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बीएचयू के कुलपति ने किया फीटल इकोकार्डियोग्राफी मशीन का उद्घाटन

वाराणसी। जनसामान्य को उन्नत चिकित्सा सेवाएँ एवं आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता पर आगे बढ़ते हुए चिकित्सा विज्ञान संस्थान के हृदय रोग विभाग में दो नई अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ स्थापित की गई हैं। इन सुविधाओं में फीटल इकोकार्डियोग्राफी मशीन तथा उन्नत इकोकार्डियोग्राफी प्रयोगशाला शामिल हैं। इनके माध्यम से हृदय रोगियों के लिए उन्नत हृदय संबंधी निदान सेवाओं के साथ-साथ भ्रूण के हृदय की विशेष जाँच की सुविधा का विस्तार होगा। इन सुविधाओं से पूर्वांचल सहित बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड तथा नेपाल के मरीज विशेष रूप से लाभान्वित होंगे क्योंकि उन्हें इन उन्नत एवं विशेषीकृत हृदय चिकित्सा सेवाओं के लिए महानगरों तक नहीं जाना होगा। अत्याधुनिक इमेजिंग तकनीक से युक्त फीटल इकोकार्डियोग्राफी मशीन भारत के सरकारी क्षेत्र में स्थापित होने वाली इस प्रकार की दूसरी तथा उत्तर प्रदेश में पहली ऐसी मशीन है। यह प्रणाली विकसित हो रहे भ्रूण के हृदय के विस्तृत आकलन के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त है। इसके माध्यम से भ्रूण के हृदय की त्रि-आयामी (3D) इमेजिंग तथा हृदय के विभिन्न भागों एवं प्रमुख धमनियों का विस्तृत आकलन किया जा सकता है। इसकी उन्नत इमेजिंग एवं स्वीपिंग तकनीक के माध्यम से हृदय की अत्यंत सूक्ष्म संरचनात्मक असामान्यताओं की भी पहचान की जा सकती है। फीटल इकोकार्डियोग्राफी के माध्यम से गर्भावस्था के दौरान जन्मजात हृदय विकारों की प्रारंभिक पहचान एवं आकलन संभव होता है। भ्रूण के हृदय का विकास गर्भावस्था के प्रारंभिक सप्ताहों में ही शुरू हो जाता है, जबकि इसकी विस्तृत हृदय संबंधी जाँच सामान्यतः लगभग 18वें सप्ताह से की जा सकती है। यह सुविधा चिकित्सकों को भ्रूण में हृदय संबंधी असामान्यताओं की प्रारंभिक अवस्था में पहचान एवं उनका स्वरूप का पता लगाने में सहायता करेगी। इससे गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिजनों को समय पर परामर्श तथा गर्भावस्था के उचित प्रबंधन में सहायता मिल सकेगी। उन्नत इकोकार्डियोग्राफी प्रयोगशाला में उच्च क्षमता वाली चार-आयामी (4D) इकोकार्डियोग्राफी मशीन स्थापित की गई है। इसमें त्रि-आयामी (3D) ट्रांसइसोफेगल एवं ट्रांसथोरेसिक इकोकार्डियोग्राफी, स्ट्रेन इमेजिंग, स्ट्रेस इकोकार्डियोग्राफी तथा कॉन्ट्रास्ट इकोकार्डियोग्राफी सहित विभिन्न प्रकार की जाँच सुविधाएँ उपलब्ध हैं। यह मशीन वास्तविक समय में तथा बाद में विश्लेषण के लिए ऑफलाइन छवियाँ उपलब्ध कराती है, जिससे निदान के साथ-साथ शल्यक्रिया संबंधी प्रक्रियाओं में भी सहायता मिलती है। मशीन में वयस्क हृदय रोगों के निदान तथा उनके उपचार में सहायता प्रदान करने वाली सभी प्रमुख विधियाँ उपलब्ध हैं। डॉ. सुयश त्रिपाठी हृदय रोगों से पीड़ित मरीजों पर अनुसंधान के लिए इस मशीन का उपयोग कर रहे हैं। कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने हृदय रोग विभाग में इन सुविधाओं का उद्घाटन किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ चिकित्सक भी उपस्थित रहे। अपने संबोधन में प्रो. चतुर्वेदी ने हृदय रोग विभाग के भावी विकास की संभावनाओं तथा चिकित्सा विज्ञान संस्थान के व्यापक विकास दृष्टिकोण पर चर्चा की। उन्होंने विभाग के विकास के लिए स्पष्ट कार्ययोजना एवं निर्धारित लक्ष्यों के निर्धारण की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान