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लखनऊ विश्वविद्यालय का 69वां दीक्षांत समारोह भव्यता के साथ संपन्न, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मेधावी छात्रों को प्रदान की उपाधियां एवं पदक

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय का 69वां दीक्षांत समारोह शुक्रवार को चौक स्थित अटल बिहारी वाजपेयी वैज्ञानिक कन्वेंशन सेंटर में गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने समारोह की अध्यक्षता करते हुए मेधावी विद्यार्थियों को उपाधियां एवं पदक प्रदान किए। यह समारोह कुलपति प्रो. जय प्रकाश (जे.पी.) सैनी के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी तथा अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। शोभायात्रा के पश्चात विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने राष्ट्रगीत एवं विश्वविद्यालय कुलगीत प्रस्तुत कर समारोह का शुभारंभ किया। 69वें दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय की प्रगति आख्या प्रस्तुत करते हुए कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी ने उच्च शिक्षा के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने यूनानी दार्शनिक सुकरात के प्रसिद्ध कथन “अनएक्जामिन्ड लाइफ इज़ नॉट वर्थ लिविंग” तथा जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांट के विचार “अपने विवेक का उपयोग करने का साहस करो” का उल्लेख करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि आलोचनात्मक चिंतन, स्वतंत्र सोच और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करना है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए संस्कृत के प्रसिद्ध वाक्य “सा विद्या या विमुक्तये” का उद्धरण दिया और कहा कि सच्ची शिक्षा वही है जो मनुष्य को अज्ञान, संकीर्णता और बंधनों से मुक्त करे। शिक्षा केवल रोजगार तक सीमित न होकर ज्ञान, संस्कार और समग्र व्यक्तित्व विकास का माध्यम होनी चाहिए।

शोध एवं अकादमिक उपलब्धियां

कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय की शोध गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

  • शोध अनुदान (Research Funding) में 12.26 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
  • शोध प्रकाशनों में 17.51 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
  • संकाय सदस्यों द्वारा प्रकाशित पुस्तकों की संख्या में 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
  • विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा 8,407 स्कोपस-इंडेक्स्ड शोधपत्र प्रकाशित किए जा चुके हैं, जिन्हें अब तक 1.51 लाख से अधिक उद्धरण (Citations) प्राप्त हुए हैं।
  • विश्वविद्यालय का स्कोपस H-इंडेक्स 119 से बढ़कर 130 हो गया है।
  • प्रवेश आवेदनों में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

वैश्विक पहचान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग

प्रो. सैनी ने बताया कि इस वर्ष विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए 77 से अधिक देशों के छात्रों से 3,400 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 64 प्रतिशत अधिक हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने फ्रांस और नेपाल के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) किए हैं, जिससे शोध, संकाय आदान-प्रदान तथा छात्र विनिमय कार्यक्रमों को बढ़ावा मिलेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप विश्वविद्यालय ने बहुविषयक शिक्षा, अनुसंधान एवं अंतरराष्ट्रीयकरण को मजबूत किया है। उन्होंने बताया कि जुलाई 2026 में विश्वविद्यालय ने ग्रीन स्किल सेंटर तथा एआई (Applied AI) सेंटर की स्थापना की है। माइक्रोसॉफ्ट के सहयोग से स्थापित इन केंद्रों के माध्यम से प्रतिवर्ष 20,000 विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हरित प्रौद्योगिकी एवं उद्योगोन्मुख डिजिटल कौशल का प्रशिक्षण दिया जाएगा। दीक्षांत समारोह के अवसर पर विश्वविद्यालय की ई-ऑफिस प्रणाली का भी शुभारंभ किया गया, जिससे प्रशासनिक कार्य पूरी तरह पारदर्शी, दक्ष एवं पेपरलेस बन सकेंगे।

यूजीसी करियर एडवांसमेंट स्कीम के अंतर्गत 184 शिक्षकों को पदोन्नति प्रदान की गई।

इनमें शामिल हैं—

  • 55 वरिष्ठ प्रोफेसर
  • 63 प्रोफेसर
  • 16 एसोसिएट प्रोफेसर
  • 45 असिस्टेंट प्रोफेसर

