गाजीपुर। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के तत्वावधान में सम्पूर्ण क्रान्ति के पुरोधा लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी की जयंती पर गोराबाजार स्थित उनकी प्रतिमा स्थल पर माल्यार्पण कार्यक्रम एवं विचार गोष्ठी आयोजित हुई। इस अवसर पर महासभा के सभी कार्यकर्ताओं ने देश की आजादी की रक्षा करने एवं सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और ईमानदारी से काम करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर आयोजित विचार गोष्ठी मे बतौर मुख्य वक्ता महासभा के संरक्षक प्रेम कुमार श्रीवास्तव ने उनके व्यक्तित्व व कृत्रित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वह महान समाजवादी होने के साथ साथ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तानाशाही के खिलाफ संपूर्ण क्रांति का आह्वान किया था। क्रांति की तपिश इतनी अधिक थी कि केन्द्र में कांग्रेस सरकार को सत्ता से हटना पड़ा था। देश के कोने कोने में आग भड़क उठी थी। लोकनायक ने कहा था कि संपूर्ण क्रांति में सात क्रांतिया भी शामिल है। इन सातो क्रांतियों को मिलाकर उन्होंने भ्रष्टाचारा मिटाना, बेरोजगारी दूर करना, शिक्षा में क्रांति लाना आदि को किया था । महासभा के जिलाध्यक्ष अरूण कुमार श्रीवास्तव ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आज मुल्क में जयप्रकाश जी जैसे नेता की जरूरत है जो इस मुल्क को साम्प्रदायिक एवं जातिवादी दौर से निकाल सके। उन्होंने कहा कि वह एक महान स्वतंत्रता सेनानी व राजनैतिक नेता थे। उन्हें लोग लोकनायक के नाम से जानते हैं। वह सदैव एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में समर्पित रहे और उन्होंने भारत के गरीब और भूमिहीन लोगों को भूमि देने के लिए भूदान आंदोलन में भाग लिया। 1970 के दशक में इंदिरा गांधी के विरोध में शांतिपूर्ण आंदोलन चलाने वालों के रूप में जाना जाता था। मरणोपरांत 1999 में उनको भरात के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप शैलेश श्रीवास्तव , चन्द्र प्रकाश श्रीवास्तव,शैल श्रीवास्तव,आशुतोष श्रीवास्तव,मनीष श्रीवास्तव, प्रदीप श्रीवास्तव उर्फ राजन सुनील दत्त श्रीवास्तव , अमर नाथ श्रीवास्तव,गौरव श्रीवास्तव, अश्वनी कुमार श्रीवास्तव आदि उपस्थित थे। इस गोष्ठी का संचालन जिला महामंत्री अरूण सहाय ने किया।
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