संस्थान जैसे प्रमुख शैक्षणिक चिकित्सा केंद्र में रोगी सेवा, अनुसंधान तथा शैक्षणिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। संस्थागत उत्कृष्टता के लिए गुणवत्तापूर्ण रोगी सेवा, शैक्षणिक विकास और नवाचार पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि किसी चिकित्सा केंद्र की प्रतिष्ठा केवल उपचार किए गए मरीजों की संख्या से निर्धारित नहीं होती, बल्कि वहाँ इलाज के मामलों की गुणवत्ता एवं जटिलता, अपनाई जाने वाली नवीन प्रक्रियाओं तथा नैदानिक सेवाओं की निरंतर नई सीमाएँ निर्धारित करने की क्षमता भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान संस्थान में जटिल हृदय रोगों के उपचार की संस्थागत क्षमता विकसित करना प्रमुख लक्ष्य होना चाहिए। प्रो. एस. एन. संखवार, निदेशक, चिकित्सा विज्ञान संस्थान ने हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी रोगों के बढ़ते भार को देखते हुए इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी सेवाओं को सुदृढ़ करने के महत्व पर चर्चा की। प्रो. पुनीत, चिकित्सा अधीक्षक, सर सुंदरलाल चिकित्सालय ने नवनिर्मित सुविधाओं के महत्व पर चर्चा करते हुए बाल हृदय चिकित्सा सेवाओं के भावी विस्तार की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बाल हृदय चिकित्सा इकाई के माध्यम से जन्मजात एवं अन्य हृदय रोगों से पीड़ित बच्चों के लिए विशेषीकृत चिकित्सा सेवाओं का विस्तार होगा तथा चिकित्सालय द्वारा बच्चों को विशेष हृदय चिकित्सा उपलब्ध कराने की क्षमता सुदृढ़ होगी। डॉ. अजित सिंह, आचार्य प्रभारी, ट्रॉमा सेंटर ने कहा, “स्वास्थ्य सेवाएँ तभी सार्थक है, जब वह मरीजों तक समय पर और प्रभावी रूप से पहुँच सके।” प्रो. विकास अग्रवाल, विभागाध्यक्ष, हृदय रोग विभाग ने स्वागत संबोधन में विभाग के इतिहास तथा एक समग्र केंद्र के रूप में उसके विकास की यात्रा की जानकारी दी। उन्होंने विभाग में उन्नत निदान एवं इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी सेवाओं के विस्तार पर चर्चा की। प्रो. धर्मेंद्र जैन ने धन्यवाद ज्ञापन प्रेषित किया। कार्यक्रम का समन्वय हृदय रोग विभाग के डॉ. उमेश पांडेय, डॉ. सौमिक घोष तथा डॉ. राजपाल प्रजापति ने किया। डॉ. प्रतिभा राय ने फीटल इकोकार्डियोग्राफी की विभिन्न तकनीकी विशेषताओं की जानकारी दी तथा नवस्थापित मशीन के माध्यम से भ्रूण के हृदय के चार-आयामी (4D) आकलन के लाभों पर चर्चा की। कार्यक्रम के दौरान विभाग में उपलब्ध सुदृढ़ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी सेवाओं के ढाँचे तथा भारत में हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी रोगों के बढ़ते भार पर भी चर्चा की गई। विशेष रूप से युवाओं में हृदयाघात के बढ़ते मामलों को देखते हुए उन्नत हृदय चिकित्सा सेवाओं तथा समय पर उपचार की आवश्यकता पर चर्चा की गई। हृदय रोग विभाग में आधुनिक कैथ लैब के माध्यम से चौबीसों घंटे विभिन्न चिकित्सकीय प्रक्रियाएँ की जाती हैं। विभाग में प्रतिदिन लगभग 25–30 चिकित्सकीय प्रक्रियाएँ की जाती हैं, जिनमें कोरोनरी एंजियोग्राफी एवं एंजियोप्लास्टी के साथ-साथ संरचनात्मक तथा जन्मजात हृदय रोगों से संबंधित इंटरवेंशनल प्रक्रियाएँ शामिल हैं। विभाग नवजात शिशुओं से लेकर वयस्कों तक सभी आयु वर्ग के मरीजों को उन्नत हृदय चिकित्सा सेवाएँ प्रदान कर रहा है। यह विभाग की उन्नत एवं विशेषीकृत हृदय चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करने की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

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