वाराणसी। बुधवार को, कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने डॉ. सुद्युम्न आचार्य द्वारा लिखित पुस्तक “मास्टरपीस ऑफ भरहुत” का विमोचन किया। डॉ. आचार्य भारत के राष्ट्रपति द्वारा ‘राष्ट्रीय पंडित’ की उपाधि से सम्मानित है। अपने संबोधन में प्रो. चतुर्वेदी ने कहा, “मैं खुद को बहुत सौभाग्यशाली मानता हूँ कि मैं एक ऐसे पवित्र स्थान (बीएचयू) से जुड़ा हूँ, जहाँ कई उल्लेखनीय और सार्थक कार्य हो रहे हैं।”यह पुस्तक प्राचीन भरहुत स्तूप के ऐतिहासिक, पुरातात्विक और सांस्कृतिक महत्व को उजागर करती है। यह पुस्तक मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल, भरहुत के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करती है। यह स्थल अपने प्राचीन बौद्ध स्तूप और प्रारंभिक भारतीय बौद्ध कला के उत्कृष्ट उदाहरणों के लिए प्रसिद्ध है। इसमें भरहुत की मूर्तियों, शिलालेखों और वास्तुकला के अवशेषों के ऐतिहासिक महत्व का अन्वेषण किया गया है, जो भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं।इस पुस्तक में भरहुत की रेलिंग और प्रवेश द्वारों की कलात्मक उत्कृष्टता, उनके ऐतिहासिक संदर्भ और भारत में बौद्ध कला व वास्तुकला के विकास को समझने में उनके योगदान पर चर्चा की गई है। इसमें सर अलेक्जेंडर कनिंघम के पुरातात्विक योगदान को भी रेखांकित किया गया है, जिन्होंने भरहुत स्तूप की पुनः खोज और दस्तावेजीकरण में अहम भूमिका निभाई थी। इस पुस्तक का एक महत्वपूर्ण पहलू भरहुत से प्राप्त शिलालेखों का विश्लेषण है, जो शुंग काल और बौद्ध स्मारकों को प्राप्त ऐतिहासिक संरक्षण (राज्याश्रय) के बारे में बहुमूल्य जानकारी देते हैं। यह पुस्तक भावी पीढ़ियों के लिए पुरातात्विक विरासत को संरक्षित करने और उसका दस्तावेजीकरण करने के महत्व पर भी प्रकाश डालती है।चित्रों से भरपूर यह पुस्तक भरहुत के इतिहास और कलात्मक विरासत को विद्वानों, शोधकर्ताओं, छात्रों और भारत के प्राचीन इतिहास, बौद्ध अध्ययन तथा पुरातत्व में रुचि रखने वाले पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास करती है।इस विमोचन समारोह में भारत कला भवन के निदेशक प्रो. श्रीरूप रायचौधरी व उप-निदेशक डॉ. निशांत, पिलग्रिम पबलिकेशन के रामानंद तिवारी, तथा संस्कृत विभाग के विभागाध्क्ष प्रो. सदाशिव द्विवेदी, प्रो. शारदिंदु तिवारी और प्रो. अभिमन्यु उपस्थित थे।
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