वाराणसी। पूर्वांचल में राज्य और केंद्र के नौ मंत्री हैं फिर भी शिक्षक एमएलसी के चुनाव में भाजपा की करारी हार हुई है। अकेले वाराणसी से ही चार मंत्री हैं। इसके बावजूद भाजपा प्रत्याशी को निर्दलीय के तौर पर जितने मत पिछले चुनाव में मिले थे उससे भी कम मत इस बार मिले हैं। इससे मंत्रियों, विधायक और संगठन के पदाधिकारियों के कामकाज पर सवाल खड़े हो गए हैं। यूपी सरकार में मऊ के एके शर्मा, वाराणसी के रविंद्र जायसवाल, हंसराज विश्वकर्मा, अनिल राजभर, डॉ दयाशंकर मिश्र दयालु, सोनभद्र के संजीव गौड़, जौनपुर के गिरीश चंद्र यादव, बलिया के दयाशंकर सिंह मंत्री हैं। इसी तरह केंद्र सरकार में मिर्जापुर की सांसद अनुप्रिया पटेल मंत्री हैं। इन्हीं जिलों में शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव हुए हैं। इसमें भाजपा का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। सबसे अहम बात यह है कि 2020 में 936 मतों से जीतने वाले लाल बिहारी यादव ने इस बार जीत का अंतर बढ़ाकर 5,015 मत कर लिया। यानी पांच साल में जीत का अंतर 4,079 मत बढ़ गया।वर्ष 2020 में लाल बिहारी यादव को 7,766 मत मिले थे। उस चुनाव में डॉ. प्रमोद मिश्रा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में थे और उन्हें 6,830 मत मिले थे। इस बार भाजपा ने प्रमोद मिश्रा को अपना प्रत्याशी बनाया, लेकिन अंतिम गणना में उन्हें 6,597 मत ही मिल सके। पिछले चुनाव की तुलना में उनके मत 233 कम रहे। दूसरी ओर, लाल बिहारी यादव के अंतिम मत बढ़कर 11,612 हो गए। यानी 2020 के मुकाबले उन्हें 3,846 अधिक मत मिले।भाजपा के लिए यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि वाराणसी की आठ विधानसभा सीटों में सात पर भाजपा और एक पर उसकी सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) का प्रतिनिधित्व है। इसके बावजूद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा प्रत्याशी की जीत का अंतर बढ़ना बताता है कि विधानसभा की राजनीतिक ताकत और शिक्षक मतदाताओं का चुनावी व्यवहार अलग-अलग हो सकता है।
Purvanchal News जोड़े आपको पूर्वांचल से….