वाराणसी। सुहागिन अखंड सौभाग्य और कुंवारी मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए 14 सितंबर को हरतालिका तीज व्रत रखेंगी। इस बार यह व्रत सोमवार को होने से और भी फलदायी होगा। सुहागिन व कुंवारी निराहार-निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करेंगी। इस दिन चित्रा नक्षत्र के अलावा ब्रह्म और मुद्गर योग रहेगा। पूजा के लिए सुबह और शाम को कुल 3:18 घंटे का शुभ मुहूर्त मिलेगा। भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज मनाई जाएगी। पंचांगों के अनुसार, भादो मास शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 13 सितंबर सुबह 7:15 बजे होगी, जो अगले दिन 14 सितंबर सोमवार को सुबह 7:14 बजे तक रहेगी। हिंदू धर्म में उदयातिथि की प्रधानता होने के कारण 14 सितंबर को दिनभर तृतीया तिथि रहेगी। इसलिए इसी दिन यह पर्व मनाया जाएगा। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष व प्रख्यात ज्योतिषविद् प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि यह पर्व खासकर कुंवारियों के लिए सबसे उत्तम माना गया है। मान्यता है कि भगवान शिव से माता पार्वती का विवाह कराने के लिए उनकी सखियां उन्हें हरण कर वन में ले गईं और वहां माता पार्वती ने भगवान शिव की पूजा की। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ। हरतालिका तीज पर दो समय पूजा करना सबसे उत्तम और फलदायी होगा। सुबह 6:12 से 7:06 बजे तक शुभ मुहूर्त है। कुल 54 मिनट का शुभ मुहूर्त बन रहा है। सुबह पूजा करनी हो तो तृतीया तिथि समाप्त होने से पहले यानी सुबह 7:06 बजे तक पूजा करना सर्वश्रेष्ठ रहेगा। महिलाएं सुबह पूजा नहीं कर पाईं तो शाम को प्रदोष काल में पूजा कर सकती हैं। प्रदोष काल सूर्यास्त के ठीक बाद का समय होता है। इस दौरान 2:24 घंटे तक पूजा का मुहूर्त रहेगा।
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