इसके अतिरिक्त संविदा शिक्षकों का मासिक मानदेय 35,000 रुपये से बढ़ाकर 57,700 रुपये कर दिया गया है।

रोजगार एवं इंटर्नशिप

विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय ने मेगा प्लेसमेंट ड्राइव का सफल आयोजन किया। साथ ही पेड इंटर्नशिप कार्यक्रम भी प्रारंभ किया गया है, जिससे विद्यार्थियों को उद्योगों में व्यावहारिक अनुभव के साथ आर्थिक सहायता भी प्राप्त होगी।

खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन

विश्वविद्यालय की 81 टीमों ने भारतीय विश्वविद्यालय संघ (AIU) के जोनल एवं अखिल भारतीय अंतर-विश्वविद्यालय प्रतियोगिताओं में भाग लिया।

  • 44 खिलाड़ी आगामी खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करेंगे।
  • खिलाड़ियों ने राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर कुल 35 पदक जीते।
  • राष्ट्रीय स्तर पर 1 स्वर्ण एवं 6 रजत पदक प्राप्त हुए।
  • राज्य स्तर पर 14 स्वर्ण तथा 14 रजत पदक हासिल किए।

इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय को उत्तर क्षेत्र अंतर-विश्वविद्यालय क्रिकेट प्रतियोगिता तथा अखिल भारतीय अंतर-विश्वविद्यालय पुरुष जूडो चैंपियनशिप की मेजबानी का दायित्व भी सौंपा गया है।

प्रशासनिक एवं संस्थागत विकास

प्रो. सैनी ने बताया कि विश्वविद्यालय ने 18 नए महाविद्यालयों को संबद्धता प्रदान की है। साथ ही राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) सहित विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में विश्वविद्यालय के प्रदर्शन में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा डिजिटल प्रशासन के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है और भविष्य में भी उत्कृष्टता की दिशा में अग्रसर रहेगा। कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी के संबोधन के पश्चात दीक्षांत समारोह में मेधावी विद्यार्थियों को पदक एवं उपाधियां प्रदान की गईं। इस वर्ष कुल 111 विद्यार्थियों को 204 पदकों से सम्मानित किया गया, जिनमें 31 छात्र तथा 80 छात्राएं शामिल रहीं। समारोह में 10 कुलाधिपति कांस्य पदक (Chancellor’s Bronze Medal) प्रदान किए गए। इन पदकों से सम्मानित विद्यार्थियों में रिया गुप्ता (बी.ए.), अंशिका सिंह (बी.ए.), नीना पट्टू (बी.एससी.), तनुजा पट्टू (बी.कॉम.), के.एम. हुसैन (बी.कॉम.), मेधा द्विवेदी (बी.कॉम.), अन्विता वर्मा (बी.कॉम.), शुभम भारती (बी.वी.ए. प्रिंटिंग), निधि आरती श्रीवास्तव (एलएल.बी.) तथा कंचन श्रीवास्तव (बी.एड.) शामिल रहे। इन सभी विद्यार्थियों ने अपने-अपने पाठ्यक्रमों में सर्वोच्च शैक्षणिक उपलब्धि प्राप्त की। कुलाधिपति रजत पदक (Chancellor’s Silver Medal) फराह चंद को बी.एससी. (लाइफ साइंसेज) की सर्वश्रेष्ठ छात्रा के रूप में प्रदान किया गया। उन्हें विश्वविद्यालय की सर्वश्रेष्ठ छात्रा (Best Woman Student) का कुलाधिपति रजत पदक भी मिला। इस प्रकार वे इस वर्ष दोनों कुलाधिपति रजत पदक प्राप्त करने वाली एकमात्र छात्रा रहीं। दीक्षांत समारोह पूर्व छात्रा निधि श्रीवास्तव के लिए भी भावनात्मक अवसर बन गया। वर्ष 1996 में लोक प्रशासन (एम.ए.) की पढ़ाई पूरी करने के लगभग 30 वर्ष बाद वह अपने मातृ संस्थान लौटीं और उन्हें पांच स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया।

