वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के राजीव गांधी दक्षिणी परिसर, बरकछा, मीरजापुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन APACON-2026 का शुभारंभ हुआ। ‘सतत पशुधन उत्पादकता की दिशा में पशु शरीर क्रिया विज्ञान के उभरते प्रतिमान : विकसित भारत की ओर’ विषय पर आयोजित यह सम्मेलन पशु शरीर क्रिया विज्ञान एवं जैव रसायन विभाग, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय, कृषि विज्ञान संस्थान, बीएचयू द्वारा आयोजित किया जा रहा है। यह राजीव गांधी दक्षिणी परिसर में पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय द्वारा आयोजित पहला राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन है।सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी, कुलपति, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने कहा कि पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय ने आधारभूत संरचना और संकाय से जुड़ी चुनौतियों को निरंतर दूर करते हुए प्रगति की है और इस प्रगति को बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन वैज्ञानिकों और युवा शोधकर्ताओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान तथा संवाद का मंच प्रदान करते हैं। उन्होंने राजीव गांधी दक्षिणी परिसर में उपलब्ध सुविधाओं के विकास से भविष्य में अधिक सम्मेलनों के आयोजन और वैज्ञानिक संवाद एवं सहयोग को बढ़ावा दिए जाने की बात कही। कुलपति ने वैज्ञानिक संस्थानों के बीच सहयोग और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की आवश्यकता पर चर्चा करते हुए संयुक्त परियोजनाओं, संयुक्त शोध निर्देशन, उद्योगों के साथ सहयोग, नवाचार, पेटेंट और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की दिशा में पूरक क्षमताओं वाले संस्थानों के साथ साझेदारी विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने प्रत्येक संस्थान की विशिष्ट पहचान विकसित करने तथा प्रतिभागियों से सम्मेलन से नए ज्ञान, विचार और व्यावसायिक संबंधों के साथ लौटने का भी सुझाव दिया।विशिष्ट अतिथि डॉ. रवि कुमार गंधम, निदेशक, राष्ट्रीय पशु जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (NIAB), हैदराबाद ने रोग प्रतिरोधकता और ताप सहनशीलता जैसे शारीरिक लक्षणों के आनुवंशिक और बाह्य अभिव्यक्तिगत स्तर पर समग्र अध्ययन की आवश्यकता बताई। उन्होंने वैज्ञानिकों के बीच अधिक सहयोग और अंतर्विषयक अनुसंधान की आवश्यकता पर चर्चा करते हुए विभिन्न विषयों में अलग-अलग कार्य करने के बजाय प्रयोगशाला में किए जा रहे अनुसंधान को किसानों के लिए उपयोगी समाधानों में रूपांतरित करने का सुझाव दिया। उन्होंने राष्ट्रीय पशु जैव प्रौद्योगिकी संस्थान में फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हार्मोन (FSH) तथा GreenFeed तकनीक के माध्यम से व्यक्तिगत स्तर पर मीथेन उत्सर्जन मापने के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने मीथेन उत्सर्जन से संबंधित डेटाबेस तैयार करने के लिए किए जा रहे कार्यों के बारे में भी बताया।प्रो. बी. एम. एन. कुमार, आचार्य प्रभारी, राजीव गांधी दक्षिणी परिसर ने कहा कि सतत पशुधन उत्पादन में पशु चिकित्सा शरीर क्रिया विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन संकाय और उसके अनुसंधान कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के साथ-साथ वैज्ञानिक अनुसंधान, नस्ल सुधार और सतत डेयरी विकास को नई दिशा प्रदान करेगा।प्रो. सतीश कुमार सिंह, संकाय प्रमुख, कृषि विज्ञान संकाय ने पशुधन के स्वास्थ्य में सुधार तथा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में सटीक पोषण और वास्तविक समय स्वास्थ्य निगरानी की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में पशु शरीर क्रिया विज्ञान एवं पशुधन उत्पादन के महत्व की जानकारी दी।डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, अध्यक्ष, APA ने पशुधन उत्पादकता, स्वास्थ्य, कल्याण और जलवायु-सहिष्णुता में पशु शरीर क्रिया विज्ञान की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने सतत पशुधन उत्पादन और विकसित भारत के लक्ष्यों के लिए जलवायु-अनुकूल नस्लों, तनाव संबंधी जैव-सूचकों तथा उन्नत प्रजनन प्रौद्योगिकियों के महत्व की जानकारी दी। APA के महासचिव एवं आईसीएआर-भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के शरीर क्रिया विज्ञान एवं जलवायु विज्ञान प्रभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विकास चंद्र ने अनुसंधान और व्यावसायिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए विभिन्न APA 2025 पुरस्कारों के विजेताओं की औपचारिक घोषणा की।