वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पंडित बृजनाथ छात्रावास में आज “बदलते भारतीय राजनीति एवं सामाजिक परिवेश में किसान: चौधरी चरण सिंह जी की वैचारिकी की उपयोगिता” विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सक्रिय सहभागिता रही।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय लोक दल के प्रदेश अध्यक्ष अमन पांडेय उपस्थित रहे। उन्होंने अपने वक्तव्य में जोर देकर कहा कि वर्तमान समय में किसान केवल आर्थिक मुद्दों का केंद्र नहीं है, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है। अमन पांडेय जी ने चौधरी चरण सिंह जी की विचारधारा को मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि उनकी वैचारिकी किसानों को शोषित वर्ग के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र की रीढ़ और सामाजिक न्याय के प्रतीक के रूप में स्थापित करती है। उन्होंने वर्तमान कृषि नीतियों, किसान आंदोलनों और ग्रामीण भारत की चुनौतियों के संदर्भ में चरण सिंह जी के दर्शन की प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।इसके अलावा, राष्ट्रीय लोक दल के प्रदेश महासचिव गणेश शंकर चतुर्वेदी, जिला उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह, जिला अध्यक्ष हृदयानंद, हिमांशु, पार्थ तिवारी सहित सोनभद्र से आए छात्र एवं कार्यकर्ता भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।कार्यक्रम के संयोजक एवं काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के शोध छात्र कुंवर रत्नाकर सिंह ने विषय पर अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह जी की वैचारिकी आज के बदलते राजनीतिक और सामाजिक परिवेश में किसानों को सिर्फ उपेक्षित वर्ग के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा के रूप में स्थापित करती है। रत्नाकर सिंह ने “किसान पहले, किसान अंतिम” के दर्शन को वर्तमान कृषि कानूनों, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), किसानों की कर्जमुक्ति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के पुनरुत्थान जैसे मुद्दों पर अत्यंत प्रासंगिक बताया। उन्होंने जोर दिया कि आज जब किसान आंदोलन और शहरी-ग्रामीण विभाजन बढ़ रहा है, तब चरण सिंह जी की विचारधारा किसानों को राजनीतिक शक्ति के रूप में मजबूत करने का सबसे कारगर माध्यम है।वक्ताओं ने अपने संबोधन में सामूहिक रूप से कहा कि चौधरी चरण सिंह जी की विचारधारा आज भी भारतीय कृषि व्यवस्था और ग्रामीण समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने किसानों की समस्याओं, कृषि नीतियों में आवश्यक बदलाव और वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में किसान की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने भी सक्रिय भागीदारी की, प्रश्न पूछे और अपने विचार साझा किए, जिससे संवाद और अधिक सार्थक एवं जीवंत बना।अंत में कार्यक्रम के संयोजक कुंवर रत्नाकर सिंह (शोध छात्र, बीएचयू) ने आभार ज्ञापन किया। उन्होंने मुख्य अतिथि अमन पांडेय जी सहित सभी अतिथियों, वक्ताओं, राष्ट्रीय लोक दल के नेताओं तथा उपस्थित छात्रों और कार्यकर्ताओं का हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी चौधरी चरण सिंह जी की प्रासंगिक विचारधारा पर नियमित रूप से ऐसे विचारपरक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि युवा पीढ़ी को किसान-केंद्रित राजनीति और सामाजिक न्याय की सही दिशा मिल सके।यह संशोधित प्रेस विज्ञप्ति मुख्य अतिथि अमन पांडेय जी पर विशेष ध्यान देते हुए तैयार की गई है। उनके वक्तव्य को प्रमुखता दी गई है, उन्हें “मुख्य अतिथि” के रूप में स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया गया है, और उनके योगदान को पहले और विस्तार से जगह दी गई है, जबकि कुंवर रत्नाकर सिंह जी का वक्तव्य भी संयोजक के रूप में उचित महत्व के साथ रखा गया है। भाषा औपचारिक, संतुलित और समाचार-उपयुक्त रखी गई है।

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