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लखनऊ विश्‍वविद्याल के प्रोफेसर डा. ओम प्रकाश के शोध कैंसर-रोधी संभावनाओं वाले बिस्मथ डाइथायोकार्बामेट कॉम्प्लेक्स को मिला पेटेंट

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ओम प्रकाश से संबंधित इस पेटेंट उपलब्धि के अंतर्गत, भारत के पेटेंट कार्यालय ने विश्वविद्यालय को भारतीय पेटेंट संख्या 601484 प्रदान किया है। यह पेटेंट 4 सितंबर 2026 को “Bismuth Dithiocarbamate Complexes, Processes for Their Preparation, and Exhibiting Anticancer Activity” शीर्षक वाले आविष्कार के लिए प्रदान किया गया। यह आविष्कार बिस्मथ डाइथायोकार्बामेट कॉम्प्लेक्सों के संश्लेषण और उनकी रिपोर्ट की गई कैंसर-रोधी गतिविधि से संबंधित है। यह शोध धातु-आधारित समन्वय यौगिकों तथा जैव-चिकित्सकीय अनुसंधान में उनके संभावित अनुप्रयोगों के अध्ययन को रेखांकित करता है। कैंसर आज भी सार्वजनिक स्वास्थ्य की एक प्रमुख चुनौती है। इसलिए, नए संभावित उपचारात्मक यौगिकों की खोज और विकास के लिए निरंतर वैज्ञानिक अनुसंधान आवश्यक है। औषधीय रसायन विज्ञान में धातु-आधारित यौगिकों का विशेष महत्त्व है, क्योंकि उनकी रासायनिक संरचना, समन्वय व्यवस्था और भौतिक-रासायनिक विशेषताएँ उनकी जैविक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं। बिस्मथ डाइथायोकार्बामेट कॉम्प्लेक्स रासायनिक संरचना और कैंसर-रोधी गतिविधि के बीच संबंधों का अध्ययन करने का अवसर प्रदान करते हैं। इस आविष्कार का वैज्ञानिक महत्त्व कैंसर-रोधी अनुसंधान के लिए इन कॉम्प्लेक्सों की आगे जाँच की संभावनाओं में निहित है। इनकी क्रियाविधि, कैंसर कोशिकाओं के प्रति चयनात्मकता, विषाक्तता तथा जैविक सुरक्षा का विस्तृत अध्ययन इनके संभावित चिकित्सीय उपयोग को निर्धारित करने के लिए आवश्यक होगा। सामाजिक दृष्टि से, यह पेटेंट बौद्धिक संपदा संरक्षण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे आगे के वैज्ञानिक अनुसंधान, संस्थागत सहयोग और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को प्रोत्साहन मिल सकता है। यदि भविष्य के अनुसंधान में इन यौगिकों की चिकित्सीय उपयोगिता प्रमाणित होती है, तो वे कैंसर के नए उपचार विकसित करने के व्यापक वैज्ञानिक प्रयासों में योगदान दे सकते हैं।

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