आयोजन सचिव डॉ. मनीष कुमार ने सम्मेलन के आगामी दो दिनों में आयोजित होने वाले तकनीकी सत्रों की योजना, कार्यक्रम एवं प्रक्रियाओं की जानकारी प्रतिभागियों के समक्ष प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन किसानों, युवा शोधकर्ताओं और पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय के लिए नए विचारों एवं सार्थक परिणामों का मंच प्रदान करेगा।प्रो. अमित राज गुप्ता, संकाय प्रमुख, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय ने स्वागत संबोधन दिया। उन्होंने कहा की पशुधन उत्पादन के भविष्य के लिए मौलिक शरीर क्रिया विज्ञान को जीनोमिक्स, जैव प्रौद्योगिकी, सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी, सटीक पशुधन पालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा विज्ञान जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकियों के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर चर्चा की।उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. उत्कर्ष कुमार त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष ने किया तथा डॉ. तुलसीरामन पी., सह-आयोजन सचिव ने धन्यवाद ज्ञापित किया।सम्मेलन के पहले दिन पशुधन प्रजनन, प्रजनन जैव प्रौद्योगिकी, तनाव शरीर क्रिया विज्ञान, ताप तनाव निगरानी, जलवायु-सहिष्णुता, जीनोम इंजीनियरिंग, क्रायोसंरक्षण, पुनर्योजी चिकित्सा और सतत पशुधन उत्पादन सहित समकालीन विषयों पर वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को वरिष्ठ वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों के साथ संवाद का अवसर मिला।सम्मेलन में डॉ. गुंडुला हॉफमैन, लाइबनिज इंस्टीट्यूट फॉर एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एंड बायोइकोनॉमी (ATB), पॉट्सडैम, जर्मनी ने ऑनलाइन माध्यम से बीज वक्तव्य दिया। इसके अतिरिक्त डॉ. बी. एस. प्रकाश, पूर्व सहायक महानिदेशक (पशु पोषण एवं शरीर क्रिया विज्ञान), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद तथा पूर्व विशेषज्ञ सलाहकार, राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण (NRAA) एवं खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और डॉ. आशीष रंजन, वेटरिनरी रिसर्च एंड ऑन्कोलॉजी क्लिनिक, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग, यूटी साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर, डलास, टेक्सास, अमेरिका ने भी व्याख्यान दिए। डॉ. आशीष रंजन का व्याख्यान भी ऑनलाइन माध्यम से हुआ।इस अवसर पर तीन पुस्तकों Compendium of Abstracts – APACON-2026, Compendium of Lead Papers – APACON-2026 तथा Fundamentals of Livestock and Poultry Management का विमोचन किया गया। Fundamentals of Livestock and Poultry Management के लेखक डॉ. उत्कर्ष कुमार त्रिपाठी एवं डॉ. अनुराधा कुमारी, पशुधन उत्पादन प्रबंधन विभाग, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय, कृषि विज्ञान संस्थान, राजीव गांधी दक्षिणी परिसर, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय हैं।सम्मेलन के दौरान APA Lifetime Achievement Award-2025 प्रो. बी. एस. प्रकाश को प्रदान किया गया। APA Fellow Awards डॉ. आशीष मिश्रा और डॉ. बी. रामबाबू नाइक को प्रदान किए गए। APA Best Teacher Awards डॉ. सोहन वीर सिंह, डॉ. निशांत कुमार और डॉ. राकेश कुमार सिंह को प्रदान किए गए। APA Best Girl Student Award डॉ. सुहाना परवीन मुकित को तथा APA Best PhD Thesis Award डॉ. प्रियंका एम. कित्तूर को प्रदान किया गया। Prof. A. K. Pal Best MVSc Thesis Award डॉ. पल्लवी हेम्ब्रम को तथा APA Best Research Paper Award डॉ. मीती पुनेथा को प्रदान किया गया।प्रथम दिवस का समापन सार्थक वैज्ञानिक चर्चा, शोध प्रस्तुतियों एवं विशेषज्ञों तथा प्रतिभागियों के बीच संवाद के साथ हुआ। सम्मेलन ने युवा शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों को वरिष्ठ वैज्ञानिकों से संवाद करने, अपने शोध निष्कर्ष साझा करने तथा अंतर्विषयक अनुसंधान की संभावनाओं को समझने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।
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