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गाजीपुर: रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती के अवसर पर कवि गोष्‍ठी का हुआ आयोजन

गाजीपुर। साहित्य चेतना समाज के तत्वावधान में ‘चेतना-प्रवाह’ कार्यक्रम के अन्तर्गत महान क्रांतिकारी एवं कवि रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती के अवसर पर शांति निकेतन इण्टर कालेज बरही के पूर्व प्रधानाचार्य प्रकाश चन्द्र दूबे के सरैयां स्थित आवास पर विचार-गोष्ठी एवं कवि-गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ संजय पाण्डेय की वाणी वंदना से हुआ। विचार-गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि 11 जून 1897 को शाहजहांपुर में जन्में रामप्रसाद बिस्मिल क्रांतिकारी के साथ अच्छे कवि भी थे।भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन की क्रांतिकारी धारा के प्रमुख सेनानी बिस्मिल ने अपने 11वर्ष के क्रांतिकारी जीवन में कई पुस्तकें लिखीं और स्वयं ही उन्हें प्रकाशित कराया।उनकी रचनाएँ देशभक्ति और क्रांति से ओतप्रोत हैं।अपनी पुस्तकों को बेचकर जो धनराशि मिली उससे उन्होंने हथियार खरीदे।उन हथियारों का उपयोग उन्होंने ब्रिटिश राज का विरोध करने के लिए किया।उनकी अधिकांश पुस्तकों को तत्कालीन सरकार ने जब्त कर लिया।बिस्मिल ने शचीन्द्रनाथ सान्याल और अशफाकउल्ला खाँ के साथ मिलकर ‘हिन्दुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन’ नामक क्रांतिकारी संगठन की स्थापना की।10 अगस्त 1025 को काकोरी में ट्रेन रोककर सरकारी खजाना लूटा।इस साहसिक घटना ने अंग्रेजी सरकार को हिलाकर रख दिया।उन्हें गिरफ्तार कर मुकदमा चलाया गया।जेल में ही उन्होंने अपनी आत्मकथा लिखी।19 दिसम्बर 1927 को मात्र 30वर्ष की आयु में उन्हें गोरखपुर में फांसी दे दी गई।बिस्मिल का पूरा जीवन मातृभूमि की स्वतन्त्रता के लिए समर्पित रहा।उनका अदम्य साहस और बलिदान भारतीय इतिहास में सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा। विचार-गोष्ठी के पश्चात हुई कवि-गोष्ठी में वरिष्ठ गीतकार नागेश मिश्र ने ‘दूध के कर्ज और मिट्टी का मान रखते हैं/वतन की खातिर हथेली पर जान रखते हैं’ सुनाकर बिस्मिल को अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए।ओज के कवि दिनेश चंद्र शर्मा ने ‘भारत माँ की बेड़ियों के जटिल बंधन को/माँ भारती के अभिनन्दन को/ कर दिया प्राण न्यौछावर’ सुनाकर श्रोताओं में देशभक्ति की भावना का संचार किया।वरिष्ठ कवि अमरनाथ तिवारी अमर ने ‘मतवाली होकर तरुणाई,खाई थी सीने पर गोली/ध्वज स्वतन्त्रता का फहर उठा,जब खेली प्राणों की होली’ सुनाकर क्रांतिकारियों के बलिदान को स्मरण किया।गोपाल गौरव ने  ‘तूफान समन्दर के कश्ती में आ गए/हैजे के किटाणु अब दस्ती में आ गए/बचना बहुत कठिन है यारो जान लो/जंगल के भेड़िए सभी बस्ती में आ गए’ सुनाकर सामाजिक विसंगतियों पर करारा व्यंग्य किया।बालेश्वर दत्त पाण्डेय ने ‘दूश्मनों की हर डगर को मूंग सा दलते रहे/पाँव में छाले पड़े थे वीर पर चलते रहे/जिस्म की हर साँस इन सेनानियों की देन है/वे बुझे थे इसलिए ही ये दीये जलते रहे’ सुनाकर शहीदों के त्याग व बलिदान का स्मरण कराया।मनोज यादव बेफिक्र ने ‘तुझसे आन रहेगी,बान रहेगी/भारत की माटी की शान रहेगी’ सुनाकर बिस्मिल को नमन किया।आशुतोष श्रीवास्तव ने जातियों,धर्मों में बंट गये हम लोग/बलिदानियों के बलिदान को भूल गये हम लोग’ एवं अभिमन्यु यादव ने ‘तन-मन-धन जिसने देश पर वारा है/ वह बिस्मिल हमें जान से प्यारा है’ सुनाकर अमर बलिदानियों के बलिदान को नमन किया। संजय पाण्डेय ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को प्रभावित किया। कार्यक्रम में संस्था के संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी,बटुक नारायण मिश्र,बालेश्वर दत्त पाण्डेय,प्रवेश प्रकाश,सुधीर पाण्डेय,रामानुज राय,अंजनी कुमार दूबे,प्रभात कुमार मिश्र,अमृत कुमार दूबे आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।अध्यक्षता बटुक नारायण मिश्र एवं संचालन संस्था के संस्थापक अमरनाथ तिवारी अमर ने किया।अंत में पूर्व प्रधानाचार्य प्रकाश चन्द्र दूबे ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

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