वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संगीत एवं मंच कला संकाय के नृत्य विभाग द्वारा आयोजित बनारस घराने पर आधारित कथक नृत्य की पाँच दिवसीय कार्यशाला का भव्य समापन समारोह के साथ हुआ। इस कार्यशाला में कथक नृत्य के प्रख्यात गुरु पंडित माता प्रसाद मिश्र एवं गुरु पंडित रविशंकर मिश्र ने अपनी समृद्ध परंपरा, विशिष्ट सौंदर्यबोध एवं कलात्मक अभिव्यक्तियों से विद्यार्थियों को अवगत कराया। इस अवसर पर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलसचिव राजन श्रीवास्तव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संगीत एवं मंच कला संकाय के संकायाध्यक्ष-प्रभारी प्रो. राजेश शाह, नृत्य विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. दीपान्विता सिंघा रॉय, प्रो. प्रवीण उद्धव, प्रो. प्रेम किशोर मिश्र, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. चंदन विश्वकर्मा, डॉ. खिलेश्वरी पटेल, डॉ. शुभंकर डे सहित अन्य गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यशाला के दौरान दोनों गुरुओं से प्राप्त प्रशिक्षण एवं सीखी गई तकनीकों, रचनाओं तथा कलात्मक बारीकियों की सुंदर प्रस्तुति नृत्य विभाग के स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएच.डी. के विद्यार्थियों द्वारा पंडित ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह में दी गई। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से कार्यशाला में अर्जित ज्ञान एवं अनुभव को प्रभावशाली ढंग से मंच पर अभिव्यक्त किया। समारोह का विशेष आकर्षण दोनों गुरुजनों, पंडित माता प्रसाद मिश्र एवं पंडित रविशंकर मिश्र की मनमोहक युगल नृत्य प्रस्तुति रही। उनकी प्रस्तुति में बनारस घराने की समृद्ध कलात्मक परंपरा, सहज लालित्य, भावपूर्ण अभिव्यक्ति एवं अद्भुत लयात्मक कौशल का सुंदर समन्वय देखने को मिला, जिसने इस घराने की विशिष्ट पहचान एवं सौंदर्यबोध को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। इस कार्यशाला ने विद्यार्थियों को सीखने का एक व्यापक एवं समृद्ध अवसर प्रदान किया। साथ ही, कथक नृत्य के एक विशिष्ट आयाम, उसकी कलात्मक विरासत एवं परंपरागत विशेषताओं के प्रति विद्यार्थियों की रुचि, जिज्ञासा और समझ को भी विस्तार दिया। इस आयोजन ने गुरु-शिष्य परंपरा की उस विशिष्ट भावना को भी रेखांकित किया, जिसे वर्तमान विश्वविद्यालयी एवं यूजीसी की शैक्षणिक व्यवस्था के अंतर्गत समाहित करते हुए विशेष विषयों की शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया की निरंतरता को बनाए रखने का सार्थक प्रयास किया जा रहा है। ऐसे आयोजन भारतीय शास्त्रीय कलाओं की परंपरा, ज्ञान एवं गुरुजनों के अनुभवों को अगली पीढ़ी तक समर्पण और निष्ठा के साथ पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यशाला का संयोजन डॉ. दीपान्विता सिंघा रॉय, विभागाध्यक्ष, नृत्य विभाग द्वारा किया गया तथा सह-संयोजन डॉ. रंजना उपाध्याय ने किया।

Purvanchal News जोड़े आपको पूर्वांचल से….