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बीएचयू राष्ट्रीय युवा संसद 5.0 में देशभर से 500 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय युवा संसद के पांचवें संस्करण का सफल आयोजन किया गया, जिसमें देशभर से 500 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। तीन दिवसीय आयोजन में समसामयिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विषयों पर वाद-विवाद, चर्चा और विचार-विमर्श हुआ। रिटोरिका: द डिबेटिंग सोसाइटी द्वारा सिटी डेलीगेसिज के सहयोग से तथा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज और इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, बीएचयू के अकादमिक सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार सिंह के मार्गदर्शन एवं कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी के संरक्षण में हुआ। कार्यक्रम के संयोजक प्रो. ललित मोहन अग्रवाल, मुख्य अधीक्षक, सिटी डेलीगेसिज, बीएचयू रहे। कार्यक्रम को प्रो. आशीष बाजपेयी, निदेशक, इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज तथा प्रो. एस. एन. सांखवार, निदेशक, आईएमएस, बीएचयू का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।असम, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए विद्यार्थियों ने नौ विशेष समितियों में भाग लेते हुए संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, जातिगत जनगणना, रवांडा संकट तथा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार सिंह ने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, संवाद एवं नेतृत्व क्षमता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं तथा उन्हें सिविल सेवा परीक्षा जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी तैयार करती हैं। मुख्य वक्ता अजय पुरुषोत्तम शेट्टी ने युवाओं से केवल प्रश्न उठाने तक सीमित न रहने तथा नीति निर्माण और राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।मुख्य अतिथि चिराग जैन, आईपीएस, अपर पुलिस अधीक्षक, आजमगढ़ ने सिविल सेवा के अभ्यर्थियों से अपने अनुभव साझा करते हुए इंजीनियरिंग और कॉरपोरेट क्षेत्र से सिविल सेवा तथा भारतीय पुलिस सेवा तक की अपनी यात्रा बताई। उन्होंने अभ्यर्थियों को लक्ष्य के प्रति पूर्ण एकाग्रता और दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ तैयारी करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से पहले दो प्रयासों में बिना किसी वैकल्पिक योजना के लक्ष्य पर पूरी तरह केंद्रित रहकर निरंतर प्रयास किया जाए तो देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक को भी सफलता के साथ पास किया जा सकता है।समरजीत मिश्रा, पूर्व सहायक कलेक्टर, ओडिशा सरकार ने सिविल सेवा के अभ्यर्थियों के प्रश्नों का धैर्यपूर्वक समाधान किया तथा बताया कि स्नातक स्तर से ही नियमित पढ़ाई के साथ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की जा सकती है। कार्यक्रम के संयोजक प्रो. ललित मोहन अग्रवाल ने हर्षित श्रीवास्तव एवं रिटोरिका की पूरी टीम के प्रयासों की सराहना की तथा विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, नेतृत्व और वक्तृत्व कौशल के विकास से जुड़ी ऐसी गतिविधियों के लिए निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया।कार्यक्रम का समापन विजेताओं को पुरस्कार वितरण तथा जसमिंदर सिंह की मनमोहक कव्वाली प्रस्तुति के साथ हुआ।

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