Breaking News

गाजीपुर: मिलाद-ए-मुस्तफ़ा: पूरी इंसानियत के लिए मोहब्बत, अमन, रहम और इंसाफ़ का पैग़ाम

गाजीपुर। मदरसा फैजूल क़ुरआन मुहम्मदाबाद के मुफ़्ती अमीरुद्दीन ने कहा कि हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा की पैदाइश इंसानी इतिहास की एक बहुत बड़ी और मुबारक घटना है। आप ऐसे समय में दुनिया में आए, जब समाज में अज्ञानता, ज़ुल्म, भेदभाव, आपसी दुश्मनी और ऊँच-नीच बहुत ज़्यादा थी। आपने अपनी शिक्षा और अपने अच्छे व्यवहार से पूरी इंसानियत को अमन, मोहब्बत, रहम, इंसाफ, बराबरी और भाईचारे का पैगाम दिया।

कुरआन मजीद में अल्लाह तआला फरमाता है:

وَمَا أَرْسَلْنَاكَ إِلَّا رَحْمَةً لِّلْعَالَمِينَ

अर्थ: “हमने आपको सारे जहान के लिए रहमत बनाकर भेजा है।”

(सूरह अल-अंबिया: 107)

इससे पता चलता है कि नबी-ए-करीम की रहमत केवल मुसलमानों के लिए नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत और तमाम मखलूक के लिए थी।

इंसानों से मोहब्बत और रहम

रसूलुल्लाह ने लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करने और उन पर रहम करने की शिक्षा दी। आपने गरीबों, यतीमों, विधवाओं, जरूरतमंदों और कमजोर लोगों की मदद करने पर बहुत जोर दिया। “जो रहम नहीं करता, उस पर रहम नहीं किया जाता।” आप ने जानवरों के साथ भी दया और अच्छा व्यवहार करने की शिक्षा दी। इससे हमें सीख मिलती है कि ताकतवर व्यक्ति को कमजोर का सहारा बनना चाहिए और अमीर को जरूरतमंद की मदद करनी चाहिए।

अमन और शांति का पैगाम

रसूलुल्लाह ने समाज में अमन कायम करने, झगड़ों को खत्म करने और लोगों के बीच सुलह कराने की शिक्षा दी। आपने किसी पर ज़ुल्म और ज्यादती करने से मना किया।

कुरआन में फरमाया गया:

لَا إِكْرَاهَ فِي الدِّينِ

अर्थ: “दीन में कोई ज़बरदस्ती नहीं है।”

(सूरह अल-बकरा: 256)

इस शिक्षा से पता चलता है कि धर्म के मामले में जबरदस्ती के बजाय समझ और अपनी इच्छा का महत्व है।

इंसाफ और न्याय

रसूलुल्लाह की शिक्षाओं में इंसाफ को बहुत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। आपने सिखाया कि इंसाफ करते समय अपने रिश्ते, धन, व्यक्तिगत लाभ या किसी से दुश्मनी को बीच में नहीं लाना चाहिए।

कुरआन में अल्लाह तआला फरमाता है:

إِنَّ اللَّهَ يَأْمُرُ بِالْعَدْلِ وَالْإِحْسَانِ

अर्थ: “बेशक अल्लाह इंसाफ और भलाई का हुक्म देता है।”

(सूरह अन-नहल: 90)

नबी ने अपने जीवन से भी इंसाफ का बेहतरीन उदाहरण पेश किया। आपके लिए इंसाफ सबके साथ बराबर था।

इंसानों की बराबरी

रसूलुल्लाह ने रंग, नस्ल, भाषा, परिवार और दौलत के आधार पर किसी इंसान को दूसरे इंसान से बड़ा मानने की सोच को खत्म किया। हज्जतुल विदा के मौके पर आपने इंसानों की बराबरी का बहुत महत्वपूर्ण पैगाम दिया। आपने बताया कि किसी अरब को गैर-अरब पर और किसी गैर-अरब को अरब पर केवल नस्ल की वजह से कोई श्रेष्ठता नहीं है। इंसान की असली श्रेष्ठता उसके अच्छे चरित्र और तक़वा में है। आज भी यह शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया में नस्ल, भाषा, धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव दिखाई देता है।

