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लखनऊ विश्वविद्यालय में योग दिवस कार्यक्रम के लिए प्‍लाविनी प्राणायाम अभ्‍यास सत्र का हुआ आयोजन

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के योग विभाग, फैकल्टी ऑफ योग एवं ऑल्टरनेटिव मेडिसिन तथा किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वाधान में १२वे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम श्रृंखला के अंतर्गत, केजीएमयू, लखनऊ के स्विमिंग पूल परिसर में विशेष प्लाविनी प्राणायाम (जल योग) अभ्यास सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य योग की प्राचीन एवं विशिष्ट जल-आधारित विधियों से विद्यार्थियों, चिकित्सकों एवं आमजन को परिचित कराना था। इस अवसर पर योग विभाग के कॉर्डिनेटर डॉ. अमरजीत यादव ने प्लाविनी प्राणायाम के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्लाविनी प्राणायाम हठयोग में वर्णित एक महत्वपूर्ण प्राणायाम है, जिसे जल योग की प्रमुख विधियों में माना जाता है। इस अभ्यास में नियंत्रित रूप से श्वास ग्रहण कर शरीर में वायु का संतुलित संचय किया जाता है, जिससे शरीर की तैरने की क्षमता में वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि नियमित अभ्यास से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है, श्वसन तंत्र मजबूत होता है, मानसिक एकाग्रता विकसित होती है तथा शरीर और मन में संतुलन स्थापित होता है। डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान समय में जल योग की यह विधि स्वास्थ्य संवर्धन, तनाव प्रबंधन तथा समग्र कल्याण के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती है। कार्यक्रम में योग विभाग के पूर्व छात्र दुर्गेश गौड़ ने प्लाविनी प्राणायाम का व्यावहारिक प्रदर्शन करते हुए ताड़ासन, वृक्षासन, त्रिकोणासन, शवासन, पद्मासन एवं मकरासन सहित विभिन्न योगासनों का अभ्यास प्रस्तुत किया। इस अवसर पर डॉ. अमित आर्या ने भी जल में प्लाविनी प्राणायाम के साथ योगासनों का अभ्यास प्रदर्शन किया। योग विभाग के अन्य छात्र – छात्राओं ने विभिन्न आसन जैसे वीरभद्रासन, तिर्यक ताड़ासन, उत्तानपादासन,  पादहस्तासन एवं देवी आसन आदि का अभ्यास प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में उपस्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर डॉ.प्रो. आर. ए. एस. कुशवाहा ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि योग भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है। योग केवल रोगों की रोकथाम का माध्यम नहीं है, बल्कि यह स्वस्थ एवं संतुलित जीवन जीने की कला भी सिखाता है। उन्होंने कहा कि प्लाविनी प्राणायाम जैसे विशेष अभ्यास योग की व्यापकता और वैज्ञानिकता को प्रदर्शित करते हैं तथा ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन समय-समय पर किया जाना चाहिए। केजीएमयू की डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. रश्मि कुशवाहा ने अपने वक्तव्य में कहा कि योग शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और युवाओं को नियमित योगाभ्यास अपनाना चाहिए, जिससे वे स्वस्थ जीवनशैली विकसित कर सकें और तनावपूर्ण परिस्थितियों का बेहतर ढंग से सामना कर सकें। उन्होंने कार्यक्रम की सराहना करते हुए योग विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय की इस पहल को योग द्वारा स्वास्थ्य प्राप्ति के लिए जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया। कार्यक्रम में डॉ. भास्कर अग्रवाल, डॉ. पंकज, डॉ. आर. के. दीवान तथा डॉ. समीर गुप्ता सहित अनेक गणमान्य चिकित्सक, योग विभाग के शिक्षक, छात्र – छात्राएं और योग विशेषज्ञ उपस्थित रहे। अतः आपसे अनुरोध है कि प्रेस विज्ञप्ति को प्रकाशित करने की कृपा करें।

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