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विश्व उच्च रक्तचाप दिवस पर विशेष: ‘साइलेंट किलर’ है हाई ब्लड प्रेशर, सजगता ही है इसका सबसे बड़ा बचाव- डा. संध्‍या यादव

वाराणसी। प्रत्येक वर्ष 17 मई को ‘विश्व उच्च रक्तचाप दिवस’ (World Hypertension Day) मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर लोगों को हाई ब्लड प्रेशर के गंभीर खतरों के प्रति जागरूक करना है। डा. वंदना यादव के बताया कि उच्च रक्तचाप को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण शुरुआती दौर में स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते, लेकिन यह अंदर ही अंदर शरीर के मुख्य अंगों को नुकसान पहुँचाता रहता है। संतुलित खान-पान, भोजन में नमक की सीमित मात्रा और नियमित व्यायाम को अपनी जीवनशैली में शामिल कर इस जानलेवा बीमारी से पूरी तरह बचा जा सकता है।

चुनौतीपूर्ण है गर्मियों में गर्भावस्था के दौरान हाइपरटेंशन

वर्तमान समय में गर्भवती महिलाओं में उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) की समस्या तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चिंताओं में शामिल हो गई है। जब गर्भावस्था के दौरान रक्तचाप का गर्मियों में अत्यधिक तापमान, थकान और शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) के कारण रक्तचाप का स्तर अचानक बढ़ जाता है, जो मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए अत्यंत जोखिम भरा हो सकता है।

इन प्रमुख लक्षणों को न करें नजरअंदाज

गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप होने पर शरीर में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं:

सिर में लगातार और तेज दर्द होना।

आंखों के सामने धुंधलापन या देखने में परेशानी।

चेहरे, हाथ और पैरों में अचानक अत्यधिक सूजन (एडिमा) आना।

बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन का तेजी से बढ़ना।

चक्कर आना, घबराहट और सांस लेने में तकलीफ होना।

विशेषज्ञों की चेतावनी: समय रहते यदि इन लक्षणों की पहचान कर उपचार न शुरू किया जाए, तो यह ‘प्री-एक्लेमप्सिया’ जैसी गंभीर स्थिति का रूप ले सकता है, जिससे प्रसव के दौरान माँ और शिशु दोनों के जीवन को खतरा हो सकता है।

गर्भवती महिलाओं के लिए बचाव के मुख्य उपाय

गर्मियों के इस मौसम में गर्भवती महिलाएं कुछ सावधानियां अपनाकर इस खतरे से सुरक्षित रह सकती हैं:

हाइड्रेशन पर दें विशेष ध्यान: दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी, नारियल पानी, या नींबू पानी लें ताकि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बना रहे। धूप और लू से बचें: दोपहर के समय सीधे धूप में निकलने से बचें। आरामदायक, ढीले और हल्के रंग के सूती (कॉटन) कपड़े पहनें।

खान-पान में बदलाव: भोजन में नमक की मात्रा कम करें। पैकेट बंद खाद्य पदार्थ, अत्यधिक तेल-मसाले और तली-भुनी चीजों के सेवन से पूरी तरह परहेज करें।

संतुलित दिनचर्या: आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल और डेयरी उत्पादों को शामिल करें। डॉक्टर की सलाह पर हल्की शारीरिक गतिविधि या योग करें और पर्याप्त आराम करें।

नियमित जांच: गर्भावस्था के दौरान नियमित अंतराल पर अपने ब्लड प्रेशर की जांच कराती रहें। किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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