वाराणसी। यह समस्त बीएचयू परिवार के लिए अत्यंत गर्व का विषय है कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR), नई दिल्ली ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय को राजेंद्र मेमोरियल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ रिसर्च (RMNIHR), पटना के सहयोगी सेंटर फॉर कोलैबोरेटिव रिसर्च (CCR) के रूप में चयनित किया है। आईसीएमआर द्वारा पोस्ट-कालाजार डर्मल लीशमैनियासिस (PKDL) के प्रभावी उपचार एवं नियंत्रण के लिए चिकित्सीय उपायों के विकास हेतु बीएचयू को ₹5 करोड़ का शोध अनुदान स्वीकृत किया गया है। यह परियोजना बीएचयू वाराणसी, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) लखनऊ तथा राजेंद्र मेमोरियल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ रिसर्च (आरएमएनआईएचआर) पटना के बीच रणनीतिक शोध सहयोग का हिस्सा है। यह प्रतिष्ठित शोध अनुदान बीएचयू की अनुसंधान क्षमता, वैज्ञानिक विशेषज्ञता एवं नवाचार को सुदृढ़ करने के साथ-साथ कालाजार एवं पोस्ट-कालाजार डर्मल लीशमैनियासिस जैसे उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों के लिए नवीन चिकित्सीय समाधान विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रस्तावित परियोजना के अंतर्गत पोस्ट-कालाजार डर्मल लीशमैनियासिस के बेहतर उपचार एवं प्रबंधन हेतु एक नवीन चिकित्सीय फॉर्मूलेशन विकसित एवं मूल्यांकित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य त्वचा के घावों के प्रभावी उपचार तथा त्वचा के सामान्य रंग की पुनर्बहाली को बेहतर बनाना है। यह सहयोगात्मक शोध पहल न केवल पोस्ट-कालाजार डर्मल लीशमैनियासिस के लिए संभावित बेहतर उपचार विकल्प के विकास में सहायक होगी, बल्कि अनुवादात्मक अनुसंधान, युवा शोधकर्ताओं के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को भी बढ़ावा देगी तथा भविष्य में इस महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के समाधान में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। इस केंद्र का नेतृत्व प्रो. राकेश कुमार सिंह, विभागाध्यक्ष/प्रोफेसर, जैव रसायन विभाग, विज्ञान संस्थान, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय द्वारा किया जाएगा, जो इस सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च (CAR) अनुदान के प्रधान अन्वेषक (Principal Investigator) होंगे। इस सहयोगात्मक शोध कार्यक्रम में विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के बहुविषयक विशेषज्ञों एवं वैज्ञानिकों की सहभागिता होगी जिसमें डॉ. कृष्णा पांडेय (निदेशक, आरएमएनआईएचआर, पटना), प्रो. पी.एस. रजनीकांत (वैज्ञानिक, बीबीएयू, लखनऊ), डॉ. आशीष कुमार (वैज्ञानिक, आरएमएनआईएचआर, पटना), डॉ. ऋषिकेश कुमार (वैज्ञानिक, आरएमएनआईएचआर, पटना) तथा डॉ. कुमार अभिषेक (वैज्ञानिक, आरएमएनआईएचआर, पटना) शामिल हैं।
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