वाराणसी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जयंती के अवसर पर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने दोनों महापुरुषों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके जीवन-मूल्यों को स्मरण किया। इस अवसर पर मुख्य समारोह मालवीय भवन में आयोजित किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के कुलसचिव राजन श्रीवास्तव, छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार सिंह, विभिन्न संस्थानों के निदेशक, संकाय प्रमुख, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी ने महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ऑनलाइन माध्यम से समारोह से जुड़े और उन्होंने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री के जीवन, दर्शन और मूल्यों को वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिक बताते हुए साहस, धैर्य और कर्तव्यबोध जैसे गुणों को आत्मसात करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने गांधी जी के बहुआयामी व्यक्तित्व का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन केवल अहिंसा तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें सामाजिक, आर्थिक और राष्ट्रीय जीवन से जुड़े अनेक पक्षों की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कार्यक्रम में विशेषज्ञ वक्ता को आमंत्रित करने की पहल को उपयोगी बताते हुए इसे भविष्य में भी जारी रखने का सुझाव दिया। मुख्य अतिथि प्रो. सुमन जैन ने अपने संबोधन में महात्मा गांधी के जीवन, विचार और मूल्यों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने गांधी जी के सत्य, अहिंसा, अंतःशुद्धि, स्वदेशी और सामाजिक सेवा के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके जीवन से मन, वाणी और कर्म में समन्वय तथा सत्यनिष्ठा की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने गांधी जी के काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधी जी ने सदैव हिंदी, भारतीय भाषाओं, विद्यार्थियों और युवाओं के लिए आवाज उठाई। उन्होंने महात्मा गांधी और महामना मदन मोहन मालवीय के संबंधों तथा लाल बहादुर शास्त्री के सादगी, श्रम, त्याग और राष्ट्रसेवा के आदर्शों का भी उल्लेख किया। प्रो. जैन ने गांधी जी के चरखा, स्वदेशी, कुटीर उद्योग और रचनात्मक कार्यक्रमों के संदर्भ में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर चर्चा की। उन्होंने गांधी जी के जीवन की कुछ घटनाओं का उल्लेख करते हुए पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के संरक्षण और अहिंसा का पालन करते रहने की प्रेरणा दी। कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने स्वागत संबोधन में विभिन्न धर्मों की प्रार्थनाओं, पाठ एवं भजन प्रस्तुत करने वाले सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों का सार मानवता और इंसानियत की सेवा में निहित है तथा महात्मा गांधी के जीवन से साधन और साध्य की पवित्रता, ईमानदारी, पारदर्शिता, अनुशासन एवं संवेदनशीलता की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री के जीवन से सादगी, निष्ठा और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा लेने का उल्लेख किया। कुलसचिव ने मुख्य अतिथि प्रो. सुमन जैन का परिचय देते हुए उनके शैक्षणिक एवं साहित्यिक योगदान तथा विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रशासनिक दायित्वों का उल्लेख किया। कार्यक्रम के दौरान कुलपति जी ने विश्वविद्यालय की विभिन्न छात्र कल्याण योजनाओं की घोषणा की। विश्वविद्यालय की परंपरा के अनुसार प्रत्येक वर्ष गांधी जयंती के अवसर पर कुलपति महोदय विद्यार्थियों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा करते हैं। इसी क्रम में इस वर्ष भी विद्यार्थियों के हित में कई नई योजनाओं एवं पहलों की घोषणा की गई। इनमें दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क भोजन सुविधा, आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के एवं मेधावी विद्यार्थियों के लिए रियायती भोजन सुविधा, दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए ₹10,000 की वार्षिक आर्थिक सहायता, श्रवणबाधित विद्यार्थियों के लिए ₹10,000 की वार्षिक आर्थिक सहायता तथा दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए आर्थिक सहायता शामिल है। इसके अतिरिक्त एएवाई कार्ड धारक विद्यार्थियों के लिए ₹25,000 प्रतिवर्ष की कुलपति आर्थिक सहायता योजना, ‘अर्न व्हाइल लर्न’ योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को ₹9,000 प्रतिवर्ष की सहायता, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नोडल केंद्र, विद्यार्थियों के मामलों के लिए स्थायी समिति, दिव्यांग छात्रों एवं दिव्यांग छात्राओं के लिए सिलाई मशीन प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने से संबंधित योजनाओं की भी घोषणा की गई। छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने महात्मा गांधी के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक अर्थ मनुष्य के शरीर, मन, हृदय और आत्मा के सर्वांगीण एवं संतुलित विकास से है और माफ करना ताकतवर की पहचान है। प्रो. सिंह ने विद्यार्थियों से अपने अधिकारों के प्रति सचेत रहने तथा महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री एवं अन्य महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेते हुए अपने कर्तव्यों के प्रति संवेदनशील रहने का सुझाव दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक विद्या धर्म विज्ञान संकाय द्वारा वैदिक मंगलाचरण से हुआ। समारोह में विभिन्न धर्मों की प्रार्थनाओं एवं धार्मिक ग्रंथों के पाठ के माध्यम से शांति, सद्भाव, सत्य, अहिंसा और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया गया। संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय द्वारा गीता के पाठ के माध्यम से अपने कर्तव्य-पथ से न हटने, प्रो. बेहरोज एस. गांधी, पूर्व प्राचार्या, महिला महाविद्यालय ने पारसी प्रार्थना के माध्यम से नेक कर्म करने तथा कुरान की आयतों के माध्यम से माता-पिता की सेवा करने की सीख दी गई। फादर पियूष प्रशांत असिसी, चर्च, नगवां, लंका ने बाइबल पाठ के माध्यम से बच्चे जैसा भोला एवं सच्चा बने रहने का संदेश दिया। गुरुग्रंथ साहिब के पाठ के माध्यम से यह बताया गया कि रास्ते और तरीके अलग-अलग हो सकते हैं, किंतु मंजिल सभी की एक ही है—ईश्वर। बौद्ध प्रार्थना के माध्यम से शांति और सद्भाव के साथ जीवन जीने का संदेश दिया गया। संगीत एवं मंच कला संकाय द्वारा ‘वैष्णव जन’ भजन प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के अंत में लाला लाजपत राय विद्यालय के बच्चों को 25 बैग वितरित किए गए। इस अवसर पर विभिन्न संस्थानों के निदेशक, संकायों के संकाय प्रमुख, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, विद्यार्थी तथा अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। इससे पूर्व, गांधी जयंती के अवसर पर कुलसचिव राजन श्रीवास्तव सहित, विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने गांधी चबूतरा (इग्नू क्षेत्रीय केंद्र, बीएचयू) पर महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की।
Purvanchal News जोड़े आपको पूर्वांचल से….