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लखनऊ विश्‍वविद्यालय के नवांकुर फाउंडेशन का हुआ रजिस्‍ट्रेशन, अब रिसर्च के लिए मिलेगा सीएसआर फंड

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के नए विचारों, स्टार्टअप्स और नवाचारों को पंख देने की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। विश्वविद्यालय परिसर स्थित इनक्यूबेशन सेंटर के अंतर्गत संचालित ‘नवांकुर फाउंडेशन’ (Navankur Foundation) को भारत सरकार के कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) द्वारा आधिकारिक तौर पर पंजीकृत कर लिया गया है। केंद्र सरकार के कंपनी रजिस्ट्रार (ROC) कार्यालय ने संस्था को  पंजीकरण संख्या आवंटित करते हुए कंपनियों से सीएसआर फंड प्राप्त करने की पूर्ण वैधानिक मंजूरी प्रदान कर दी है।उल्लेखनीय है कि ‘नवांकुर फाउंडेशन’ लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा कंपनी अधिनियम के तहत स्थापित एक विशेष नॉट-फॉर-प्रॉफिट (सेक्शन-8) कंपनी और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण उपक्रम है। इसकी स्थापना परिसर के विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधार्थियों में नवाचार, उद्यमिता, इनक्यूबेशन और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है। यह संस्था युवाओं के व्यावहारिक एवं व्यावसायिक विचारों को सफल उद्यम में बदलने के लिए एक मजबूत मंच के रूप में कार्य करती है, जहाँ उन्हें आवश्यक मेंटरशिप, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रोटोटाइपिंग और इनक्यूबेशन की सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जाती हैं।नवांकुर फाउंडेशन को मिले इस नए वैधानिक दर्जे का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि जो भी औद्योगिक घराने, व्यावसायिक कंपनियां, पूर्व छात्र या आम नागरिक विश्वविद्यालय के नवाचार अभियान में वित्तीय सहयोग देंगे, उन्हें आयकर के नियमों के तहत सीधा फायदा मिलेगा। संस्था को दी जाने वाली सहयोग राशि पर आयकर कानून की धारा 80G के तहत टैक्स में सीधी छूट का लाभ प्राप्त होगा। इसके साथ ही, जो कंपनियां अपने वैधानिक सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत समाज और शिक्षा के क्षेत्र में काम करना चाहती हैं, वे अपने बजट का निवेश सीधे लखनऊ विश्वविद्यालय के इस इनक्यूबेशन केंद्र में करके अपने कानूनी सीएसआर दायित्व को पूरा कर सकेंगी। इस दोहरे लाभ के चलते अधिक से अधिक दानदाता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि आगे आकर प्रतिभाशाली युवाओं की मदद कर सकेंगे।इस वित्तीय संबल से परिसर में विद्यार्थियों के नए बिजनेस आइडिया और स्टार्टअप्स को शुरुआती सीड पूंजी उपलब्ध कराई जा सकेगी। इसके साथ ही इनक्यूबेशन सेंटर में आधुनिक तकनीकी प्रयोगशालाओं के विस्तार, उत्पाद परीक्षण, बौद्धिक संपदा (पेटेंट) संरक्षण और समाजोपयोगी अनुसंधानों को धरातल पर उतारने में गति आएगी। विश्वविद्यालय का यह संपूर्ण प्रयास विद्यार्थियों को केवल डिग्री धारक बनाने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर, नए उद्यम लगाने वाला और रोजगार सृजक बनाने की दिशा में अग्रसर कर रहा है, जिससे शिक्षा और उद्योग के बीच एक सुदृढ़ व दूरगामी साझेदारी विकसित होगी।

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