लखनऊ। जैव-चिकित्सा और उच्च अनुसंधान के क्षेत्र में लखनऊ विश्वविद्यालय ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम दर्ज कराई है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR), नई दिल्ली ने अपनी प्रतिष्ठित ‘अन्वेषण’ (ANVESHAN) पहल के अंतर्गत ₹2 करोड़ की लागत वाली एक अभिनव एवं सहयोगी शोध परियोजना को आधिकारिक मंजूरी प्रदान की है। यह उच्चस्तरीय शोध लखनऊ विश्वविद्यालय के बायोकेमिस्ट्री (जैव रसायन) विभाग, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU), लखनऊ तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संबद्ध एस.एस. खन्ना गर्ल्स डिग्री कॉलेज, प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में संचालित किया जाएगा।
परियोजना का उद्देश्य एवं तकनीकी स्वरूप:
स्वीकृत परियोजना का शीर्षक *”ए पायलट स्टडी ऑन एआई-ड्रिवन गट-ब्रेन एक्सिस फ्रेमवर्क टारगेटिंग न्यूरोपेप्टाइड सिग्नेचर्स इन एजिंग ह्यूमंस”* (A Pilot Study on AI-Driven Gut-Brain Axis Framework Targeting Neuropeptide Signatures in Aging Humans) है। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य वृद्धावस्था (मानव एजिंग) के दौरान आंत और मस्तिष्क (Gut-Brain Axis) के मध्य होने वाले जटिल जैविक संवादों की पड़ताल करना है। यह बहुविषयक पायलट अध्ययन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग एल्गोरिदम को बायोकेमिकल, क्लिनिकल तथा कम्प्यूटेशनल विश्लेषण के साथ एकीकृत करेगा। इसके माध्यम से शोध दल स्वस्थ उम्र बढ़ने तथा उम्र से जुड़े शारीरिक व न्यूरोलॉजिकल ह्रास से संबंधित विशिष्ट न्यूरोपेप्टाइड हस्ताक्षरों (Neuropeptide Signatures) की सटीक पहचान करने का प्रयास करेगा।
शोध दल का बहु-संस्थाई नेतृत्व:*
इस अंतःविषयक परियोजना का नेतृत्व प्रमुख वैज्ञानिकों के कुशल मार्गदर्शन में होगा:
प्रमुख अन्वेषक (Principal Investigator):* डॉ. रुद्र प्रकाश ओझा, बायोकेमिस्ट्री विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय।
सह-प्रमुख अन्वेषक (Co-PI):* डॉ. राज कमल श्रीवास्तव, बायोकेमिस्ट्री विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय।
सहयोगी सह-प्रमुख अन्वेषक (Co-PI):* डॉ. सुमित रुंगटा, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU), लखनऊ।
सहयोगी सह-प्रमुख अन्वेषक (Co-PI):* डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह, एस.एस. खन्ना गर्ल्स डिग्री कॉलेज (संबद्ध इलाहाबाद विश्वविद्यालय), प्रयागराज।
स्वास्थ्य क्षेत्र और समाज पर प्रभाव:
यह अध्ययन बायोकेमिस्ट्री, क्लिनिकल मेडिसिन, न्यूरोसाइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विशेषज्ञों को एक साझा मंच पर लाता है। इस अध्ययन के निष्कर्ष उम्र बढ़ने से जुड़ी न्यूरोलॉजिकल (जैसे डिमेंशिया व याददाश्त संबंधी समस्याएं) और मेटाबॉलिक विकृतियों की शुरुआती चरण में पहचान करने में अत्यधिक सहायक सिद्ध होंगे। साथ ही, यह भविष्य में आंत को लक्षित करने वाली नवीन निवारक और उपचारात्मक रणनीतियों (Therapeutic & Preventive Strategies) के विकास का आधार तैयार करेगा। अनुदान स्वीकृति पर संयुक्त रूप से प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शोध दल ने कहा कि “आईसीएमआर (ICMR) का यह समर्थन हमारे साझा व सहयोगी अनुसंधान प्रयासों की गुणवत्ता की राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता है। हम लखनऊ विश्वविद्यालय, केजीएमयू और एस.एस. खन्ना गर्ल्स डिग्री कॉलेज की संयुक्त विशेषज्ञता, क्लिनिकल डेटा और वैज्ञानिक संसाधनों के माध्यम से मानव स्वास्थ्य और एजिंग के क्षेत्र में समाजोपयोगी व उच्च-प्रभावकारी शोध परिणाम प्रस्तुत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।” यह प्रतिष्ठित ग्रांट क्षेत्रीय स्तर पर मेडिकल व अकादमिक संस्थानों के बीच अंतःविषयक बायोमेडिकल शोध को सुदृढ़ करने तथा उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों के वैज्ञानिक समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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