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महापर्व शारदीय नवरात्र: कलश स्‍थापना के लिए 47 मिनट का शुभ मुहूर्त

वाराणसी। काशी में रविवार से शारदीय परंपरा के अनुसार शक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू हो रहा है। नौ दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान के दौरान देवाधिदेव महादेव की नगरी में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना होगी। काशी में रविवार से घरों में कलश स्थापना हो जाएगी। बीएचयू के ज्योतिषाचार्य सुभाष पांडेय के मुताबिक, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्र का शुभारंभ हो रहा है। इस बार प्रतिपदा तिथि 10 अक्तूबर की रात 9:19 बजे से शुरू होगी और 11 अक्तूबर की रात 9:30 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर 11 अक्तूबर यानी रविवार को नवरात्र का प्रथम दिवस मान्य होगा। इस दिन चित्रा नक्षत्र व वैधृति योग का संयोग है। बीएचयू के ज्योतिषाचार्य प्रो. विनय पांडेय के मुताबिक, घरों में घट स्थापना के लिए 11 अक्तूबर को सुबह 11:20 मिनट से 12:07 बजे तक 47 मिनट का शुभ मुहूर्त है। प्रो. विनय पांडेय के मुताबिक, मूर्ति स्थापना के लिए बिल्व वृक्ष के पास देवी को निमंत्रण 16 अक्तूबर को और पत्रिका प्रवेशन, सरस्वती पूजा और मूर्ति स्थापना 17 अक्तूबर को किया जाएगा। महाअष्टमी व्रत एवं रात्रि में महानिशा पूजन 18 अक्तूबर को होगी।  महानवमी का व्रत 19 अक्तूबर को और इसी दिन सुबह 7:40 के बाद दुर्गा पाठ/पूजन का होम भी आरंभ हो जाएगा जो 20 अक्तूबर को सुबह 9:20 बजे तक किया जा सकेगा। पूर्ण नवरात्र का व्रत रखने वाले लोग 21 अक्तूबर की सुबह पारण करेंगे। देवी दुर्गा का घट/ प्रतिमा आदि से विसर्जन 20 अक्तूबर को और भगवती की प्रतिमा का उत्थापन और विसर्जन 21 अक्तूबर को होगा।

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