लखनऊ! लखनऊ विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ मैनेजमेंट, फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (LUMBA) द्वारा आज चाणक्य सभागार में “देश के सहकारिता क्षेत्र में सुधार: नीतिगत सहायक और व्यावसायिक प्रगति” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के अभिनंदन और डिपार्टमेंट ऑफ मैनेजमेंट की विभागाध्यक्ष प्रो. रितु नारंग के स्वागत संबोधन से हुआ। सत्र के दौरान “रिफॉर्म उत्सव 2026” के विषय में जानकारी दी गई और बताया गया कि सहकारिता किस प्रकार जन-सामान्य के उत्थान के लिए कार्य करती है तथा हमारे आसपास जीवन के हर क्षेत्र में मौजूद है। साथ ही, ‘भारत टैक्सी’ जैसी नई पीढ़ी की सहकारी पहलों के माध्यम से जमीनी स्तर को मजबूत करने और व्यापार को आसान बनाने (Ease of Doing Business) पर चर्चा की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. एस. पी. सिंह (कुलपति, त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय, आणंद, गुजरात)—जो कि लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र (Alumni) भी हैं—ने बनासकांठा दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति और हाई-टेक डेयरी मॉडल का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि आधुनिक तकनीक और संस्थागत सुधार समाज और समुदायों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। तत्पश्चात, प्रो. राजीव मनोहर (कुलपति, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची एवं लखनऊ विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग में वरिष्ठ प्रोफेसर) ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सहकारिता किस प्रकार समुदाय के विकास के साथ सहजता से जुड़ती है। उन्होंने सहकारी समितियों की स्थापना के लिए विभिन्न नीतिगत प्रोत्साहनों और महात्मा गांधी के सहकारिता विचारों पर विस्तार से चर्चा की तथा ‘लिज्जत पापड़’ और ‘मुल्कनूर सहकारी बैंक’ जैसे सफल उदाहरणों के माध्यम से सहकारिता आंदोलन के प्रभाव को स्पष्ट किया। डिपार्टमेंट ऑफ मैनेजमेंट की सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रिया के संयोजन में संपन्न हुए इस कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सत्र का समापन जीवंत संवाद व धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
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