लखनऊ। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी), गोरखपुर के रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग एवं इंडियन डीसैलिनेशन एसोसिएशन (InDA) के संयुक्त तत्वावधान में तथा आईआईसीएचई स्टूडेंट चैप्टर, एमएमएमयूटी के सहयोग से “सतत भविष्य के लिए एकीकृत जल प्रबंधन एवं उपचार” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन हाइब्रिड मोड में किया गया, जिसमें कुल 150 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें 100 प्रतिभागियों ने भौतिक माध्यम से तथा 50 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता की। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण, जल प्रबंधन, जल उपचार एवं जल के पुनः उपयोग से जुड़ी उभरती चुनौतियों पर चर्चा करना तथा प्रतिभागियों को सतत जल प्रौद्योगिकियों, नवीन उपचार तकनीकों एवं संसाधन पुनर्प्राप्ति के संबंध में जानकारी प्रदान करना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिता के साथ हुआ, जिसके पश्चात उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रो. वी.एल. गोले, संयोजक, डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह, समन्वयक, डॉ. अजय सुजान, डॉ. प्रतीक खरे एवं डॉ. ज्योति की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यशाला के संयोजक प्रो. वी.एल. गोले ने अपने संबोधन में जल प्रबंधन एवं उपचार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में जल संरक्षण, जल की गुणवत्ता एवं सतत जल प्रौद्योगिकियों का विकास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रतिभागियों को कार्यशाला के माध्यम से प्राप्त ज्ञान का उपयोग शैक्षणिक, अनुसंधान एवं औद्योगिक क्षेत्रों में करने के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला में जल प्रबंधन एवं उपचार के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान प्रस्तुत किए गए। प्रो. सतेन्द्र प्रसाद चौरसिया, प्रोफेसर, रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग, मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT), जयपुर एवं अध्यक्ष, इंडियन डीसैलिनेशन एसोसिएशन (InDA) ने जल उपचार, जल सुरक्षा एवं सतत जल प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर अपना विशेषज्ञ व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने अनुभव एवं विशेषज्ञता के माध्यम से प्रतिभागियों को भविष्य के लिए प्रभावी एवं टिकाऊ जल प्रबंधन की आवश्यकता से अवगत कराया। इंजीनियर शिव प्रताप सिंह, इंजीनियर, एचयूआरएल गोरखपुर ने औद्योगिक क्षेत्र में जल प्रबंधन एवं उपचार से जुड़े व्यावहारिक अनुभव साझा किए। उनके व्याख्यान से विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ औद्योगिक प्रक्रियाओं में जल उपचार एवं प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं को समझने का अवसर प्राप्त हुआ। प्रो. मिथिलेश कुमार झा, निदेशक, एमआईटी मुजफ्फरपुर एवं रासायनिक अभियांत्रिकी के प्रोफेसर ने ऑनलाइन माध्यम से विशेषज्ञ व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने जल प्रबंधन एवं उपचार के क्षेत्र में अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा करते हुए प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। कार्यशाला के अंतर्गत बी.टेक. द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों के लिए पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने जल संरक्षण, जल उपचार एवं सतत जल प्रबंधन से संबंधित विषयों पर अपने विचार एवं रचनात्मक प्रस्तुतियां दीं। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने तकनीकी ज्ञान, नवाचार एवं रचनात्मकता का प्रदर्शन करने का अवसर प्राप्त हुआ। प्रतियोगिता के अंत में विजेताओं की घोषणा की गई तथा सभी प्रतिभागियों को उनकी मेहनत एवं उत्साह के लिए बधाई दी गई। कार्यशाला के समन्वयक डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह ने अपने वोट ऑफ थैंक्स (आभार ज्ञापन) में कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन, प्रो. वी.एल. गोले, इंडियन डीसैलिनेशन एसोसिएशन (InDA), आमंत्रित विशेषज्ञों, डॉ. अजय सुजान, डॉ. प्रतीक खरे, डॉ. ज्योति, समस्त शिक्षकगण, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं स्वयंसेवकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से सभी 150 प्रतिभागियों का धन्यवाद किया, जिन्होंने भौतिक एवं ऑनलाइन माध्यम से कार्यशाला में सहभागिता की। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों के ज्ञानवर्धक व्याख्यान एवं प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता ने कार्यशाला को सफल एवं उपयोगी बनाया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।
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