लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जे. पी. सैनी ने आज विश्वविद्यालय के द्वितीय परिसर स्थित विभिन्न संकायों एवं विभागों का व्यापक निरीक्षण किया। इस अवसर पर उनके साथ विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, विभागीय समन्वयक तथा कुलानुशासक मण्डल के सदस्य उपस्थित रहे। कुलपति प्रो. जे. पी. सैनी की अध्यक्षता में लखनऊ विश्वविद्यालय के अभियांत्रिकी एवं तकनीकी संकाय के अधिष्ठाता प्रो. एस. पी. सिंह तथा संकाय के अंतर्गत संचालित सभी विभागों के समन्वयकों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में शैक्षणिक गुणवत्ता, उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम, तथा विद्यार्थियों की रोजगारपरकता को बढ़ाने हेतु कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा की गई तथा उन्हें सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई। कुलपति प्रो. सैनी ने इस अवसर पर कहा कि इंजीनियरिंग शिक्षा को वर्तमान औद्योगिक आवश्यकताओं तथा राष्ट्रीय नियामक संस्थाओं के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बनाया जाना समय की मांग है। बैठक में निम्नलिखित प्रमुख निर्णय एवं प्रस्ताव लिए गए—
- अभियांत्रिकी पाठ्यक्रम को नवीनतम औद्योगिक आवश्यकताओं, उभरती प्रौद्योगिकियों तथा रोजगारपरक कौशलों के अनुरूप अद्यतन करने हेतु एक पाठ्यक्रम संशोधन समिति (Curriculum Review Committee) का गठन किया जाएगा।
2.सभी अभियांत्रिकी शाखाओं के लिए प्रथम सेमेस्टर का पाठ्यक्रम समान किए जाने का प्रस्ताव रखा गया। वर्तमान में प्रथम एवं द्वितीय दोनों सेमेस्टर सभी अभियांत्रिकी की शाखाओं के लिए समान हैं।
- अभियांत्रिकी मे शाखा परिवर्तन (Branch Change) की सुविधा वर्तमान तृतीय सेमेस्टर के स्थान पर द्वितीय सेमेस्टर के प्रारंभ में ही उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया, जिससे विद्यार्थियों को शीघ्र अवसर प्राप्त हो सके।
- आंतरिक मूल्यांकन प्रणाली को अधिक प्रभावी एवं सरल बनाने के उद्देश्य से दो मध्यावधि परीक्षाओं के स्थान पर केवल एक मध्यावधि परीक्षा आयोजित किए जाने का प्रस्ताव रखा गया।
- 8वें सेमेस्टर में ज़्यादा लचीलापन (flexibility) लाने के लिए एक प्रस्ताव पर चर्चा की गई। इसके तहत, उन छात्रों को छह महीने की फुल-टाइम इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग करने की अनुमति दी जाएगी, जिन्हें नामी मल्टीनेशनल कंपनियों (MNCs), राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों, रिसर्च संगठनों या तय मानदंडों (जिसमें कम से कम स्टाइपेंड/पैकेज की ज़रूरतें शामिल है) को पूरा करने वाले अन्य मंज़ूरशुदा संगठनों में अच्छी क्वालिटी की इंटर्नशिप मिलती है।
- लैबोरेटरी वाले हिस्से का मूल्यांकन सेमेस्टर के दौरान लगातार किया जाएगा, जिससे अलग से बाहरी प्रैक्टिकल परीक्षा की ज़रूरत नहीं रहेगी। इस बदलाव से उम्मीद है कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई में प्रैक्टिकल पर ज़्यादा ध्यान दिया जाएगा, छात्र लैबोरेटरी के काम में ज़्यादा दिलचस्पी लेंगे और लगातार सीखते रहेंगे।
लखनऊ विश्वविद्यालय ऐसी आधुनिक, लचीलापन और इंडस्ट्री के हिसाब से अभियांत्रिकी शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जो छात्रों को बदलती वैश्विक आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल कार्यबल प्रदान करे।
निरीक्षण के दौरान कुलपति ने परिसर की सुरक्षा व्यवस्था एवं अनुशासन से संबंधित विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की तथा आगामी शैक्षणिक सत्र में छात्रों के लिए सुरक्षित, अनुशासित एवं अनुकूल शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। उन्होंने परिसर में सुरक्षा उपायों को और अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष बल दिया।
इंजीनियरिंग संकाय के भ्रमण के दौरान कुलपति प्रो. सैनी ने संकाय के अधिष्ठाता एवं विभिन्न विभागों के समन्वयकों के साथ पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता, उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रमों के अद्यतन तथा उद्योग-जगत के साथ अकादमिक समन्वय को सुदृढ़ बनाने के संबंध में विस्तृत चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों की रोजगारपरक दक्षताओं को विकसित करने के लिए उद्योग-अकादमिक सहभागिता को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। सिलेबस संशोधन समिति का गठन लखनऊ विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संकाय में पाठ्यक्रम संशोधन हेतु एक समिति का गठन किया गया है। यह समिति विभिन्न विभागों के समन्वयकों एवं विशेषज्ञों के सहयोग से कार्य करेगी।
समिति की संरचना निम्नलिखित होगी:
* डीन, इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संकाय – अध्यक्ष
- माननीय कुलपति द्वारा नामित एक विशेषज्ञ – सदस्य
* समन्वयक, कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग – सदस्य
समन्वयक, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग – सदस्य
- समन्वयक, सिविल इंजीनियरिंग विभाग – सदस्य
* समन्वयक, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग – सदस्य
- समन्वयक, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग – सदस्य
इसके उपरांत कुलपति ने विधि संकाय के प्रस्तावित बहुमंजिली नवीन भवन के निर्माण हेतु चिन्हित स्थल का निरीक्षण किया। इस अवसर पर विधि संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. आर. के. वर्मा सहित संकाय के अन्य वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान नए पाठ्यक्रमों के प्रभावी संचालन, भविष्य की आवश्यकताओं तथा विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए भवन की रूपरेखा एवं अवसंरचनात्मक आवश्यकताओं पर विचार-विमर्श किया गया। कुलपति ने निर्माण विभाग के अभियंताओं एवं कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधियों को गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निर्माण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त शिक्षण एवं शोध वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है तथा नवीन अवसंरचनात्मक विकास इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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