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गाजीपुर: लेखनी के बदौलत सिंहासन यादव ने पत्रकारिता में बनाई अपनी पहचान  

गाजीपुर। चंदौली जनपद के नादी गांव के एक सामान्य किसान परिवार में 04 जनवरी, 1957 को जन्म लेने वाले सिंहासन सिंह यादव का व्यक्तित्व आरंभ से ही जुझारू रहा है। 70 के दशक में मीडिया के प्रभाव, पत्रकारिता के महत्व से प्रभावित हो लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ से जुड़ने का निर्णय लिया। अपनी कर्मभूमि गाजीपुर से पत्रकारिता का सफर 1978 में शुरू कर चार दशकों से निरंतर सक्रिय रचनात्मक व सृजनात्मक विशिष्ट उपलब्धियों के लिए जाने जाते रहे है। दो दशक से अधिक समय तक “दैनिक जागरण’ के गाजीपुर प्रभारी का पदभार सफलतापूर्वक संभालने के बाद “नई दुनिया” के जिला संवाददाता का दायित्व निभाते हुए दिल्ली से प्रकाशित “लोक पंचायत” के उत्तर प्रदेश ब्यूरो प्रमुख के रूप में कार्यरत रहे। राष्ट्रीय पत्रिका “शुक्रवार” में प्रकाशित समसामयिक लेख लोकप्रिय रहे है। ईमानदारी, निष्पक्षता, निरपेक्ष भाव से दायित्वों के निर्वहन, जनपक्षधारिता, जनसरोकारों के प्रति कटिबद्धता के लिए जनप्रिय रहे है। एक सामान्य पत्रकार से संपादक तक की भूमिका का सफल निष्पादन करने के साथ ऐसे समय में जबकि पत्रकारिता संक्रमण काल से गुजर रही थी, वैश्वीकरण व उदारीकरण के बाद आने वाले बदलावों के दौर में खबरों के मानकीकरण व शुचिता के लिए विशेष प्रयास करते हुए पुरानी व नई पीढ़ी के बीच सेतु बने। शासन तथा जनता के बीच सशक्त माध्यम बनते हुए गरीबों, उपेक्षितों, पीडितों को अपनी लेखनी से आवाज दी। उत्कृष्ट व सराहनीय सेवाओं को स्वयंसेवी संस्थाओं ने समय-समय पर पहचान व सम्मान दिया। सेटरी इन्टरनेशनल ने विशिष्ट व असाधारण योगदान के लिए सम्मानित किया। मीडिया के अलावा व्यक्तिगत रूप से सरकार व शासन के समक्ष गाजीपुर समेत पूर्वांचल के विकास के लिए पहल करते हुए उत्तर प्रदेश की राज व्यवस्था को सुधारने के लिए मार्गदर्शन का प्रयास निरन्तर जारी है।

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