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बीएचयू की डॉ. नेहा का मद्रास विश्वविद्यालय में ‘ट्रांसफॉर्मिंग कम्युनिकेशन थ्रू एआई’  विषय पर विशेष व्याख्यान

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के पत्रकारिता और जनसम्प्रेषण विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नेहा पाण्डेय ने मद्रास विश्वविद्यालय, चेन्नई के पत्रकारिता और संचार विभाग में ट्रांसफॉर्मिंग कम्युनिकेशन थ्रू एआई: चैटबॉट्स, ऑटोमेशन ऐंड एमर्जिंग ऑपर्च्युनिटीज (Transforming Communication through AI: Chatbots, Automation and Emerging Opportunities) विषय पर विशेष व्याख्यान दिया।व्याख्यान में आधुनिक संचार के क्षेत्र में AI-आधारित चैटबॉट्स की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की गई। डॉ. पाण्डेय ने चैटबॉट्स के प्रकार, उनके काम करने के तरीके तथा पत्रकारिता, व्यावसायिक संचार (बिज़नेस कम्यूनिकेशन), स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में उनके उपयोग के बारे में समझाया। उन्होंने AI-संचालित संचार तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल से जुड़े नए अवसरों, संभावनाओं और नैतिक चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला।डॉ. नेहा पाण्डेय ने पत्रकारिता में AI-आधारित चैटबॉट्स की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया जिनमे ब्रेकिंग न्यूज़ देने, पाठकों के सवालों का जवाब देने, लेखों का सारांश तैयार करने, फैक्ट-चेकिंग में मदद करने और पत्रकारों को शोध तथा डेटा विश्लेषण में सहायता करने जैसे काम शामिल है। उन्होंने ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ के ‘हेलियोग्राफ’ (Heliograf) और ‘रॉयटर्स न्यूज़ ट्रेसर’ (Reuters News Tracer) का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे AI-आधारित टूल्स आधुनिक पत्रकारिता को बदल रहे हैं।  डॉ. नेहा पाण्डेय ने स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में AI-आधारित चैटबॉट्स की भूमिका पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे ये चैटबॉट्स स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देने, बीमारियों के लक्षणों के बारे में मार्गदर्शन करने, वर्चुअल परामर्श और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सहायता प्रदान करने के साथ-साथ अस्पताल के रोज़मर्रा के कामों- जैसे मरीज़ों का डेटा इकट्ठा करने, अपॉइंटमेंट शेड्यूल करने और रिमाइंडर भेजने की प्रक्रिया को ऑटोमेट कर सकते हैं। इन टूल्स की सहायता से कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ने के साथ उनके काम का बोझ भी कम हो रहा है।  AI उपकरणों से जुड़ी नैतिक चिंताओं पर बात करते हुए, डॉ. पाण्डेय ने कई प्रमुख चुनौतियों का भी ज़िक्र किया, जिनमें गलत जानकारी (misinformation) (मिसइन्फर्मैशन) मिलने, ‘हैलुसिनेशन’ (गलत या मनगढ़ंत जानकारी देना), पूर्वाग्रह (बायस), भेदभाव, डेटा गोपनीयता, शैक्षणिक ईमानदारी, तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता, डिजिटल डिवाइड, सहमति और कॉपीराइट से जुड़े प्रश्न और जवाबदेही शामिल हैं।  व्याख्यान के बाद डॉ. पाण्डेय ने प्रश्न-उत्तर सत्र में चैटबॉट्स के नैतिक उपयोग और AI द्वारा तैयार की गई सामग्री की सत्यता की जांच (वेरिफिकेशन) से जुड़े सवालों का जवाब दिया। विभाग की प्रमुख डॉ. बेउलाह राहेल ने डॉ. नेहा पाण्डेय का स्वागत किया, जबकि पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. टी. आर. गोपालकृष्णन ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा। इस सत्र में संकाय के सदस्यों, शोधार्थियों और छात्रों ने भाग लिया।

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