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बीएचयू में PRASUTICON 2.0 का शुभारंभ, कार्यशाला का हुआ आयोजन

वाराणसी। PRASUTICON 2.0 का शुभारंभ 7 अक्टूबर 2026 को आयोजित एक समर्पित पूर्व-सम्मेलन कार्यशाला के साथ हुआ। इस कार्यशाला में प्रख्यात चिकित्सकों, शिक्षाविदों एवं प्रतिभागियों ने सहभागिता की तथा आधुनिक शल्य चिकित्सा पद्धतियों और आयुर्वेद की पारंपरिक चिकित्सीय विधियों का समृद्ध एवं सार्थक समन्वय प्रस्तुत किया गया। कार्यशाला का औपचारिक शुभारंभ भगवान धन्वंतरि एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमाओं पर गणमान्य अतिथियों द्वारा माल्यार्पण के साथ हुआ। इस अवसर पर कार्यशाला एवं सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए उनका आशीर्वाद प्राप्त किया गया। कार्यशाला में चार प्रमुख व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें दो प्रत्यक्ष शल्य चिकित्सा प्रदर्शन (Live Surgical Demonstrations) सम्मिलित थे। इन शल्य प्रक्रियाओं का सर सुंदरलाल अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर से के. एन. उडुपा सभागार में सीधा प्रसारण किया गया, जिसे लगभग 230 प्रतिभागियों ने देखा और शल्य दल के साथ प्रत्यक्ष अकादमिक संवाद किया। प्रथम प्रत्यक्ष शल्य चिकित्सा प्रदर्शन में बड़े गर्भाशयीय फाइब्रॉइड के एक प्रकरण में लैप्रोस्कोपिक टोटल एब्डॉमिनल हिस्टेरेक्टॉमी की गई। यह प्रक्रिया डॉ. मंदार रानाडे एवं डॉ. आशीष कुमार सिंह द्वारा की गई, जिसमें डॉ. शिल्पी सिंह ने सहयोग किया। द्वितीय प्रत्यक्ष शल्य चिकित्सा प्रदर्शन में गर्भाशय के प्रोलैप्स के एक प्रकरण में वैजाइनल हिस्टेरेक्टॉमी की गई। यह प्रक्रिया डॉ. प्रेमराज खैरनार द्वारा की गई, जिसमें डॉ. भगवान कराले एवं डॉ. शिखा सिंह ने सहयोग किया। इसके अतिरिक्त, आयुर्वेद की विशिष्ट चिकित्सीय प्रक्रियाओं पर आधारित दो हैंड्स-ऑन सत्र आयोजित किए गए। अग्निकर्म एवं विद्धकर्म चिकित्सा की तकनीकों का प्रदर्शन डॉ. पुलक कांति  कर, विशेषज्ञ, पंचकर्म द्वारा किया गया, जिसमें डॉ. संजीब कलसा ने सहयोग किया। मर्म चिकित्सा पर एक समर्पित व्यावहारिक सत्र प्रो. सुनील जोशी, पूर्व कुलपति, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय एवं प्रख्यात शल्य चिकित्सक, द्वारा संचालित किया गया। कार्यशाला में अनेक प्रख्यात शल्य चिकित्सकों, चिकित्सकों एवं शिक्षाविदों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें डॉ. रमन सिंह, प्रो. लक्ष्मण सिंह, प्रो. शिव जी गुप्ता, डॉ. प्रदीप मुसले, प्रो. डी. एन. पांडेय, डॉ. नीरू नथानी, प्रो. पी. के. गोस्वानी, प्रो. के. के. पांडेय एवं प्रो. सुजाता कदम प्रमुख थे।कार्यशाला के सफल आयोजन में आयोजन समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसमें प्रो. दीपा मिश्रा, प्रो. सुनीता सुमन, प्रो. विश्वेश बी. एन., प्रो. अनुराधा रॉय, डॉ. प्रीति चौहान एवं डॉ. शिखा सिंह सम्मिलित रहे।व्यावहारिक सत्रों ने प्रतिभागियों को उन्नत शल्य चिकित्सा एवं चिकित्सीय तकनीकों का निकट से अवलोकन करने, उनके नैदानिक अनुप्रयोग को समझने तथा अनुभवी विशेषज्ञों के साथ संवाद करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। ऑपरेशन थिएटर से सभागार में शल्य प्रक्रियाओं के सीधे प्रसारण ने इस शैक्षणिक अनुभव को और अधिक प्रभावी बनाया तथा प्रतिभागियों को वास्तविक समय में प्रक्रियाओं को देखने एवं उनसे सीखने का अवसर प्रदान किया।पूर्व-सम्मेलन कार्यशाला ने आधुनिक शल्य चिकित्सा पद्धतियों एवं आयुर्वेद की समृद्ध चिकित्सीय परंपरा के बीच एक सार्थक सेतु स्थापित किया। प्रतिभागियों का उत्साह, सक्रिय सहभागिता एवं सकारात्मक प्रतिक्रिया कार्यशाला की सफलता का स्पष्ट प्रतिबिंब रही तथा इसने मुख्य सम्मेलन के लिए एक प्रेरणादायी एवं सशक्त अकादमिक वातावरण का निर्माण किया।

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