लखनऊ। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा और चुनाव आयोग पर बड़ा हमला बोला। मिलीभगत का आरोप लगाते हुए अखिलेश यादव ने कहा, भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर ‘भारत के लोकतंत्र, संविधान और नागरिकों को धोखा दे रहे हैं।’ भाजपा के खिलाफ जनता में भारी आक्रोश है। जनता के गुस्से के सामने भाजपा की साजिश नहीं चलेगी। 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपाइयों का धड़ा नहीं टैंकर और टंकी फूटेगी। 403 सीटों पर भाजपा की 420 अब नहीं चलेगी। अखिलेश यादव ने कहा, भाजपाई हारेंगे भी और भागेंगे भी। इस दौरान अखिलेश यादव ने ओमप्रकाश राजभर को अनपढ़ बताया। बोले-मैं ऐसे लोगों के बारे में कुछ नहीं कह सकता। सपा मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में यादव ने आरोप लगाया कि जब भाजपा का जनसमर्थन घटता है और उसकी हार की आशंका बढ़ती है, तो वह निर्वाचन आयोग की आड़ लेती है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा प्रशासन के सहयोग से चुनावों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की तैयारी कर रही है और सपा वर्ष 2022 से इस मुद्दे को उठाती रही है। यादव ने भाजपा की कथित ’10 चुनावी चालों’ का जिक्र करते हुए फर्जी मतदाता जोड़ने, विरोधियों के वास्तविक वोट कटवाने, मतदान से पहले पैसे और भोजन बांटने, मतदाताओं को डराने, ईवीएम में हेरफेर और मतगणना में धांधली के आरोप लगाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हारने वाले उम्मीदवारों को विजेता घोषित कर प्रमाणपत्र दिए जाते हैं तथा चुनाव के बाद विपक्षी दलों में फूट डालकर उनके विधायकों को तोड़ा जाता है। यूपी की कानून व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठाते हुए अखिलेश ने योगी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, यूपी में कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त है। आए दिन बलात्कार, लूट और हत्याएं हो रही हैं। यूपी की जनता को किसी अस्पताल में इलाज नहीं मिल रहा है। सरकारी अस्पतालों की स्थिति ऐसी है कि गरीबों को प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराना पड़ रहा है। विदेश नीति पर को लेकर अखिलेश यादव ने कहा, अब तक की सबसे कमजोर विदेश नीति भाजपा की है। हिटलर के जमाने में जो काम होता था आज वही हो रहा है। इलाहाबाद बैंक का जिक्र करते हुए अखिलेश बोले, भाजपा सरकार ने यूपी की इकलौते बैंक को भी बेंच दिया है। उन्होंने कहा, सपा सरकार में एक भी बैंक नहीं बिकेगी। किसानों को कर्ज भी माफ किया जाएगा। सपा प्रमुख ने बताया कि पार्टी के ‘पीडीए प्रहरी’ सभी जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूचियों की जांच कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इस दौरान 19.2 लाख संदिग्ध फर्जी मतदाता प्रविष्टियों की पहचान की गई है। यादव ने कहा कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए कुल 87.66 लाख फॉर्म-6 आवेदन मिले थे, जिनमें से 84.30 लाख नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए गए। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने केवल 71.38 लाख आवेदनों का विवरण सार्वजनिक किया और 16.18 लाख आवेदनों की जानकारी सामने नहीं रखी। उन्होंने दावा किया कि इन मामलों के अतिरिक्त पार्टी कार्यकर्ताओं ने तीन लाख और संदिग्ध प्रविष्टियां चिह्नित की हैं। यादव ने कहा कि कुछ रिकॉर्ड में मतदाताओं और उनके माता-पिता के नाम समान हैं। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश के कई विधानसभा क्षेत्रों में 10,000 से 15,000 तक संदिग्ध प्रविष्टियां मिली हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को जिन सीटों पर हार का डर था, वहां ऐसी गड़बड़ियां अधिक थीं।
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