गाजीपुर। पी०जी० कालेज गाजीपुर में पूर्व शोध प्रबन्ध प्रस्तुत संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी महाविद्यालय के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ तथा विभागीय शोध समिति के तत्वावधान में महाविद्यालय के सेमिनार हाल में सम्पन्न हुई, जिसमें महाविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी व छात्र- छात्राएं उपस्थित रहे। उक्त संगोष्ठी मे विज्ञान संकाय के शारीरिक शिक्षा एवं खेलकूद विषय के शोधार्थी विनोद कुमार जायसवाल ने अपने शोध प्रबन्ध शीर्षक “ए स्टडी ऑफ सेलेक्टेड साइकोलॉजिकल पैरामीटर्स ऑफ फिजिकल एजुकेशन टीचर्स” नामक विषय पर शोध प्रबन्ध व उसकी विषय वस्तु प्रस्तुत करते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में शारीरिक शिक्षा शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे विद्यार्थियों के शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक, सामाजिक एवं नैतिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। वर्तमान समय में शिक्षा व्यवस्था में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, प्रशासनिक उत्तरदायित्व, खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन, संसाधनों की कमी तथा विद्यार्थियों की बढ़ती अपेक्षाओं के कारण भौतिक शिक्षा शिक्षक अनेक प्रकार के मनोवैज्ञानिक दबावों का सामना कर रहे हैं। इन परिस्थितियों का प्रभाव उनके कार्य प्रदर्शन एवं व्यक्तिगत जीवन दोनों पर पड़ता है। प्रस्तुत शोध प्रबंध में शारीरिक शिक्षा शिक्षकों के तीन प्रमुख मनोवैज्ञानिक मापदण्डों—कार्य तनाव (Job Stress), कार्य संतुष्टि (Job Satisfaction) तथा उत्तरदायित्व बोध (Sense of Responsibility) का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। साथ ही इन तीनों मापदण्डों के पारस्परिक संबंध तथा शिक्षण की गुणवत्ता पर इनके प्रभाव का विश्लेषण भी किया गया है। कार्य तनाव वह मानसिक एवं शारीरिक अवस्था है जिसमें व्यक्ति कार्य की अत्यधिक मांगों, सीमित संसाधनों तथा समय के दबाव के कारण तनाव का अनुभव करता है। शारीरिक शिक्षा शिक्षकों के लिए यह समस्या अधिक गंभीर हो सकती है क्योंकि उन्हें कक्षा शिक्षण के साथ-साथ खेल मैदानों में भी सक्रिय रहना पड़ता है। कार्य तनाव के प्रमुख कारणों जैसे कार्यभार की अधिकता, खेल सामग्री एवं संसाधनों का अभाव, प्रशासनिक दबाव, विद्यार्थियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी, खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन, पदोन्नति एवं प्रोत्साहन की कमी और समय के अभाव के कारण, मानसिक थकान, चिंता एवं अवसाद, कार्य प्रदर्शन में कमी, कार्य के प्रति अरुचि, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ और विद्यार्थियों के साथ प्रभावी संवाद में कमी देखी गयी है। जो शिक्षक अपने कार्य से संतुष्ट होते हैं, वे अधिक उत्साह, समर्पण एवं जिम्मेदारी के साथ विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हैं। कार्य संतुष्टि शिक्षण की गुणवत्ता को भी प्रभावित करती है प्रस्तुत शोध में महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के शिक्षकों में कार्य संतुष्ठी का स्तर उत्तम पाया गया है वहीं स्कूल शिक्षकों में में कार्य संतुष्टि का स्तर कुछ कम पाया गया है । उत्तरदायित्व बोध शिक्षक के व्यक्तित्व का वह गुण है जिसके कारण वह अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी से करता है। शोधार्थी ने बताया कि ये तीनों मनोवैज्ञानिक मापदण्ड एक-दूसरे से घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं। अधिक कार्य तनाव कार्य संतुष्टि को कम करता है, उच्च कार्य संतुष्टि उत्तरदायित्व बोध को मजबूत करती है, उत्तरदायित्व बोध शिक्षक की कार्यकुशलता बढ़ाता है और प्रशासनिक सहयोग तनाव को कम कर कार्य संतुष्टि एवं उत्तरदायित्व बोध दोनों को बढ़ाता है। अंत में उन्होंने कहा कि शारीरिक शिक्षा शिक्षक राष्ट्र के स्वस्थ एवं सशक्त नागरिकों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी कार्यक्षमता केवल उनके ज्ञान एवं कौशल पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उनके मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर भी आधारित होती है। कार्य तनाव, कार्य संतुष्टि तथा उत्तरदायित्व बोध जैसे मनोवैज्ञानिक मापदण्ड उनके व्यावसायिक प्रदर्शन, मानसिक स्वास्थ्य तथा विद्यार्थियों के विकास को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं। इसलिए शिक्षा संस्थानों को चाहिए कि वे ऐसा सकारात्मक एवं सहयोगात्मक वातावरण विकसित करें, जिसमें भौतिक शिक्षा शिक्षक तनावमुक्त होकर पूर्ण समर्पण एवं उत्तरदायित्व के साथ कार्य कर सकें। यही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वस्थ समाज की आधारशिला है। प्रस्तुतिकरण के बाद विभागीय शोध समिति, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ व प्राध्यापकों तथा शोध छात्र-छात्राओं द्वारा शोध पर विभिन्न प्रकार के प्रश्न पूछे गए जिनका शोधार्थी विनोद कुमार जायसवाल ने संतुष्टिपूर्ण एवं उचित उत्तर दिया। तत्पश्चात समिति एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफे० (डॉ०) राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने शोध प्रबंध को विश्वविद्यालय में जमा करने की संस्तुति प्रदान किया। इस संगोष्ठी में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफे० (डॉ०) राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के संयोजक प्रोफे० (डॉ०) जी० सिंह, शोध निर्देशक एवं शारीरिक शिक्षा एवं खेलकूद विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफे०(डॉ०) वीरेंद्र कुमार सिंह, डॉ० लवजी सिंह, प्रोफे० (डॉ०) सुजीत कुमार सिंह, डॉ० अनुराग सिंह, प्रोफे०(डॉ०) अरुण कुमार यादव, डॉ० रामदुलारे, डॉ० अशोक कुमार, डॉ० रविशेखर सिंह, डीएसडब्ल्यू प्रोफे० (डॉ०) संजय चतुर्वेदी , डॉ० योगेश कुमार, डॉ०शिवशंकर यादव, डॉ० मंजीत कुमार सिंह, डॉ० राकेशवर्मा, डॉ० रविशंकर सिंह, डॉ०अरुण कुमार सिंह, डॉ० प्रतिमा सिंह, डॉ० शैलेन्द्र कुमार सिंह, डॉ०कमलेश, प्रदीप सिंह, एवं महाविद्यालय के प्राध्यापकगण तथा शोध छात्र छात्रएं आदि उपस्थित रहे। अंत में डॉ० वीरेन्द्र कुमार सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया तथा संचालन अनुसंधान एवं विकास प्रोकोष्ठ के संयोजक प्रोफे०(डॉ०) जी० सिंह ने किया।
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