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लखनऊ विश्‍वविद्यालय बना देश का पहला डिजिटल पहचान पत्र जारी करने वाला विश्‍वविद्यालय

लखनऊ। डिजिटल इंडिया मिशन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के विजन को धरातल पर उतारते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा और छात्र-सुविधाओं के क्षेत्र में एक युगांतकारी निर्णय लिया है। आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से विश्वविद्यालय अपने मुख्य परिसर, द्वितीय परिसर और समस्त संकायों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के आधिकारिक पहचान पत्र (Identity Cards) भारत सरकार के ‘डिजीलॉकर’ (DigiLocker) प्लेटफॉर्म पर सीधे उपलब्ध कराने जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत लखनऊ विश्वविद्यालय स्वयं ‘इशूइंग अथॉरिटी’ (Issuing Authority) के रूप में कार्य करेगा। ऐसा करने वाला लखनऊ विश्वविद्यालय देश का पहला राज्य विश्वविद्यालय बन गया है। इस नवीन प्रणाली के सुचारू क्रियान्वयन हेतु विद्यार्थियों के पास भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त पंजीकृत अपार आईडी (Registered APAAR ID) होना अनिवार्य होगा। कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी ने पूर्वांचल न्‍यूज डॉट काम को बताया कि “लखनऊ विश्वविद्यालय निरंतर तकनीक-आधारित, पारदर्शी और विद्यार्थी-हितैषी गुड गवर्नेंस की दिशा में नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। विश्वविद्यालय स्वयं इशूइंग अथॉरिटी के रूप में डिजीलॉकर पर विद्यार्थियों के पहचान पत्र जारी कर रहा है, जो डिजिटल उत्तर प्रदेश और डिजिटल इंडिया के संकल्प को मजबूती प्रदान करता है। पंजीकृत APAAR ID के साथ एकीकृत यह व्यवस्था विद्यार्थियों को 24 घंटे सुलभ, कानूनी रूप से वैध और सुरक्षित डिजिटल पहचान प्रदान करती है। हमारा स्पष्ट संकल्प है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पेपरलेस, त्वरित और तकनीक-संचालित बनाकर विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय व बाधारहित शैक्षणिक परिवेश उपलब्ध कराया जाए।”प्रो. जे.पी. सैनी ने बताया कि डिजीलॉकर पहचान पत्र से विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय को मिलने वाले प्रमुख लाभ’- 1. विश्वविद्यालय बना ‘इशूइंग अथॉरिटी’: लखनऊ विश्वविद्यालय का डेटाबेस सीधे डिजीलॉकर सिस्टम से एकीकृत रहेगा, जिससे प्रवेश प्रक्रिया व शुल्क जमा होते ही अधिकृत डिजिटल पहचान पत्र सीधे छात्र के डिजीलॉकर खाते में सुरक्षित उपलब्ध हो जाएगा।2. APAAR ID से अनिवार्य एकीकरण: ‘वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी’ (APAAR ID) से जुड़ने के कारण छात्र का शैक्षणिक रिकॉर्ड और पहचान पत्र एक ही सुरक्षित प्लेटफॉर्म पर लिंक रहेंगे, जिससे किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े या जाली पहचान पत्र बनने की संभावना शून्य हो जाएगी।जैसे ही छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करेगा यह पहचान पत्र स्वत: बंद हो जायेंगे |3. 24×7 स्मार्टफोन में उपलब्धता और खोने के भय से मुक्ति: छात्रों के स्मार्टफोन में डिजीलॉकर ऐप पर पहचान पत्र हमेशा उपलब्ध रहेगा। इससे कार्ड के खोने, टूटने, फटने या चोरी होने का जोखिम समाप्त हो जाएगा तथा बार-बार डुप्लीकेट कार्ड बनवाने की औपचारिकताओं से राहत मिलेगी।5. त्वरित क्यूआर सत्यापन (Instant QR Code Verification): सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम के अंतर्गत डिजीलॉकर से जारी डिजिटल पहचान पत्र कानूनी रूप से 100% मान्य हैं। कार्ड में लगे डायनामिक क्यूआर कोड के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं, यात्रा रियायतों, बैंकों और अन्य संस्थानों में इसकी प्रामाणिकता तुरंत जांची जा सकेगी।6. पर्यावरण-अनुकूल एवं हरित परिसर (Green Campus): डिजिटल कार्ड के व्यापक उपयोग से प्लास्टिक (PVC) और लेमिनेशन शीट की खपत में भारी कमी आएगी, जो विश्वविद्यालय की पर्यावरण संरक्षण नीति के अनुकूल है।विश्वविद्यालय की आईटी टीम ने इस व्यवस्था के सुचारू संचालन हेतु आवश्यक तकनीकी एकीकरण पूर्ण कर लिया है और शीघ्र ही इस सम्बन्ध में विस्तृत दिशा निर्देश जारी किये जायेंगे |

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