयू एवं ट्रॉमा सेंटर द्वारा दक्षता-आधारित एवं व्यावहारिक चिकित्सा शिक्षा को सुदृढ़ करने तथा स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के निरंतर कौशल विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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