गाजीपुर। जिले में स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। गलत और मनमाने बिजली बिल से त्रस्त उपभोक्ताओं की आवाज अब मुखर होने लगी है। इसी कड़ी में गाजीपुर के प्रमुख समाजसेवी दुर्गेश राय ने लखनऊ पहुंचकर विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष डॉ. अवधेश वर्मा से मुलाकात की और जिले की जमीनी हकीकत से अवगत कराया। दुर्गेश राय ने बताया कि स्मार्ट मीटर के जरिए उपभोक्ताओं को चार गुना तक बिजली बिल भेजे जा रहे हैं, जिससे आम जनता आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान है। जिले में करीब डेढ़ लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, लेकिन इनकी मॉनिटरिंग जीएमआर कंपनी और विभागीय अधिकारियों द्वारा सही तरीके से नहीं की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उपभोक्ताओं के मीटर में “माइनस बैलेंस” दिखाकर बार-बार बिजली काट दी जाती है। भीषण गर्मी में लोग मजबूरी में कर्ज लेकर बार-बार रिचार्ज करा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद 3 से 4 दिन तक बिजली बहाल नहीं हो पा रही है। कमर्शियल उपभोक्ताओं की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। जहां पहले 1000–1200 रुपये तक बिल आता था, अब वही बढ़कर 8 से 10 हजार रुपये तक पहुंच रहा है। खास बात यह है कि बिल एकमुश्त न आकर टुकड़ों में माइनस बैलेंस के रूप में काटा जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को समझ ही नहीं आ रहा कि आखिर भुगतान किस बात का किया जा रहा है। दुर्गेश राय ने यह भी आरोप लगाया कि जब उपभोक्ता शिकायत लेकर अधिकारियों के पास पहुंचते हैं तो उन्हें “बिल सही है, जमा कर दीजिए” कहकर लौटा दिया जाता है। वहीं एसडीओ और जेई स्तर के अधिकारियों के पास बिल संशोधन का अधिकार भी सीमित कर दिया गया है, जिससे समस्या और बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि विभाग में उपभोक्ताओं से गलत तरीके से वसूली की खुली छूट मिल गई है और उच्चाधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं, जबकि जनप्रतिनिधि भी इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए डॉ. अवधेश वर्मा ने आश्वासन दिया कि शिकायतों को संज्ञान में लेकर जल्द ही उपभोक्ता हित में कार्रवाई की जाएगी और दोषी अधिकारियों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे। गाजीपुर में स्मार्ट मीटर अब सुविधा के बजाय सिरदर्द बनता जा रहा है। अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो यह मुद्दा बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
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