वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग और अंतर सांस्कृतिक अध्ययन केन्द्र के संयुक्त तत्त्वावधान में 28 से 30 जुलाई, 2026 तक ‘नयी चाल की हिन्दी’ विषयक तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन महामना सभागार, मालवीय मूल्य अनुशीलन केन्द्र में किया जा रहा है। हिन्दी के वरिष्ठ आलोचक प्रो. नामवर सिंह की जन्मशती के उपलक्ष्य में आयोजित इस संगोष्ठी में देश-विदेश के प्रतिष्ठित विद्वान, साहित्यकार, आलोचक, भाषाविद् एवं शोधकर्ता सहभागिता करेंगे। दशकों बाद हिन्दी विभाग, अंतर सांस्कृतिक अध्ययन केन्द्र के सहयोग से इतना विराट एवं भव्य आयोजन कर रहा है। संगोष्ठी का उद्देश्य पिछले लगभग डेढ़ सौ वर्षों में हिन्दी भाषा और साहित्य की विकास-यात्रा, उसकी उपलब्धियों, सीमाओं तथा समकालीन समय में उभर रही नई चुनौतियों और संभावनाओं का बहुआयामी मूल्यांकन करना है। तीन दिनों तक आयोजित होने वाले विभिन्न अकादमिक सत्रों में हिन्दी भाषा, साहित्य, संस्कृति, आलोचना, अनुवाद, लोकपरंपरा, मीडिया तथा डिजिटल युग में हिन्दी के बदलते स्वरूप से जुड़े विविध विषयों पर शोधपरक विमर्श होगा। आयोजन के दौरान हिन्दी के विकासक्रम में उन्नीसवीं सदी से लेकर वर्तमान समय तक आए वैचारिक, सांस्कृतिक और भाषिक परिवर्तनों पर विशेष रूप से चर्चा की जाएगी। साथ ही वैश्वीकरण, सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल संचार और नए मीडिया के दौर में हिन्दी की बदलती भूमिका, उसके समक्ष उपस्थित चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। नामवर सिंह की जन्मशती के अवसर पर आयोजित यह संगोष्ठी अपने विषय की व्यापकता, सहभागी विद्वानों की विशिष्टता तथा प्रस्तावित अकादमिक विमर्श की बहुआयामी प्रकृति के कारण समकालीन हिन्दी जगत की अत्यंत महत्त्वपूर्ण बौद्धिक घटना है। हिन्दी भाषा, साहित्य और संस्कृति से जुड़े विविध पक्षों पर होने वाला यह संवाद न केवल वर्तमान समय की चुनौतियों और संभावनाओं को नए दृष्टिकोण से सामने लाएगा, बल्कि इक्कीसवीं शताब्दी में हिन्दी अध्ययन के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण अकादमिक संदर्भ के रूप में भी अपनी पहचान स्थापित करेगा। संगोष्ठी में प्रस्तुत शोध-पत्रों का संकलन पुस्तक के रूप में राजकमल प्रकाशन प्रकाशित करेगा। यह संगोष्ठी हिन्दी भाषा और साहित्य के समकालीन परिदृश्य पर गंभीर अकादमिक संवाद का एक महत्त्वपूर्ण मंच सिद्ध होगी, जिसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों के विशेषज्ञ वर्तमान संदर्भों में हिन्दी की दिशा, दशा और भविष्य पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी करेंगे। इस अवसर पर कला संकाय की प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल, आई.ए.सी.एल.एल.एस. के पूर्व सचिव प्रो. हरीश त्रिवेदी तथा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के सदस्य सचिव प्रो. धनंजय सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में अपनी गरिमामयी उपस्थिति से उद्घाटन सत्र को आलोकित करेंगे। संगोष्ठी के विभिन्न अकादमिक सत्रों में देश-विदेश के प्रतिष्ठित विद्वान अपने व्याख्यानों एवं विमर्शों के माध्यम से बौद्धिक परिदृश्य को समृद्ध करेंगे। इस संगोष्ठी में समम्लित प्रमुख वक्ताओं के नाम इस प्रकार हैं-
- प्रो. बद्री नारायण, कुलपति, टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान।
- प्रो. माधव हाड़ा, भक्ति आन्दोलन के सुप्रसिद्ध अध्ये ता।
- उदयन वाजपेई, प्रख्यात कलाविद एवं लेखक।
- प्रो. रविकांत,आर्काइविस्ट एवं इतिहासकार, सी.एस.डी.एस.।
- प्रो. रमण सिन्हा, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ।
- प्रो. साधना नेथानी, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय।
- प्रो. देवेन्द्र शर्मा, कैलिफ़ोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी।
- प्रो. इसाबेला हुआकूज़ और प्रो.तिमसल मसूद, कोलम्बिया विश्वविद्यालय।
- जोआना, वॉरसॉ विश्वविद्यालय, पोलैंड।
- गुंजन मल्होत्रा, तुषार श्रीवास्तव और कुमार नीरज, टेक्सास विश्वविद्यालय, ऑस्टिन।
- अखिलेश, वरिष्ठ कथाकार, संपादक:तद्भव पत्रिका।
- आशुतोष कुमार, दिल्ली विश्वविद्यालय, संपादक:आलोचना पत्रिका।
- डॉ. राजीव रंजन गिरी, दिल्ली विश्वविद्यालय।
- अरुण कमल, कवि एवं आलोचक तथा साहित्य अकादमी पुरुस्कार से सम्मानित रचनाकार।
- प्रो. सुधीर चन्द्र, विख्यात इतिहासकार।
- शैलेष कुमार, आई. आर. एस.।
- सलिल मिश्रा, अम्बेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली।
- डी. वेंकेटराव, नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय।
- अमितेश कुमार, इलाबाद विश्वविद्यालय।
- स्वाति गांगुली, विश्वभारती विश्वविद्यालय, शांतिकेतन।
- अमिताभ राय, लेखक एवं प्रकाशक।
- मधुप कुमार, लेखक एवं आलोचक।
Purvanchal News जोड़े आपको पूर्वांचल से….