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मॉरीशस में भोजपुरी की जय और जय भारत

आजमगढ़। मॉरीशस के पावन धरती पर भोजपुरी के अलख जगा रहल भोजपुरी जन-जागरण यात्रा में भारतीय मूल के पूर्वजों का महत्वपूर्ण योगदान बा। सेंट हिलायर सामुदायिक केंद्र, मॉरीशस सरकार के एगो सरकारी सामुदायिक भवन हवे, जहाँ गाँव-समाज के बैठक, सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेल-स्वास्थ्य जागरूकता शिविर होत रहेला। एही केंद्र से हमरे भारतीय मूल के भोजपुरी भाई- बहन लोग भोजपुरी भाषा और संस्कृति बचाओ खातिर जनजागरण यात्रा निकाल रहल बाड़े। 28 सितंबर से 25 अक्टूबर 2026 तक चले वाला ई ऐतिहासिक यात्रा करते हुए विश्व भोजपुरी संगठन की अध्यक्ष डॉ. हौशीला देवी रिसौल ने कहा कि भारतीय साड़ी आ धोती-कुर्ता में सजल माई-बहिन, भैया-भौजी, काका-काकी आ छोट-छोट लइका-लइकी के हाथ में भोजपुरिया यात्रा के बैनर, आ पीछे गन्ना के लहलहात खेत आ मॉरीशस के नीला आसमान – ई दृश्य देख के हर भोजपुरीयन क दिल आज गदगद हो गइल। ईहे त हमरे पुरखन के विरासत हवे। भोजपुरी अकादमी एवं लोक कला शोध संस्थान आ अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी संगम भारत के अंतरराष्ट्रीय संयोजक एवं प्रभारी अरविंद श्रीवास्तव ‘चित्रांश’ कहनी कि लगभग 180 साल पहिले आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर, बनारस, गोरखपुर, देवरिया, आरा, छपरा सहित समूचा पूर्वांचल – उत्तर प्रदेश, बिहार आ छत्तीसगढ़ से गइल हमरे पूर्वज लोग आजो भोजपुरी के माटी के सुगंध मॉरीशस में बड़का जतन से बचवले बाड़े।आजमगढ़ के धरती धन्य बा। एही धरती से मॉरीशस में भारत के राजदूत विराजमान बाड़े, जिनके विचार हमेशा भोजपुरी संस्कृति के प्रति बड़ सम्मान आ गरिमा से भरल रहेला। भोजपुरी खाली एगो भाषा ना, संस्कार हवे,ई भारतीय सभ्यता हवे। आजमगढ़ से लेके मॉरीशस तक जब ले भोजपुरी बाजत रही,गूंजती रही,तब ले हमनी के पहचान पूरी दुनिया में जिंदा रही।

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