गाजीपुर। जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार ने धान की फसल को जीवाणु झुलसा, झोंका और शीथ ब्लाइट जैसे घातक रोगों से बचाने के लिए किसानों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। वर्तमान मौसम में इन रोगों का प्रकोप तेजी से फैल सकता है, जिससे समय रहते नियंत्रण करना आवश्यक है।जीवाणु झुलसा रोग के लक्षण में पत्तियों पर लहरदार पीले-सफेद या सुनहरे पीले रंग की सीमांत परिगलन, पत्तियों का सिरे से पीछे की ओर सूखना और मुड़ जाना। सुबह के समय नए घावों पर दूधिया या अपारदर्शी ओस की बूंद जैसा जीवाणु रिसाव दिखाई देता है। गंभीर संक्रमण से पत्तियां जल्दी सूख जाती हैं। जिसके उपचार में स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट + टेट्रासाइक्लिन 30 ग्राम एवं कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 1.50 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। गर्भावस्था के दौरान म्यूरेट ऑफ पोटाश 6 ग्राम/लीटर, जिंक उर्वरक 4 ग्राम/लीटर और एलेमेंटल सल्फर 6 ग्राम/लीटर का छिड़काव करें। हवा-बारिश के बाद लक्षण दिखने पर 7 दिन के अंतराल पर घोल का दो बार छिड़काव दोहराएं। झोंका रोग (ब्लास्ट) के लक्षण में पौधे के ऊपरी भागों और पत्तियों पर आँख या नाव के आकार के भूरे धब्बे बनते हैं। धब्बे का केंद्र राख जैसा सफेद या भूरा और किनारे गहरे कत्थई रंग के होते हैं। अत्यधिक संक्रमण से पत्तियां पूरी तरह सूख जाती हैं। जिसके उपचार में रोग की रोकथाम के लिये 500 ग्राम कार्बेण्डाजिम 50% डब्लू.पी. का प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। शीथ ब्लाइट (तना का झुलसा) के लक्षण में यह उच्च आर्द्रता, गर्म तापमान और घने पौधों वाले खेतों में फैलने वाला फंगल रोग है। इसके प्रभाव से पत्तियों पर भूरे धब्बे बनते हैं जो बड़े होकर लंबे बैंड का रूप लेते हैं, जिससे पौधे सूखने लगते हैं और उपज पर बुरा असर पड़ता है। जिसके उपचार में बुआई के 30 दिन बाद 2.5 किलो स्यूडोमोनास फ्लूरोसेन्स को 50 किलो सड़ी गोबर की खाद या रेत के साथ मिलाकर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करें। आवश्यकता पड़ने पर बुआई के 45 दिन के बाद 10-10 दिन के अंतराल पर इसका पत्तियों पर छिड़काव जारी रखें।इसके विकल्प के रूप में प्रोपिकोनाजोल 25% EC या अजोक्सीस्ट्रोबिन 7.1% + प्रोपिकोनाजोल 11.9% SE की 500 ग्राम मात्रा को 500 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें।
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