मुहम्मद खालिद
गाजीपुर। देशभर में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन विद्यार्थियों के जीवन को ज्ञान, संस्कार और सही दिशा देने वाले शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में इस दिन विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर शिक्षकों का सम्मान किया जाता है। विद्यार्थी अपने गुरुजनों को शुभकामनाएं देकर उनके प्रति आभार प्रकट करते हैं। भारत में शिक्षक दिवस भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और द्वितीय राष्ट्रपति तथा महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। उनका जन्म 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुत्तनी में हुआ था। वे एक महान दार्शनिक, विद्वान और शिक्षाविद् थे। शिक्षा के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए उनकी जयंती को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई। कहा जाता है कि जब उनके कुछ विद्यार्थियों और मित्रों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा व्यक्त की तो डॉ. राधाकृष्णन ने व्यक्तिगत रूप से जन्मदिन मनाने के बजाय इस दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की इच्छा जताई। इसके बाद 5 सितंबर को देश में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। भारतीय संस्कृति में गुरु को सदैव विशेष स्थान दिया गया है। गुरु केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण, अनुशासन, संस्कार और नैतिक मूल्यों को विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षक बच्चों को उनके भविष्य की राह दिखाने के साथ ही उनमें आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना पैदा करते हैं। एक अच्छा शिक्षक विद्यार्थी की प्रतिभा को पहचानकर उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना करने, असफलताओं से सीखने और निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा भी विद्यार्थियों को शिक्षकों से मिलती है। इसलिए शिक्षक को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला माना जाता है। शिक्षक दिवस के अवसर पर जिले के विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, भाषण, निबंध प्रतियोगिता, कविता पाठ, वाद-विवाद तथा शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किए जाएंगे। कई विद्यालयों में विद्यार्थी एक दिन के लिए शिक्षक की भूमिका निभाकर कक्षाओं का संचालन भी करेंगे। इस दौरान विद्यार्थी अपने शिक्षकों को उपहार एवं शुभकामनाएं देकर उनके प्रति सम्मान व्यक्त करेंगे। शिक्षक दिवस केवल शिक्षकों को सम्मानित करने का परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार, संवेदनशील और संस्कारी नागरिक बनना भी है।
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