लखनऊ। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय गोरखपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के विद्यार्थियों ने लखनऊ में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए दो शोधपत्रों के लिए पुरस्कार प्राप्त किए हैं। इनमें एक शोधपत्र को सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र पुरस्कार (बेस्ट पेपर अवॉर्ड) तथा दूसरे को ज्यूरी रिकमेंडेड पेपर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इंटीग्रल विश्वविद्यालय, लखनऊ के सिविल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा इंडियन जियोटेक्निकल सोसाइटी के सहयोग से 8 से 10 अक्टूबर तक ‘ट्रांसपोर्टेशन जियोटेक्निक्स एंड सस्टेनेबल मटेरियल्स फॉर एडवांस्ड रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर’ विषय पर आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में एमएमएमयूटी के बीटेक सिविल इंजीनियरिंग चतुर्थ वर्ष के छह विद्यार्थियों प्रवीण प्रताप मल्ल, आस्था द्विवेदी, प्रकृति श्रीवास्तव, सिद्धार्थ श्रीवास्तव, वैभव मिश्र एवं सुंदरम गुप्ता ने शोधपत्र प्रस्तुत किए। सम्मेलन में ‘पैरामीट्रिक एनालिसिस ऑफ डुअल-लेयर सॉइल नेलिंग फॉर एन्हांस्ड स्टेबिलिटी ऑफ स्टीप स्लोप्स’ शीर्षक शोधपत्र को बेस्ट पेपर अवॉर्ड मिला। इसके लेखक आस्था द्विवेदी, प्रकृति श्रीवास्तव एवं डॉ. विनय भूषण चौहान हैं। यह शोध तीव्र ढलान वाली भूमि की स्थिरता बढ़ाने के लिए दोहरी परत वाली सॉइल नेलिंग तकनीक के विश्लेषण पर केंद्रित है। वहीं, ‘न्यूमेरिकल एनालिसिस फॉर ओवर-एक्सकेवेशन एंड रिप्लेसमेंट ऑफ सॉइल अंडर डिफरेंट टाइप्स ऑफ फाउंडेशन’ शीर्षक शोधपत्र को ज्यूरी रिकमेंडेड पेपर अवॉर्ड प्रदान किया गया। इसके लेखक प्रवीण प्रताप मल्ल, ऋषभ पाल एवं डॉ. विनय भूषण चौहान हैं। शोध में विभिन्न प्रकार की नींव के नीचे मिट्टी की अतिरिक्त खुदाई एवं प्रतिस्थापन का संख्यात्मक विश्लेषण किया गया है। सभी शोधपत्र विश्वविद्यालय के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक आचार्य डॉ. विनय भूषण चौहान के निर्देशन में तैयार किए गए। विद्यार्थी अपने बीटेक प्रोजेक्ट के अंतर्गत विभिन्न शोध विषयों पर कार्य कर रहे हैं। सम्मेलन में 100 से अधिक शोधपत्र दस समानांतर तकनीकी सत्रों में प्रस्तुत किए गए। प्रत्येक सत्र में दो बाह्य निर्णायकों ने 25 अंकों की मूल्यांकन प्रणाली के आधार पर शोधपत्रों का आकलन किया। इसमें शोध की नवीनता, गुणवत्ता, प्रस्तुतीकरण एवं प्रश्नों के उत्तर देने की क्षमता सहित पांच मानदंड शामिल थे। सम्मेलन में जापान और थाईलैंड के वक्ताओं सहित देश के लगभग 21 राज्यों से 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें आईआईटी, एनआईटी, राज्य विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के विद्यार्थी, शोधार्थी और शिक्षक शामिल रहे। सीएसआईआर के केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान, रुड़की तथा केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के वैज्ञानिकों ने भी अपने शोध अनुभव एवं तकनीकी विशेषज्ञता साझा की।

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