चंदौली। जिले में सत्कार निधि लिमिटेड फाइनेंस कंपनी और माइक्रोफाइनेंस कंपनी बनाकर तीन लोगों ने पूरे देश में कराड़ों की ठगी की। कंपनी की ओर से आसान लोन का झंसा देकर साइबर ठगी करते थे। शु्क्रवार को साइबर थाना ने चंदौली स्थित कार्यालय पर छापा मारकर महिला सहित 3 लोगों को गिरफ्तार किया। इस दौरान यहां से 3 कंप्यूटर सेट, 350 पासबूक, 21 रजिस्टर, 6 ब्लैंक चेक, 3 मोबाइल फोन, 11 मुहर बरामद किए। वहीं ठगी के 1.42 करोड़ रुपये फ्रीज कराए गए। एएसपी अनंत चंद्रशेखर ने शुक्रवार को पुलिस लाइन सभागार में मामले का खुलासा किया। एएसपी अनंत चंद्रशेखर ने बताया कि साइबर फ्रॅाड की शिकायतों के मामले में साइबर क्राइम टीम प्रभारी मिर्जा रिजवान बेग ने जांच की तो पता चला कि सत्कार निधि लिमिटेड एवं अन्य फर्जी माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के नाम पर लोगों को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने का प्रलोभन दिया जा रहा है। सकलडीहा, चंदौली और पीडीडीयू नगर में स्थित सत्कार निधि लिमिटेड के तीन प्रोपेराइटर हैं। कंपनी की ओर से सोशल मीडिया, मोबाइल कॉल एवं अन्य माध्यमों से लोगों से संपक कर उन्हें लोन स्वीकृत कराने का आश्वासन दिया जाता था। इसके बाद प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी मनी, बीमा शुल्क एवं अन्य चार्ज के नाम पर धनराशि जमा कराई जाती थी। इस कंपनी की आड में साइबर फाइनेंसियल फ्राड का रुपया इसी अकाउंट में मंगवाया जाता था। शिकायतों के विश्लेषण एवं तकनीकी जांच के दौरान समन्वय पोर्टल एवं राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर उपलब्ध अभिलेखों का सत्यापन किया गया। इसमें इन तीनों की ओर से संचालित बैंक खातों एवं गतिविधियों के संबंध में कुल 16 साइबर शिकायतें विभिन्न राज्यों से दर्ज पाई गईं। इसके साथ ही तीनों के खिलाऊ गौतमबुद्धनगर (नोएडा) में भी धोखाधड़ी का एक मुकदमा पंजीकृत मिला। लगभग 1.42 करोड की साइबर फ्राड से प्राप्त धनराशि होल्ड मिली। इसके आधार पर वीरेंद्र कुमार निवासी बर्थरा खुर्द, चंदौली, आशीष पटवा निवासी बबुरी बाजार, थाना बबुरी और सोनी निवासी शाहपुर, थाना चकिया को गिरफ्तार किया गया। वहीं सत्कार निधि कार्यालय पर छापा मारकर 3 कंप्यूटर सेट, 350 पासबूक, 21 रजिस्टर, 6 ब्लैंक चेक, 3 मोबाइल फोन, 11 मुहर बरामद सहित अन्य सामान बरामद किया है। इस मामले में 1.42 करोड़ रुपये होल्ड कराए गए हैं। इस संबंध में वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों एवं अन्य डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है। साइबर ठगी करने वाले तीनों आरोपियों ने अपनी पहचान भी छिपा रखी थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए तीनों ने आधार कार्ड पर गलत नाम और पते दर्ज कराए थे जबकि उस पर फोटो असली थी। इस तरह फर्जी आधार कार्ड तीनों अपने पास रखे हुए थे। साइबर ठगी के आरोपी म्यूल खातों से करोडों का लेन देन करते थे। पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान गिरफ्तार तीनों ने बताया गया कि उन्होंने एक राय होकर सत्कार निधि लिमिटेड कम्पन और माइक्रो फाइनेंस कम्पनी नामक संस्थाओं का संचालन शुरू किया था। ये लोग ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराने का झांसा देते थे। उनसे 5,000 रुपये से 25,000 रुपये तक विभिन्न शुल्कों के नाम पर वसूली करते थे। तीनों ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शाखा बबुरी सहित विभिन्न बैंकों में म्यूल खाते खुलवाए थे। इन खातों का संचालन मुख्य रूप से ये लोग करते थे लेकिन नाम दूसरे का होता। देश के विभिन्न राज्यों और जिले में होने वाले साइबर फ्रॉड एवं ऑनलाइन ठगी से मिले पैसे इन्हीं खातों में मंगाई जाती थी। इसके बाद तीनों अपना 1.5 प्रतिशत कमीशन काटकर शेष धनराशि अपने अन्य सहयोगियों के माध्यम से विभिन्न स्थानों पर ट्रांसफर एवं खपा देते थे। एएसपी अनंत चंद्रशेखर ने जनपदवासियों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति या संस्था के बहकावे में आकर ऋण, निवेश अथवा अन्य वित्तीय लाभ के नाम पर धनराशि जमा न करें। किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
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