लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय की टैगोर लाइब्रेरी द्वारा शुक्रवार को टैगोर लाइब्रेरी सभागार में “एक अच्छी शोध पत्रिका में शोध-पत्र कैसे प्रकाशित करें” विषय पर आमंत्रित व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी के संरक्षण में किया गया। इसका उद्देश्य शिक्षकों एवं शोधार्थियों के शोध तथा अकादमिक प्रकाशन संबंधी कौशल को सुदृढ़ करना था। व्याख्यान के मुख्य वक्ता प्रो. राजीव मनोहर, कुलपति, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, राँची एवं प्रोफेसर, भौतिक विज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय थे। टैगोर लाइब्रेरी की मानद पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. रोली मिश्रा एवं उप-पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. ज्योति मिश्रा ने प्रो. मनोहर का स्वागत किया तथा गुणवत्तापूर्ण शोध एवं प्रभावी अकादमिक संचार को बढ़ावा देने में शैक्षणिक मार्गदर्शन के महत्त्व पर प्रकाश डाला। अपने व्याख्यान में प्रो. मनोहर ने प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं में शोध प्रकाशित करने के विभिन्न महत्त्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने शोध के विषय, उद्देश्य एवं प्रकृति के अनुरूप उपयुक्त शोध पत्रिका के चयन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने मौलिक शोध-पत्र एवं समीक्षा लेख सहित विभिन्न प्रकार की शोध पांडुलिपियों की जानकारी दी तथा निर्धारित अकादमिक मानकों एवं संबंधित पत्रिका के दिशा-निर्देशों के अनुरूप शोध-पत्र तैयार करने के महत्त्व को रेखांकित किया। उन्होंने इम्पैक्ट फैक्टर (प्रभाव गुणांक) के महत्त्व को स्पष्ट करते हुए बताया कि यह शोध पत्रिकाओं के उद्धरण-प्रभाव का एक प्रमुख संकेतक है। उन्होंने शोधार्थियों को पत्रिका का चयन करते समय केवल इम्पैक्ट फैक्टर पर निर्भर न रहने, बल्कि उसकी विश्वसनीयता, प्रासंगिकता, अनुक्रमण स्थिति तथा प्रकाशन मानकों जैसे अन्य पहलुओं पर भी विचार करने की सलाह दी। इसके अतिरिक्त, उन्होंने शोध-पत्र प्रकाशन की समय-सीमा तथा पांडुलिपि प्रस्तुत करने, सहकर्मी समीक्षा, संशोधन और अंतिम प्रकाशन तक की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। उन्होंने शोध की मौलिकता, वैज्ञानिक पद्धति की दृढ़ता, उचित संदर्भ-उल्लेख तथा प्रकाशन नैतिकता के पालन को गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए आवश्यक बताया। इस सत्र में प्रतिभागियों को अकादमिक प्रकाशन की चुनौतियों एवं संभावनाओं को समझने तथा विश्वसनीय शोध मंचों के माध्यम से अपने शोध की दृश्यता और प्रभाव बढ़ाने संबंधी उपयोगी जानकारी प्राप्त हुई। साथ ही, शोध संसाधनों तक पहुँच उपलब्ध कराने और शोध क्षमता के विकास में अकादमिक पुस्तकालयों की महत्त्वपूर्ण भूमिका भी रेखांकित की गई। कार्यक्रम में प्रो. मनोज शर्मा, प्रो. महेंद्र अग्निहोत्री, प्रो. ओ. पी. शुक्ल द्विवेदी, उप-पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. ज्योति मिश्रा तथा टैगोर लाइब्रेरी के सभी सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समन्वय टैगोर लाइब्रेरी की सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष प्रिया तिवारी ने किया। इस प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रमों के माध्यम से टैगोर लाइब्रेरी विश्वविद्यालय के शोध समुदाय को सहयोग प्रदान करने, अकादमिक संचार को प्रोत्साहित करने, उत्तरदायी प्रकाशन पद्धतियों को बढ़ावा देने तथा शोधोन्मुख शैक्षणिक वातावरण विकसित करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।

Purvanchal News जोड़े आपको पूर्वांचल से….