गाज़ीपुर। औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के अंतर्गत भारतीय बैंक संघ (IBA) एवं यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) के बीच संपन्न समझौतों के पूर्ण अनुपालन तथा 5-दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू किए जाने की मांग को लेकर आज आहूत राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल का गाज़ीपुर जनपद में व्यापक प्रभाव देखने को मिला। धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सत्येन्द्र गुप्ता, जिला संयोजक, UFBU गाज़ीपुर इकाई एवं जिला मंत्री, UPBEU गाज़ीपुर ने कहा कि 7 दिसंबर 2023 को हस्ताक्षरित एमओयू तथा 8 मार्च 2024 को जारी संयुक्त सेटलमेंट/जॉइंट नोट में शेष सभी शनिवारों को बैंक अवकाश घोषित किए जाने के संबंध में स्पष्ट सहमति बनी थी। इसके बावजूद 5-दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू न किया जाना बैंक कर्मचारियों के साथ न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि बैंक कर्मचारी लंबे समय से इस मांग को लेकर लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से संघर्ष कर रहे हैं। बैंकिंग क्षेत्र में लगातार बढ़ते कार्यदबाव, कर्मचारियों की कमी तथा कार्य-जीवन संतुलन की आवश्यकता को देखते हुए 5-दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था अब समय की मांग बन चुकी है। सत्येन्द्र गुप्ता ने बताया कि गाज़ीपुर जनपद में हड़ताल के दौरान 1000 से अधिक अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे, लगभग 300 बैंक शाखाएं बंद रहीं तथा अनुमानतः 150 करोड़ रुपये से अधिक का बैंकिंग व्यवसाय प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि 11 सितम्बर की इस एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बाद भी यदि सरकार 5-दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने के संबंध में कोई ठोस एवं सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो UFBU के आंदोलन को अगले चरण में ले जाया जाएगा। इसके तहत 28, 29 एवं 30 सितम्बर 2026 को तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल की जाएगी। इसके बाद भी यदि सरकार द्वारा मांगों का समाधान नहीं किया गया, तो 26 अक्टूबर 2026 से देशभर के बैंक कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि बैंक कर्मचारी संघर्ष नहीं चाहते, बल्कि अपनी जायज मांगों का सम्मानजनक एवं समयबद्ध समाधान चाहते हैं। सरकार के पास अभी भी वार्ता के माध्यम से समाधान निकालने का अवसर है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि अनिश्चितकालीन हड़ताल की स्थिति उत्पन्न होने से पहले 5-दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा किया जाए। राकेश यादव, अध्यक्ष, ऑल इंडिया पीएनबी ऑफिसर्स फेडरेशन ने कहा कि बैंक कर्मचारियों पर लगातार बढ़ते कार्यदबाव, स्टाफ की गंभीर कमी तथा कार्य-जीवन संतुलन के अभाव को देखते हुए 5-दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था अब आवश्यक हो गई है। सरकार को इस दिशा में शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। संतोष राय, AIPNBOA ने कहा कि पूर्व में हुए समझौतों एवं सहमतियों का प्रभावी क्रियान्वयन औद्योगिक संबंधों की विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है। मांगों के समाधान में अनावश्यक विलंब से बैंक कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। रामजी, बैंक ऑफ इंडिया ने कहा कि बैंक कर्मचारी लंबे समय से समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बार-बार मांग उठाए जाने के बावजूद 5-दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था के क्रियान्वयन में हो रही देरी दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार को इस विषय में शीघ्र निर्णय लेना चाहिए। सुनील यादव, केनरा बैंक, आलोक प्रकाश, पंजाब नेशनल बैंक तथा जितेन्द्र शर्मा, जिला मंत्री, BEFI ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बैंक कर्मचारियों की जायज मांगों के लिए UFBU के सभी घटक संगठन एकजुट हैं और मांगों के समाधान तक लोकतांत्रिक एवं संगठित संघर्ष जारी रहेगा। आज की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में UFBU के सभी सात घटक संगठनों—AIBEA, BEFI, NCBE, AIBOC, AIBOA, INBEF एवं INBOC ने सहभागिता की। गाज़ीपुर में पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन बैंक सहित विभिन्न बैंकों के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में हड़ताल में शामिल रहे। UFBU गाज़ीपुर इकाई ने केंद्र सरकार एवं संबंधित प्राधिकरणों से मांग की कि 5-दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने तथा लंबित मांगों के समाधान के लिए शीघ्र ठोस एवं समयबद्ध निर्णय लिया जाए।

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