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एसटीसी और लखनऊ विश्वविद्यालय के बीच ऐतिहासिक समझौते के MoU पर हुआ हस्ताक्षर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने तथा राज्य के समावेशी व सतत विकास को डेटा-आधारित शोध और नीतिगत इनपुट से गति देने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य रूपांतरण आयोग (STC) और लखनऊ विश्वविद्यालय (LU) के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते के तहत लखनऊ विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर डेवलपमेंट एंड पॉलिसी रिसर्च (CDPR)’ की स्थापना की जा रही है, जो आगामी 6 वर्षों (2026-2032) तक राज्य सरकार के प्रमुख नीतिगत अनुसंधान केंद्र (Think-Tank) के रूप में कार्य करेगा।

गरिमामयी उपस्थिति:

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के इस अवसर पर राज्य रूपांतरण आयोग और लखनऊ विश्वविद्यालय के शीर्ष अधिकारी उपस्थित रहे:

मनोज सिंह ( प्रथम मुख्य कार्यकारी अधिकारी – CEO, राज्य रूपांतरण आयोग)

प्रोफेसर जे. पी. सैनी (कुलपति, लखनऊ विश्वविद्यालय)

प्रोफेसर अरविंद मोहन (संकाय अध्यक्ष, कला संकाय एवं निदेशक, CDPR)

डॉ. भावना मिश्रा (कुलसचिव, लखनऊ विश्वविद्यालय)

प्रोफेसर गीतांजलि मिश्रा (निदेशक, रैंकिंग सेल, लखनऊ विश्वविद्यालय)

मनोज सिंह (CEO, राज्य रूपांतरण आयोग – STC) ने कहा ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में नीति या योजना बनाने से पहले यदि उस विषय पर ठोस एवं प्रमाणिक शोध (Research) उपलब्ध हो, तो योजना निर्माण और उसके क्रियान्वयन में काफी सुगमता होती है। लखनऊ विश्वविद्यालय इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए आगे आया है। अर्बन कंस्ट्रक्शन, ई-कॉमर्स, रोबोटिक्स, न्यूक्लियर फिशन, ट्रैवल एंड टूरिज्म और क्लाउड सर्विसेज जैसे आधुनिक क्षेत्रों में विकास की अपार संभावनाएं हैं। आज देश में निर्मित होने वाले कुल मोबाइल फोन का 55% उत्पादन अकेले उत्तर प्रदेश में हो रहा है। यदि हमें उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है, तो यह MoU उसमें अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक भूमिका निभाएगा।” प्रोफेसर अरविंद मोहन (निदेशक, CDPR एवं डीन, कला संकाय) ने कहा कि “राज्य रूपांतरण आयोग (STC) जिस तीव्र गति और दूरदर्शिता के साथ प्रदेश के विकास के लिए कार्य कर रहा है, उसी प्रतिबद्धता के साथ हमारा केंद्र (CDPR) काम करेगा। हमारी सर्वप्रथम प्राथमिकता उत्तर प्रदेश के 25 सबसे पिछड़े जिलों (विशेष रूप से आकांक्षी क्षेत्रों) को अध्ययन और नीतिगत सुधारों का मुख्य केंद्र बनाना होगी, ताकि वहां की संरचनात्मक चुनौतियों को दूर किया जा सके।” प्रोफेसर जे. पी. सैनी (कुलपति, लखनऊ विश्वविद्यालय) ने कहा कि “लखनऊ विश्वविद्यालय अपनी उच्च स्तरीय अकादमिक एवं अनुसंधान क्षमताओं का उपयोग राज्य के सर्वांगीण विकास में योगदान देने के लिए पूरी तरह तत्पर है। यह साझेदारी विश्वविद्यालय के शोधार्थियों और शिक्षकों को राज्य निर्माण की प्रक्रिया से सीधे जोड़ेगी।”

CDPR के मुख्य दायित्व एवं कार्य योजना:

  1. वार्षिक राज्य आर्थिक सर्वेक्षण (State Economic Survey): केंद्र द्वारा प्रतिवर्ष उत्तर प्रदेश का आधिकारिक आर्थिक सर्वेक्षण तैयार किया जाएगा, जिसमें कृषि, उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा और राज्य वित्त का विस्तृत सांख्यिकी विश्लेषण होगा।
  2. जिला रैंकिंग प्रणाली (District Ranking): प्रदेश के सभी 75 जिलों का विकास सूचकांकों के आधार पर पारदर्शी मूल्यांकन कर वार्षिक जिला रैंकिंग जारी की जाएगी।
  3. विकास एवं मानव विकास रिपोर्ट: 6 वर्षों में 2 राज्य विकास रिपोर्ट (SDR), 2 मानव विकास रिपोर्ट (HDR) तथा क्षेत्रीय विकास रिपोर्ट प्रकाशित की जाएंगी।
  4. पिछड़े क्षेत्रों का विकास: पूर्वांचल व बुंदेलखंड के 25 पिछड़े जिलों एवं कृषि-जलवायु क्षेत्रों (Agro-climatic zones) का विशेष जमीनी अध्ययन किया जाएगा।

प्रशासनिक ढांचा व वित्तीय सहयोग:

शासी बोर्ड (Governing Board): CDPR के संचालन हेतु गठित उच्चस्तरीय बोर्ड की संयुक्त अध्यक्षता कुलपति, लखनऊ विश्वविद्यालय तथा CEO, राज्य रूपांतरण आयोग द्वारा की जाएगी।

प्रोजेक्ट नेतृत्व: प्रोफेसर अरविंद मोहन इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के टीम लीडर एवं मुख्य सलाहकार (Principal Consultant) होंगे।

वित्तीय अनुदान: राज्य रूपांतरण आयोग (STC)  संपूर्ण प्रोजेक्ट के लिए पूर्ण वित्तीय सहयोग प्रदान किया करेगा।

 

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