शिक्षक उत्कृष्टता पुरस्कार

पदक एवं उपाधि वितरण के पश्चात विश्वविद्यालय ने शिक्षण, शोध एवं शैक्षणिक नेतृत्व में उत्कृष्ट योगदान के लिए चार शिक्षाविदों को टीचर एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया।

सम्मानित शिक्षकों में शामिल हैं—

  • प्रो. शशि भूषण, अध्यक्ष, सांख्यिकी विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय
  • डॉ. नेहा अग्रवाल, रसायन विज्ञान विभाग, नवयुग गर्ल्स कॉलेज, लखनऊ
  • डॉ. सरिता सिंह, शारीरिक शिक्षा विभाग, अवध गर्ल्स डिग्री कॉलेज, लखनऊ
  • डॉ. मंजुल त्रिवेदी, शिक्षा विभाग, बी.एस.एन.वी. पीजी कॉलेज, लखनऊ

दीक्षोत्सव-2026′ की झलक

समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के संस्कृति निदेशक के समन्वय में आयोजित आठ दिवसीय सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक महोत्सव ‘दीक्षोत्सव-2026’ पर आधारित एक विशेष वीडियो प्रस्तुति प्रदर्शित की गई। इसमें विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, रचनात्मक प्रतिभा तथा विश्वविद्यालय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाया गया।

सोनवा प्राथमिक विद्यालय के बच्चों की प्रस्तुति

विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए सोनवा प्राथमिक विद्यालय के बच्चों ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत कर उपस्थित जनों का मन मोह लिया। उनकी प्रस्तुति को खूब सराहा गया। इसके बाद राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने बच्चों से आत्मीय संवाद किया तथा उन्हें चॉकलेट भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया। इस स्नेहपूर्ण पहल ने समारोह में विशेष भावनात्मक वातावरण बना दिया। उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने सभी पदक एवं पुरस्कार विजेता विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने विद्यार्थियों की सफलता में अभिभावकों के त्याग एवं शिक्षकों के मार्गदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि पुरस्कार प्राप्त करने वाली छात्राओं की बड़ी संख्या बदलते भारत और विकसित भारत की परिकल्पना को साकार होते हुए दर्शाती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अब राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर है। आचार्य चाणक्य के कथन “ज्ञान सबसे बड़ी संपत्ति है” का उल्लेख करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से अपने परिवार, विद्यालय और समाज का नाम रोशन करने का आह्वान किया। उन्होंने तकनीक का सकारात्मक उपयोग करने, उसके अच्छे और बुरे पक्षों में अंतर समझने, सभी का सम्मान करने तथा संस्कारवान एवं जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा दी। रजनी तिवारी ने जल, वायु एवं मिट्टी जैसे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष बल देते हुए कहा कि सतत विकास और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए इनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि युवाओं का विकास ही समाज और राष्ट्र की प्रगति का आधार है। भारत के विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का उल्लेख करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से कौशल विकास, नवाचार और आत्मनिर्भरता को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों को चुनौतियों से घबराने के बजाय उन्हें अवसर के रूप में स्वीकार करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से ही इतिहास रचा जाता है। राज्य मंत्री ने कैशलेस चिकित्सा सुविधा के लाभार्थियों को बधाई दी तथा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लागू एंटी-पेपर लीक कानून की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह कानून ईमानदार और मेहनती विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करेगा तथा परीक्षा में निष्पक्षता और योग्यता आधारित व्यवस्था को और मजबूत बनाएगा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों के विद्यालयों के विद्यार्थियों ने “जल है तो कल है” विषय पर एक लघु नाटिका प्रस्तुत की, जिसमें जल संरक्षण का प्रभावी संदेश दिया गया। मुख्य अतिथि एवं नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने सभी स्नातक विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह उनके जीवन का “लॉन्चिंग पैड” है, जहां से अवसरों और जिम्मेदारियों से भरी नई यात्रा प्रारंभ होती है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों ने अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए यह उपलब्धि हासिल की है और आज के तेजी से बदलते दौर में सफलता के लिए ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास का संतुलित समन्वय आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों की सफलता में अभिभावकों, शिक्षकों और मार्गदर्शकों की महत्वपूर्ण भूमिका की भी सराहना की। प्रो. करंदीकर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष विज्ञान और स्वच्छ ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों की बढ़ती संभावनाओं का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से आजीवन सीखने और नई तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो सेवा भाव, ईमानदारी और समर्पण के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान दें। उन्होंने विद्यार्थियों से केवल तकनीक के उपभोक्ता नहीं, बल्कि नवाचार करने वाले सृजनकर्ता बनने का आह्वान किया, ताकि वे समाज की समस्याओं का समाधान करने वाली नई तकनीकों का विकास कर सकें। उन्होंने उद्यमिता को बढ़ावा देने पर भी बल देते हुए कहा कि युवाओं को रोजगार मांगने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बनने का प्रयास करना चाहिए। इससे आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

