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रामलीला सिद्धौना गाजीपुर: जब गधे पर बैठकर आते थे गांव के प्रधान

गाजीपुर। सैदपुर ब्लाक के सिधौना गांव की रामलीला अपने दिव्य मंचन एवं उत्कृष्ट कला के लिए ही नही कई विशेषताओं के लिए भी प्रसिद्ध है। आदर्श रामलीला समिति द्वारा आयोजित इस रामलीला में पात्र बनने के लिए लोग अपनी नौकरी, रोजगार और दूर शहरों में परिवार छोड़कर आते है। रामलीला के संस्थापक सदस्य रहे स्व मुसाफिर सिंह रामलीला के बहुमुखी कलाकार थे। जिन्हें गांव के लोग भिखारी ठाकुर भी कहते थे। मंचीय कला के साथ ही नृत्य कला, गायन, गीत लेखन में निपुण रहे मुसाफिर सिंह महिला किरदार में मालिन की भूमिका में जान डाल देते थे। गांव के प्रधान होने के बाजवूद धनुष यज्ञ के दिन लदहवा राजा बनकर जनक जी के दरबार में गधे पर बैठकर आते थे। उनके एक एक संवाद और अदा देखकर लोग हंसते हंसते लोटपोट हो जाते थे। उनके साथी रहे स्व लालचंद पांडेय महिला का किरदार इतना जीवंत करते थे कि उनकी अदा पर महिलाएं भी फिदा हो जातीं थी। लालचंद पाण्डेय की वजह से सिधौना गांव का नककटैया लीला पूरे इलाके में मशहूर हो गयी। लालचंद पांडेय सुपर्णखा बनकर लक्ष्मण और राम को रिझाने में जो मोहक अदा, कमर का मटकाना, आंखों में मादकता और नारियों के त्रिया चरित्र को दर्शाते थे उसे देखकर लोग मद मस्त हो जाते थे। इसी तरह स्व बलिराम सिंह के रावण का अभिनय और स्व चन्द्रमा सिंह के परशुराम का किरदार आज भी लोग याद कर सिहर उठते है। वरिष्ठ पत्रकार रहे स्व फूलचंद भारती और मुन्नीलाल पांडेय सिधौना रामलीला में कौतुक प्रहसन और हास्य रस को संभालते थे। संस्थापक रहे स्व रामदयाल मिश्रा जी व्यास का दायित्व निभाते हुए सम्पूर्ण रामलीला के कलाकारों के संवाद कंठस्थ याद कर लिए थे। दृश्य संयोजन एवं प्रसंगों पर उनका पूरा कमांड रहता था। स्व लंका यादव भी महिला चरित्र के साथ अपनी मोहक अदा से लोगों का मनोरंजन करते थे। सिधौना के संगीतमय रामलीला में स्व तहसीलदार पांडेय, बद्री पांडेय, स्व झिलमिट नाइ सहित आधा दर्जन लोक कलाकारों की भूमिका महत्वपूर्ण होती थी।

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