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गाजीपुर के तीन राजपूत नेता भाजपा में तलाश रहे हैं अपना भविष्‍य

शिवकुमार   

गाजीपुर। जिले की सियासत में तीन राजपूत दिग्‍गज नेता भारतीय जनता पार्टी में अपना भविष्‍य तलाश रहे हैं। इसके लिए वह भाजपा के हर चौखट पर हाजिरी लगा रहे हैं। पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह ने समाजवादी पार्टी से अपनी राजनीति का करियर शुरु किया। समाजवादी पार्टी ने उन्‍हे जिला पंचायत अध्‍यक्ष और गाजीपुर लोकसभा का सांसद बनाया। इसके बाद 2014 में उनका लोकसभा का टिकट सपा हाईकमान ने काट दिया। इसके बाद वह सपा के लगातार सक्रिय राजनीति में बने रहे। सपा नेतृत्‍व ने उनके भाई को विधानसभा का टिकट और उनकी पत्‍नी को जिला पंचायत का टिकट दिया लेकिन दोनों लोग असफल रहे। 2019 में लोकसभा का टिकट नही मिलने पर राधेमोहन सिंह सपा पर माफिया को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए सपा से इस्‍तीफा दे दिया। तबसे लेकर आजतक राधेमोहन सिंह ने कोई राजनीति‍क दल की सदस्‍यता नही ली। सदस्‍यता नही लेने के बावजूद भी वह खुलेआम भाजपा और सीएम योगी का समर्थन करते रहे। सीएम योगी ने भी उनको बड़ा सम्‍मान दिया उनके स्‍टेडियम को करोड़ रुपये की धनराशि विकास के लिए दी। इसके बाद मोहम्‍मदाबाद मुख्‍यमंत्री के कार्यक्रम में उन्‍हे मंच पर कुर्सी मिली। जब भी लखनऊ जाते हैं तब मुख्‍यमंत्री से मिलकर अपनी समस्‍या कह देते हैं। अब रक्षाबंधन के अवसर पर जिला मुख्‍यालय के हर चौराहों पर अपनी होर्डिंग लगवा कर आने वाले विधानसभा में आगाज करने का संकेत दे दिया है। अरुण सिंह 2014 में भाजपा छोड़ने के बाद संघर्ष समिति के बैनर तले गाजीपुर के गरीब जनता की समस्‍याओं के निराकरण के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जनता में उनकी लोकप्रियता के वजह से ही अरुण सिंह को नेताजी की उपाधि मिली हुई है। सीएम योगी से अरुण सिंह की नजदीकियां जगजाहिर है। इसीलिए अरुण सिंह ने ऐलान किया कि मुख्‍यमंत्री की लोक कल्‍याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए वह लगातार जिले में संपर्क करते रहेंगे। डा. सानंद सिंह ने समाजवादी पार्टी से अपनी सियासत का सफर शुरु किया। समाजवादी पार्टी ने उन्‍हे जहुराबाद विधानसभा से टिकट दिया। लेकिन उन्‍हे सफलता प्राप्‍त नही हुई। इसके बाद दोबारा उन्‍हे एमएलसी चुनाव में टिकट दिया लेकिन इसमे भी उन्‍हे सफलता हासिल नही हुआ। समाजवादी पार्टी के यदुवंशियों में उनका ताना-बाना खराब हो गया‍ जिसके चलते उनका सपा से मोह भंग हो गया और उन्‍होने साइकिल की सवारी छोड़कर हाथ में कमल का फूल ले लिया। भाजपा में आते ही वह सिद्धपीठ हथियाराम मठ के शरण में गये और आरएसएस के सहारे भाजपा की सक्रिय राजनीति में चर्चित हो गये हैं। भाजपा के प्रदेश स्‍तर के एक बड़े नेता ने बताया कि राधेमोहन सिंह और अरुण सिंह ने अभी भाजपा की सदस्‍यता नही लिया है इसलिए उनके भविष्‍य के विचार के बारे में कोई प्रश्‍न नही उठता है। डा. सानंद सिंह भाजपा में हैं और भाजपा हर कर्मठ कार्यकर्ता का सम्‍मान करती है।

 

 

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