ई-ऑफिस का शुभारंभ एवं अन्य कार्यक्रम

दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय की ई-ऑफिस प्रणाली का औपचारिक शुभारंभ किया। इसके बाद विश्वविद्यालय के प्रकाशनों एवं वार्षिक प्रतिवेदनों का विमोचन किया गया तथा विशिष्ट शिक्षकों का सम्मान भी किया गया। सोनवा ग्राम विद्यालय की छात्रा एवं कविता प्रतियोगिता की प्रथम पुरस्कार विजेता प्राची गिरी ने “मेरी मां” शीर्षक कविता का भावपूर्ण पाठ किया। उनकी प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा तथा उन्हें प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सोनवा विद्यालय के अन्य विद्यार्थियों को भी प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए। समारोह के अंत में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रारंभिक बाल शिक्षा को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से पांच आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को निःशुल्क प्री-स्कूल लर्निंग किट वितरित की। साथ ही उन्होंने प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को राजभवन की ओर से पुस्तकें भेंट कर बच्चों में पठन-पाठन की संस्कृति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने का संदेश दिया। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं लखनऊ विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए सभी उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष विश्वविद्यालय से 57,000 छात्र तथा 68,102 छात्राएं स्नातक एवं स्नातकोत्तर उपाधियां प्राप्त कर रही हैं। इनमें 111 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 204 पदकों से सम्मानित किया गया, जिनमें 31 छात्र तथा 80 छात्राएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि छात्राओं की उल्लेखनीय सफलता और पदक विजेताओं में उनकी अधिक भागीदारी महिला सशक्तिकरण और विकसित भारत की दिशा में देश की सकारात्मक प्रगति का प्रतीक है। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा और अनुसंधान राष्ट्र निर्माण के दो सशक्त स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि शोध एवं नवाचार ही भविष्य के विकास की आधारशिला रखते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवाचार और अनुसंधान को निरंतर प्रोत्साहित करने का आह्वान किया, जिससे देश के विकास में सार्थक योगदान सुनिश्चित हो सके। मुख्य अतिथि प्रो. अभय करंदीकर को बधाई देते हुए उन्होंने उच्च शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान की सराहना की। लखनऊ विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय को प्राप्त NAAC की A++ ग्रेड तथा अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के बढ़ते आवेदन और प्रवेश इसकी वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रमाण हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय से शैक्षणिक उत्कृष्टता बनाए रखने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहुंच और अधिक मजबूत करने का आह्वान किया। राज्यपाल ने कहा कि सरकार ने शिक्षा क्षेत्र के लिए 83,562 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिसमें 55,727 करोड़ रुपये उच्च शिक्षा के लिए निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि रोजगारोन्मुख शिक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT), मुंबई के सहयोग से देशभर के 15,000 माध्यमिक विद्यालयों एवं 500 महाविद्यालयों में एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग एवं कॉमिक्स (AVGC) कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित की जाएंगी। इससे विद्यार्थियों को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण मिलेगा तथा रचनात्मक प्रौद्योगिकी क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आईआईटी को 12,123 करोड़ रुपये तथा एनआईटी को 6,260 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, तकनीक एवं कौशल विकास में निरंतर निवेश भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