पड़ोसियों और दूसरे लोगों के अधिकार

रसूलुल्लाह ने पड़ोसियों के अधिकार पर बहुत जोर दिया। आपने सिखाया कि अच्छा इंसान वह है जिसके व्यवहार से दूसरे लोगों को शांति और सुरक्षा मिले। पड़ोसी मुस्लिम हो या गैर-मुस्लिम, उसके साथ अच्छा व्यवहार करना, उसकी मदद करना और उसके अधिकारों का ध्यान रखना अच्छे इंसानी व्यवहार का हिस्सा है।

महिलाओं, बच्चों और कमजोरों के अधिकार

रसूलुल्लाह ने महिलाओं के साथ अच्छे व्यवहार की विशेष शिक्षा दी। आपने बच्चों से बहुत प्यार और शफकत की और समाज के कमजोर लोगों के अधिकारों की रक्षा करने की शिक्षा दी। आप ने बताया कि किसी समाज की असली तरक्की तभी है, जब गरीब, यतीम, कमजोर और जरूरतमंद लोग भी इज्जत और सुरक्षा के साथ जीवन गुजार सकें।

माफी और दरगुज़र

नबी-ए-करीम की जिंदगी का एक बहुत सुंदर पहलू माफी और दरगुज़र भी है। आपने व्यक्तिगत मामलों में बदला लेने के बजाय माफ करने को पसंद किया। फत्ह-ए-मक्का के समय आपने उन लोगों के साथ भी माफी और दरगुज़र का व्यवहार किया जिन्होंने आपको और आपके साथियों को लंबे समय तक तकलीफें दी थीं। इससे हमें सीख मिलती है कि असली महानता केवल बदला लेने में नहीं, बल्कि ताकत और अधिकार होने के बावजूद माफ कर देने में भी है।

आज के समय के लिए नबी का पैगाम

आज दुनिया में बहुत तरक्की के बावजूद युद्ध, नफरत, भेदभाव, गरीबी, अन्याय और असहिष्णुता जैसी समस्याएं मौजूद हैं। ऐसे समय में नबी-ए-करीम की जिंदगी हमें बताती है कि इंसानियत की असली कामयाबी अमन, इंसाफ, रहम, मोहब्बत और एक-दूसरे के सम्मान में है। अगर हम नबी की शिक्षाओं को अपनी जिंदगी में अपनाएं, तो समाज में नफरत की जगह मोहब्बत, ज़ुल्म की जगह इंसाफ, भेदभाव की जगह बराबरी और दुश्मनी की जगह भाईचारा पैदा हो सकता है।

निष्कर्ष

हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा की पैदाइश केवल मुसलमानों के लिए खुशी का अवसर नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी और शिक्षाओं को समझने का भी अवसर है। आप ने इंसान को इंसान की इज्जत करना, कमजोर पर रहम करना, मजलूम का साथ देना, इंसाफ करना, पड़ोसी के अधिकार का ध्यान रखना और अमन व मोहब्बत को बढ़ावा देना सिखाया। आप वास्तव में रहमतुल्लिल आलमीन हैं। आपकी सीरत हमें यह संदेश देती है कि इंसानियत को नफरत नहीं, मोहब्बत चाहिए; ज़ुल्म नहीं, इंसाफ चाहिए; दुश्मनी नहीं, शांति चाहिए और भेदभाव नहीं, बराबरी चाहिए। इसलिए मिलाद-ए-मुस्तफ़ा का सबसे अच्छा संदेश यही है कि हम नबी से मोहब्बत को अपने अच्छे चरित्र और व्यवहार में दिखाएं और अपनी जिंदगी को रहमत, अमन, इंसाफ, मोहब्बत और इंसानियत की सेवा का जरिया बनाएं।

 

 

 

Image 1 Image 2

Check Also

गाजीपुर: यूएफबीयू के तत्‍वावधान में अपनी मांगों को लेकर बैंककर्मी करेंगे तीन दिवसीय हड़ताल

गाजीपुर। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने बैंक कर्मचारियों की लंबित एवं महत्वपूर्ण मांगों …