गाजीपुर। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला की अध्यक्षता में अभियोजन की समीक्षा बैठक कलेक्टेªट सभागार में बैठक सम्पन्न हुयी। बैठक के दौरान आलोच्य माह जून, 2026 में भारतीय दण्ड संहिता के अन्तर्गत कुल 58 वादों का निस्तारण हुआ, जिसमें 11 बाद में सजा हुई, 01 बाद में अभियुक्त रिहा हुआ व 12 वाद सुलह तथा 34 वाद कमिट के आधार पर निस्तारित हुए तथा अन्य अधिनियम के अन्तर्गत 06 वाद निस्तारण हुई, जिसमें 02 वादों में सजा हुई तथा 04 वाद में अभियुक्त रिहा हुए। समीक्षा के दौरान पाया गया कि माह जून, 2026 की समीक्षा में सजा हुए वादों का विवरण निम्नवत हैं – थाना मुहम्मदाबाद मु०अ०सं० 215/2020 वाद सं0 98/2021 धारा 498ए. 304वीं भा०द०वि० व 3/4 डी.पी.एक्ट स्टेट बनाम पवन कुमार में मा० सत्र न्यायालय, गाजीपुर द्वारा दिनाँक 12.06.2026 को अभियुक्त को 10 वर्ष का कारावास व रू० 10000/- अर्थदण्ड अधिरोपित किया गया। उक्त वाद में कुशल पैरवी श्री कृपाशंकर राय, डी.जी.सी. द्वारा किया गया। थाना नोनहरा मु०अ०सं० 129/2023 वाद सं0 910/2023 धारा 498ए, 304वीं भा०द०वि० व 3/4 डी.पी. एक्ट स्टेट बनाम मुस्ताक खान उर्फ मउर में मा० सत्र न्यायालय, गाजीपुर द्वारा दिनाँक 16.06.2026 को अभियुक्त को 10 वर्ष का कारावास व 10000/- का जुर्माना की सजा की गयी। उक्त वाद में श्री कृपाशंकर राय, डी.जी.सी.द्वारा कुशल पैरवी की गयी। थाना बरेसर मु०अ०सं० 109/2023 वाद सं० 1115/2023 धारा 302 भा०द०वि० व 4/25 आर्म्स एक्ट स्टेट बनाम कमलेशी देवी में मा० न्यायालय ए.डी.जे. प्रथम, गाजीपुर द्वारा दिनाँक 10.06.2026 को अभियुक्त को 10 वर्ष कठोर कारावास तथा 2000/-रूपये की सजा किया गया। उक्त वाद में कुशल पैरवी श्री अखिलेश सिंह.ए.डी.जी.सी. द्वारा किया गया। थाना गहमर मु०अ०सं० 237/2021 वाद सं0 248/2022 धारा 302 भा.द.वि. स्टेट बनाम अमजद खान में मा० न्यायालय ए.डी.जे.प्रथम गाजीपुर द्वारा दिनाँक 11.06.2026 को अभियुक्त को मृत्युदण्ड से दण्डित किया गया। उक्त वाद में कुशल पैरवी श्री अखिलेश सिंह, ए.डी.जी.सी. द्वारा किया गया। थाना रेवतीपुर मु०अ०सं० 395/2017 बाद सं० 20/2018 धारा 354,323 भा.द.वि. व 7/8 पाक्सो एक्ट स्टेट बनाम बोदा सिंह उर्फ भोला सिंह में मा० पाक्सो न्यायालय, गाजीपुर द्वारा दिनाँक 05.06.2026 को अभियुक्त को 04 दिन के कारावास की सजा से दण्डित किया गया। उक्त वाद में कुशल पैरवी श्री रविकान्त पाण्डेय, वि०लो०अभि० द्वारा किया गया। थाना खानपुर मु०अ०सं० 106/2018 वाद सं० 180/2018 धारा 363,366,376,506 भा.द.वि. व 3/4 पाक्सो एक्ट स्टेट बनाम गौतम में मा० पाक्सो न्यायालय, गाजीपुर द्वारा दिनाँक 06.06.2026 को अभियुक्त को 10 वर्ष के कारावास की सजा से दण्डित किया गया। उक्त वाद में कुशल पैरवी श्री रविकान्त पाण्डेय, वि०लो०अभि० द्वारा किया गया। थाना दुल्लहपुर मु०अ०सं० 81/2018 वाद सं० 148/2018 धारा 363,366,376 भा.द.वि. व 3/4 पाक्सो एक्ट स्टेट बनाम आकाश गौंड़ में मा० पाक्सो न्यायालय, गाजीपुर द्वारा दिनाँक 09.06.2026 को अभियुक्त को 10 वर्ष के कारावास की सजा से दण्डित किया गया। उक्त वाद में कुशल पैरवी श्री प्रभुनारायण सिंह, वि०लो०अभि० द्वारा किया गया। कुल 331 सम्मन/वारण्ट निर्गत किया गया जिसके सापेक्ष कुल 238 सम्मन/वारण्ट तामिल कराया गया। तामिल वारण्ट/सम्मन के सापेक्ष उपस्थित गवाहों की संख्या 185 रहीं, जिसमें से 172 गवाहों को माननीय न्यायालय के समक्ष परीक्षित कराया गया तथा 13 गवाह पी.ओ. के अवकाश पर होने तथा अधिवक्तागण के हड़ताल के कारण परीक्षित नहीं हुए। सत्र न्यायालयों में सम्मन/वारण्ट / तलब गवाहों हेतु कुल 328 सम्मन निर्गत हुए जिसके सापेक्ष 281 तामिल हुए। तामिला के सापेक्ष कुल 252 गवाह उपस्थित हुए। उपस्थित गवाहों के सापेक्ष कुल 232 गवाह परीक्षित हुए तथा 20 गवाह अधिवक्ता के हड़ताल तथा पी.ओ. के अवकाश के कारण परीक्षित नहीं हो सके। सत्र न्यायालय में फैसला शुदा गम्भीर धाराओं में जमानत प्रार्थना पत्रों के निस्तारण की समीक्षा में पाया गया कि माह जून, 2026 में अवर न्यायालय में कुल 145 जमानत प्रार्थना पत्र दायर हुए जिसके सापेक्ष कुल 79 जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकृत हुए तथा 66 जमानत प्रार्थना पत्र अस्वीकृत हुए। अपर जिलाधिकारी (भू. रा.) द्वारा जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) तथा लोक अभियोजकों को निर्देशित किया गया कि रिहा हुए अभियुक्तों के वादों की पुनः विधिवत समीक्षा कर ले। यदि पुनः अपील किया जाना शासकीय हित में हो तो पुनः अपील का प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत करे। जिन वादों में गवाह पक्षद्रोही हो रहे है। कुछ वाद में पक्षद्रोही हुए गवाहों पर मुकदमा कर सजा दिलाने की कार्यवाही सुनिश्चित किया जाए, जिससे सुधार हो सके। सभी अभियोजकगण को निर्देशित किया गया कि प्रत्येक माह कम से कम एक वाद की केस डायरी बनायी जाए कि पुलिस द्वारा की गयी अपनी विवेचना में क्या-क्या त्रुटियां/कमियां की गयी, उसे नोट किया जाए, जिससे कि वाद में स्टेट के विरूद्ध आदेश पारित हुआ, ताकि समीक्षा के दौरान उक्त बिन्दु पर भी सुधार किया जा सके तथा अधिक से अधिक वादों का निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।
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