आयुष्मान भारत योजना का उल्लेख

राज्यपाल ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके अंतर्गत पात्र परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस योजना से देश के करोड़ों परिवारों को सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला है। उन्होंने योजना के अंतर्गत उपलब्ध कैशलेस चिकित्सा सुविधा की भी सराहना की और इसे सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

पर्यावरण संरक्षण पर बल

राज्यपाल ने जल, वायु एवं मिट्टी के संरक्षण का आह्वान करते हुए कहा कि वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु सभी को सामूहिक प्रयास करने होंगे। मानसून के मौसम का उल्लेख करते हुए उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों, स्थानीय निकायों एवं आम नागरिकों से मौसमी संक्रामक रोगों के प्रति सतर्क रहने, स्वच्छता बनाए रखने, जलभराव रोकने तथा आवश्यक स्वास्थ्य सावधानियां अपनाने की अपील की।

नशा मुक्त भारत अभियान में भागीदारी का आह्वान

राज्यपाल ने विद्यार्थियों एवं युवाओं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2 अगस्त से प्रारंभ किए जा रहे ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि 100 सप्ताह तक चलने वाला जनभागीदारी अभियान जागरूकता, सामुदायिक सहभागिता और युवाओं के नेतृत्व के माध्यम से नशामुक्त भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। राज्यपाल ने बालिकाओं के विरुद्ध बढ़ती यौन हिंसा की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए युवाओं से सतर्क रहने तथा अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना परिवार, शिक्षण संस्थानों और समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने दहेज प्रथा के पूर्ण उन्मूलन का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षित युवतियां दहेज न दें और युवा दहेज न मांगें तथा न ही स्वीकार करें। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को समानता, सम्मान और सामाजिक न्याय के मूल्यों को अपनाकर इस कुप्रथा का अंत करना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि तकनीक ने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में परिवर्तन लाया है, लेकिन विद्यार्थियों को इसके सकारात्मक और नकारात्मक उपयोग के बीच अंतर समझना चाहिए। उन्होंने तकनीक का नैतिक एवं जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग करने की सलाह दी ताकि उसका लाभ समाज और राष्ट्र के हित में हो सके। राज्यपाल ने जंतर-मंतर पर नीट अभ्यर्थियों के प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के प्रति कथित अभद्र भाषा के प्रयोग की घटना पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं समाज में मूल्यों के क्षरण की ओर संकेत करती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से सही और गलत का विवेक विकसित करने तथा अपनी बात लोकतांत्रिक मर्यादा, अनुशासन और सम्मान के साथ रखने का आह्वान किया। राज्यपाल ने सरकार द्वारा संचालित निःशुल्क एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने अभिभावकों एवं शिक्षण संस्थानों से पात्र बालिकाओं को इस योजना का लाभ दिलाने का आग्रह किया। उन्होंने विश्वविद्यालय से शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों के वितरण में डिजिलॉकर के अधिकाधिक उपयोग को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अभी केवल लगभग 39 प्रतिशत विद्यार्थियों ने अपने डिजिटल प्रमाण-पत्र डाउनलोड किए हैं, जबकि मुद्रित प्रमाण-पत्रों के वितरण पर काफी व्यय होता है। डिजिलॉकर के व्यापक उपयोग से डिजिटल इंडिया अभियान को गति मिलेगी, कागज की बचत होगी तथा प्रशासनिक खर्च भी कम होगा। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू किए जाने की सराहना करते हुए इसे पारदर्शी एवं दक्ष प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने प्रत्येक स्तर पर फाइलों के निस्तारण की समय-सीमा निर्धारित करने तथा छात्रावास, सुरक्षा, स्वच्छता एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं को और बेहतर बनाने का सुझाव दिया। समारोह का समापन राष्ट्रीय गान एवं शैक्षणिक शोभायात्रा की औपचारिक विदाई के साथ हुआ, जिसने लखनऊ विश्वविद्यालय की गौरवशाली शैक्षणिक परंपरा में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया।

 

 

 

 

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